भारतीय राजनीति में यह शुचिता और सादगी का दौर था

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लोहिया अकसर कहते थे कि भारत में एक चपरासी का पोता भी प्रधान मंत्री बन सकता है। उन का इशारा पंडित जवाहरलाल नेहरु की तरफ होता । लोग लोहिया से कहते कि इस तरह आप नेहरु को बेइज्जत क्यों करते रहते हैं ? तो लोहिया कहते थे कि मैं नेहरु को बेइज्जत नहीं करता अपने देश के लोकतंत्र की ताकत का बखान करता हूं कि एक चपरासी का पोता भी प्रधान मंत्री बन सकता है।

मोतीलाल नेहरु अपनी बैरिस्टरी के दम पर भले बहुत बड़े रईस हो गए थे, अपने रहने के लिए इलाहाबाद में आनंद भवन बनवाया था पर उन के के पिता गंगाधर नेहरु किसी सरकारी दफ़्तर में कभी चपरासी रहे थे। बाद में दिल्ली पुलिस में अफसर हो गए थे।

एक बार फिल्म समारोह में ख्वाज़ा अहमद अब्बास भी दिल्ली आए हुए थे। समारोह में नेहरु ने उन से अपने घर पर चाय पर आने के लिए कहा । ख्वाजा अहमद अब्बास ने उन से बताया कि वह अकेले नहीं आना चाहेंगे। उन की टीम के सात-आठ लोग और भी हैं , सब के साथ आना चाहेंगे । नेहरु ने उन से कहा कि ठीक है वह इंदिरा से बात कर लें । इंदिरा गांधी उन दिनों पंडित नेहरु की निजी सचिव हुआ करती थीं। ख्वाजा अहमद अब्बास ने उसी समारोह में पंडित नेहरु का संदर्भ देते हुए इंदिरा गांधी को यह बात बताई।

इंदिरा गांधी ने पूरी बात सुन कर ख्वाजा अहमद अब्बास से कहा कि फिर आप चाय पर मत आइए। क्योंकि एक आदमी की चाय का खर्च तो हम अफोर्ड कर सकते हैं, इतने लोगों का नहीं। यह सुन कर ख्वाजा अहमद अब्बास मुश्किल में पड़ गए तो इंदिरा गांधी ने उन्हें बताया कि असल में हमारे घर का खर्च पापा को मिली रायल्टी से ही चलता है। ख्वाजा अहमद अब्बास तब चुप रह गए थे। भारतीय राजनीति में यह शुचिता और सादगी का दौर था।

एक समय तो ऐसा भी था नेहरु के जीवन में जब गांधी के कहने पर पंडित नेहरु अपने हाथ के काते हुए सूत का ही कुर्ता पहनते थे। ऐसे पंडित नेहरु का 14 नवंबर को जन्म-दिन है। सब की आंख से आंसू पोछने का भरोसा देने वाले आधुनिक भारत के निर्माता और बच्चों के सदाबहार चाचा पंडित जवाहरलाल नेहरु को शत-शत नमन !

  • दयानन्द पांडेय, सरोकारनामा से

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