Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Wednesday, September 2
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    दीप्ति नवल के अभिनय की दमक और उन के गुम हो जाने की त्रासदी की तड़क

    By August 2, 2017 ब्लॉग No Comments9 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 818
    दयानंद पांडेय
    अभिनय में एक खास तेवर का पर्याय हैं दीप्ति नवल। मध्यमवर्गीय युवती का अक्स हैं वह। संजीदगी, सलीका शऊर और मंद मंद फूटती हंसी सहेजे, बेचारगी लपेटे दीप्ति नवल श्याम बेनेगल निर्देशित फ़िल्म जुनून में ‘घिरि आई काली घटा मतवारी!’ गाती हुई सिनेमा की दुनिया में आई थीं। फिर “एक बार फिर” में उन्हों ने अभिनय की सहजता की जो बयार बहाई तो वह एक ताजा झोंका बन गई हिंदी सिनेमा की दुनिया में। पर भला कौन जानता था कि बहुत जल्दी ही सचमुच वह काली घटा से घिर जाएंगी। बहरहाल।

    उन दिनों शबाना आजमी और स्मिता पाटिल सरीखी अभिनेत्रियां हिंदी सिनेमा में अपनी उपस्थिति दर्ज करा तहलका मचाए हुए थीं। ऐसे समय में दीप्ति नवल “एक बार फिर” में आ कर एक बार तो शबाना और स्मिता को भी दौड़ा ले गईं। फिर बहुत बाद में आई “सौदागर” की संक्षिप्त भूमिका में सन्निपात और संकोच की सिलवटों का कोलाज रचने वाली, मझधार में विधवा व्यथा जीने वाली दीप्ति नवल चंडीगढ़ में पैदा हुईं और लंदन में बढ़ी-पली और अचानक ही हिंदी फ़िल्मों में लैंड कर गईं बरास्ता विनोद पांडेय।

    “साथ साथ” में वह फिर फारुख शेख के साथ आईं। फ़िल्म में वह फारुख शेख के साथ प्यार की बेकली भी जीती है और दांपत्य का बिखराव भी, तो उन का अभिनय एक अंदाज़ बन जाता है । उन की आकुलता भी इतनी सहजता सहेजे रहती है कि वह सौंदर्य का सागर बन तन-मन को हिचकोले देने लगती है उन की मदमाती हंसी। यह उनकी हंसी की ही झनक है और सहजता भरे अभिनय की आंच जिसने उन्हें दर्शकों में इतना लोकप्रिय बना दिया ।

    “श्रीमान और श्रीमती” में उन की जोड़ी राकेश रोशन के साथ है और दांपत्य की दारुणता ही उन के हिस्से में है। पर गोबर पाथने से ले कर होटल में डांस तक का संसार वह इस खूबी से जीती हैं कि फ़िल्म की जान बन जाती है। इस फ़िल्म में संजीव कुमार- राखी और अमोल पालेकर-सारिका की भी जोड़ी है, पर निगाहें संजीव कुमार के बाद दीप्ति नवल ही पर टिकती है। इस फ़िल्म में संजीव कुमार के साथ दीप्ति नवल की ट्यूनिंग देखते बनती है।

    सई परांजपे की कथा में दीप्ति नवल नसीरुद्दीन शाह और फारुख शेख के साथ त्रिकोणात्मक प्यार रचते हुए उपस्थित है। मुंबइया चाल की सामूहिकता को दीप्ति नवल इस खूबी और सहजता से जीती है कि फ़िल्म का चुटीलापन और चटक हो जाता है।

    “मोहन जोशी हाजिर हो” में वह फिर चाल में है पर प्यार की पेंगे मारती हुई नहीं चाल की त्रासदी को तार-तार करती हुई, अदालती चक्कर घिन्नियों में टूटती हुई एक सामान्य दांपत्य को जीती हुई, एक लड़ाई लड़ती हुई। दरअसल मध्यमवर्गीय युवती की भूमिका जिस जिजिविषा और संजीदगी से वह जीती हैं, उस की जटिलता को जिस सरलता से जीती हुई अभिनय की बखिया सीती चलती हैं, वह अनुभव करने लायक है। एक “श्रीमान और श्रीमती” और दूसरे “एक बार फिर” को फ़िल्म छोड़ कर बाकी सारी फ़िल्मों में दीप्ति नवल मध्यमवर्गीय त्रासदी को ही तार-तार करती मिलती हैं। उन्हों ने ज़्यादातर यथार्थवादी फिल्में ही की हैं और “एक बार फिर” भले मध्य वर्गीय न सही यथार्थवादी फिल्म तो है ही। इस तरह फ़ैंटेसी फ़िल्म के नाम पर दीप्ति नवल के नाम संभवत: “श्रीमान और श्रीमती” ही है।

