लेकिन क्या हम निश्चिंत होंगे?

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जी के चक्रवर्ती

खैर आखिरकार सम्पूर्ण देश मे विषेकर जहां-जहां कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या कम थी या है ऐसी जगहों पर लॉकडाउन खत्म करने की घोषित समय 8 जून का भी वख्त आ ही गया और देश मे चल रहे लॉकडाउन की बंदिशों को हटाना आज के समय की जरूरत और मांग दोनों ही बराबर रूप से सामने आ रही थी। देश मे कोरोना संक्रमण की दृष्टिकोण से संवेदनशील इलाकों को छोड़कर उन सभी इलाको को लॉकडाउन से मुक्त करने की जो प्रक्रिया प्रारम्भ हुयी है वह विधिवत आठ जून से शुरू होगी, लेकिन लॉकडाउन को हटाने को लेकर विभिन्न राज्य सरकारों और उनके प्रशासन को दिये गए अधिकारों एवं दिशा निर्देशों पर यह निर्भर करेगा कि इसे किस तरह समाप्त किया जाये।

वैसे देश में सर्वप्रथम आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू रूप से आगे ले चलने की आवश्यकता है। इस बात की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि आवाजाही के प्रोत्साहित संबंधित गतिविधियों को केंद्र सरकार द्वारा पहले भी उठाये गये थे, लेकिन देश के राज्य सरकारों द्वरा इसमें अधिक रुचि न दिखाने के कारण यह फलीभूत नही हो सकी, इसी परिपेक्ष में देश अनेक राज्यों ने हवाई और रेल यात्रा शुरू करने को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर असहमति प्रकट कर भी चुकी थी जिसके परिणामस्वरूप देश मे कारोबारी गतिविधियां अपेक्षाकृत आगे बढ़ने में कामियाब न हो सकी वहीं राज्य सरकारों को कारोबारी गतिविधियों को गति प्रदान करने में आ रही बाधाओं को प्राथमिकता के तौर  पर उसे तुरन्त दूर किये जाने की जरूरत थी।

वैसे देश मे नि:संदेह लॉकडाउन जैसी स्थिति में बाहर से आने वाले लोगों के मध्य एक छटपटाहत जरूर थी,  लेकिन इन कदमों के उठाये जाने पर ऐसी कोई भी टिप्पणी या आख्या प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए कि देश मे कोरोना संक्रमणो का खतरा कम या समाप्त हो गया है बल्कि सच्चाई तो यह है कि संक्रमण का खतरा अभी टला नही है। क्योकि कोरोना संक्रमण के ताजे मामलों के सामने आना यही दर्शाता है कि अभी कोरोना संक्रमण का खतरा खत्म नही हुआ है बल्कि अब तो हमे इसी के साये में जिंदगी गुजारने के लिये मजबूर होने के साथ ही साथ हमे पल-पल कोरोना संक्रमण से बचते रहने के हर संभव उपायों को अपनाते हुये अपने आप को महफूज रखते हुये खासकर शारीरिक दूरी के नियम के प्रति सजग रहते हुये हमे प्रतिदिन के अपने काम-काज निपटाने होएंगे।

वैसे यह बात कतई ठीक नहीं कि कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफे के मामलों के बाद हम आपस मे एक-दूसरे से शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क लगाने को लेकर उस तरह की सतर्क नहीं दिख रहे है वास्तव में जितना कि उन्हेंं होना चाहिये था। देश के राज्य सरकारों को इसे लेकर विशेष ध्यान रखना पड़ेगा कि उनका प्रशासन सामाजिक दूरी के नियम का पालन कराने के नाम पर कहीं कारोबारी गतिविधियों को बल प्रदान करने वाले लोगों की आवाजाही जैसे क्रियाकलापों को  नियंत्रित न करने लगे जिसके परिणाम अच्छे तो नहीं होंगे वल्कि कारोबारी जगत इससे और भी अधिक प्रभावित होने से जो व्यापारी वर्ग के लोगों के साथ ही साथ देश के साधारण नागरिकों के लिए भी अच्छा नही होगा।

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