    कमला में वह शबाना के साथ हैं। एक आदिवासी युवती की भूमिका में। जिसे एक पत्रकार खरीद कर उसे दिल्ली लाता है, यह दिखाने के लिए कि आदिवासी लडकियों की खरीद-फरोख्त कैसे तो जारी है। और सरकार चुप है। अब अलग बात है कि रैकेट चलाने वाले लोग फ़िल्म में भारी पड जाते हैं। यह फ़िल्म में एक अलग बहस का विषय है। पर दीप्ति नवल ने यहां अभिनय की जो झीनी चादर बुनी है, वह अविस्मरणीय है। खास कर उस के लिए जो प्रेस कानफ़्रेंस आयोजित की गई है और उस में वह बिन बोले अपनी यातना घोल जाती हैं, वह दृश्य भूलता नहीं। बिन बोले अपनी यातना अभिनय में बांचना जो किसी को सीखना हो तो वह इस फ़िल्म में दीप्ति नवल से सीखे।

    “अंधी गली” में उन के साथ कुलभूषण खरबंदा हैं। एक नए फ्लैट की चाह में दोनों इस तरह तिल-तिल कर मरते हैं कि वह चाह एक त्रासदी बन जाती है। मायके का सारा कुछ बेच कर फ्लैट की बात बनती भी है तो दीप्ति को लगता है कि पति ने उसे इस्तेमाल कर लिया है। वह छली गई है। और अंतत: पति ही जब उस से बलात्कार करता है तो वह फ्लैट से नीचे कूद कर जान दे देती है। इस चरित्र की जटिलता को बड़ी ही बारीकी से दीप्ति नवल ने बुना और जिया है। तांगे से गांव जाने और आने वाले दृश्य इतने मर्मस्पर्शी बन पड़े हैं कि मन भींग जाता है, आंखें नम हो जाती हैं।

    अमोल पालेकर निर्देशित “अनकही” दीप्ति नवल की अविस्मरणीय फ़िल्म है। “अनकही” में अभिनय की दमक देखने लायक है। वह गांव की एक अबोध युवती है जो हिस्टिरिया की रोगी है। शहर आ कर कैसे कैसे मौकों से वह दो-चार होती है यह देखना एक अनुभव है। टेलीफ़ोन की घंटी बजती है तो वह भूत समझ कर डर जाती है। अमोल पालेकर के छल में फंस कर भी खुश हो जाती है। इस जटिल चरित्र को जीना हर किसी के वश की बात नहीं थी। पर दीप्ति नवल ने इस चरित्र को न सिर्फ़ जिया, अपितु अविस्मरणीय बना दिया। मराठी उपन्यास “कालाय तस्मै नम:” पर आधारित “अनकही” में सूर कबीर के पदों को भी इस अबोधता से दीप्ति ने पर्दे पर गाया है कि मन तरल हो जाता है।

    इत्तेफाक है कि अस्सी के दशक की ढेर सारी अविस्मरणीय और चर्चित फ़िल्में अधिकतर दीप्ति नवल के ही नाम है। केतन मेहता की “मिर्च मसाला” उन्हीं फ़िल्मों से एक है।“मिर्च मसाला” में भी वह शोषित पत्नी हैं। और उन की जोड़ी सुरेश ओबेराय के साथ है। इस फ़िल्म में उन की भूमिका छोटी है पर है यादगार। खास कर दो दृश्य। एक जिस में वह अपने जमींदार सरपंच पति से विद्रोह कर अपनी बेटी को पढ़ने स्कूल भेजती है और दूसरा गांव की एक औरत को बड़े जमींदार के हवाले करने के विरोध में गांव भर की महिलाओं को इकट्ठा कर के थाली पीटने वाला दृश्य। वह दृश्य अंगार उगलता है।

    प्रकाश झा की “हिप हिप हुर्रे” में उन की जोड़ी राजकिरण के साथ है। रांची जैसे कस्बाई मानसिकता वाले महानगर में कॉलेज अध्यापिका के चरित्र की जटिल बुनावट को बिना किसी अतिरेक के वह जीती हैं। “हिप हिप हुर्रे” में शफी इनामदार के साथ का प्रसंग और कॉलेज स्टूडेंट का छेड़छाड़ और फिर प्यार वाला प्रसंग भी अच्छा बन पड़ा है।

    प्रकाश झा की ही “दामुल” में दीप्ति नवल विधवा पुजारिन की भूमिका में हैं, जो जमींदार बने मोहन सिंह की रखैल भी है।और जब-जब गर्भ ठहर जाता है तो वह पुजारिन काशी कूच कर जाती है गर्भ गिराने। बाद में वही पुजारिन जमींदार के शोषण के खिलाफ गांव की सर्वाधिक मुखर आवाज़ बनती है तो यहां दीप्ति नवल का अभिनय अंगार बन जाता है।

    टेली फ़िल्म “दीदी” में कथा बंगाल की है। दीदी से तीसरे दर्जे की वेश्या बन जाने वाले चरित्र को दीप्ति चाबुक मारती हुई जिस आह के साथ जीती हैं कि वह छलकती भी है और कसकती भी है।

    पर तकलीफ़ होती है कि इतनी समर्थ अभिनेत्री जीते जी हम से बिला गई है। यह दांपत्य की गांठ दो सफल निर्देशकों की दो सफल अभिनेत्री पत्नियों को इस तरह डस लेगी, भला कौन जानता था? गुलज़ार की पत्नी राखी की ज़िंदगी में तो आंधी फ़िल्म आंधी बन कर आ गई और उन का दांपत्य उजाड गई। राखी खुद आंधी की नायिका की भूमिका करना चाहती थीं। पर गुलज़ार नहीं माने और यह भूमिका सुचित्रा सेन को दे बैठे। और उन का दांपत्य साल भर में ही उजड गया। तो भी राखी ने लंबा फ़िल्मी कैरियर जिया। और अपना बेस्ट भी दिया। तमाम सारे बिखराव के बावजूद। और फिर गुलज़ार और राखी के बीच एक सेतु उन की बेटी बोस्की भी हैं। पर दीप्ति नवल और प्रकाश झा के बीच ऐसा क्या घट गया कि उन का दांपत्य भी बहुत जल्दी ही बिखर गया, यह शायद वही दोनों ही जानते हैं। गुलज़ार और राखी के बीच तो बोस्की है। पर दीप्ति नवल और प्रकाश झा के बीच तो कोई संतान भी नहीं है। और फिर प्रकाश झा के पास लगातार फ़िल्में हैं। लेकिन दीप्ति नवल के पास तो ऐसा भी कुछ नहीं है। कैसे और कैसा जीवन हमारी यह समर्थ और प्रिय अभिनेत्री गुज़ारती हैं, यह वह ही बेहतर जानती होंगी। एक वाकया यहां नहीं भूलता। जब दीप्ति नवल की नई-नई शादी हुई थी तो तब प्रकाश झा का इतना डंका नहीं बजता था, न ही वह बहुत सफल निर्देशक तब हो पाए थे। तब रेखा ने दीप्ति नवल से एक जगह तंज में पूछ लिया कि, ‘तुम ने ऐसा क्या देख लिया प्रकाश झा में जो शादी कर ली?’ दीप्ति नवल ने उसी गुरुर से रेखा का तंज तोड कर रख दिया था तब यह कह कर कि, ‘वह कुंवारे हैं !’ रेखा चुप लगा गई थीं। उन दिनों तमाम अभिनेत्रियों में चलन सा था, अब भी है, शादी-शुदा मर्दों से शादी करना। खैर, दीप्ति नवल का वह दर्प इतनी जल्दी टूट जाएगा, यह भी भला कौन जानता था। अब जो भी हो पर अफ़सोस होता है कि एक समर्थ अभिनेत्री हम से ऐसे बिला गई है।उन के इस तरह अभिनय की दुनिया से गुम हो जाने की त्रासदी की तड़क कहीं गहरे मन को छील देती है। ऐसे लगता है जैसे दीप्ति नवल अपनी ही अभिनीत फ़िल्म अंधी गली की त्रासदी को अपने जीवन में भी जीती हुई अभिनय के फ़्लैट से छलांग लगा गई हैं।यह बहुत तकलीफ़देह है मेरे जैसे उन के प्रशंसकों के लिए। ऐसे ही में देखिए न गुरुदत्त और गीता दत्त की भी याद आ गई है। और कि उन की त्रासदी भी। ऐसा क्यों होता है सफल और सुलझे हुए जीनियस निर्देशकों और उन की समर्थ-सुंदर और सफल अभिनेत्री पत्नियों के साथ? समझना कुछ नहीं बहुत कठिन है।

    सरोकारनामा से साभार

    #depti naval

    Keep Reading

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Akshay’s terrifying ‘monster’ avatar vs. Saif’s gritty hero: the trailer reveals the showdown between the two superstars; releasing on September 11.

    अक्षय का खौफनाक ‘हैवान’ अवतार Vs सैफ का जुझारू हीरो ट्रेलर ने खोला दोनों सुपरस्टार्स की आर-पार जंग का राज, 11 सितंबर को रिलीज

    September 1, 2026
    Sadhana Sargam’s Ganpati Vandana and Badshah’s ‘Chimna’ rap: A musical extravaganza ranging from devotion to *desi* swag—featuring devotional *bhajans* for Ganesh Chaturthi and a fresh take on folk songs in the ‘Gondhal’ style.

    साधना सरगम की गणपति वंदना और बादशाह का ‘चिमणा’ रैप: भक्ति से देसी स्वैग तक संगीत की धूमगणेश चतुर्थी पर भक्ति भजन, ‘गोंधळ’ में लोकगीत का नया अंदाज

    September 1, 2026
    Films with big budget and star cast flopped in front of Hanuman Ansh.

    हनुमान अंश के सामने बड़े बजट और स्टार कॉस्ट वाली फिल्में धड़ाम

    September 1, 2026
    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    September 1, 2026

    अराइया गिर: जंगल के बीच एक सुकून भरी छुट्टी

    August 31, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading