अयोध्या में त्रेता युग की झलक

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अयोध्या की दीपोत्सव परम्परा में एक नया अध्याय जुड़ा। सदियों बाद जनपद के नाम में सुधार हुआ। फैजाबाद की जगह अब जनपद का नाम अयोध्या होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौगात की बात कही थी। प्रभु राम की भव्य मूर्ति भी बनेगी। निश्चित ही यह सुंदर सौगात है। इसके साथ ही अयोध्या के विकास को गति प्रदान करने वाले कदम उठाए गए। अयोध्या और रामभक्तों को मुख्यमंत्री की यह दीपावली भेंट थी।
दीपावली त्रेता युग से चली आ रही भारतीय परंपरा है। इस दिन प्रभु राम लंका विजय कर अयोध्या पधारे थे। अयोध्या की उदासी दूर हुई। उत्साह, उमंग का वातावरण बना। इसी की अभिव्यक्ति दीप जला कर की गई। इसी के साथ एक सन्देश भी निर्मित हो गया। तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक बन गया। दूसरा सन्देश असत्य पर सत्य की जीत का था। कार्तिक मास की गहन अंधकार वाली अमावस्या की रात्रि दीयों की रोशनी से नहा गई थी।  दीपावली दीपों का पर्व भारतीय पहचान और अस्मिता से जुड़ गया।
भारतीय त्योहारों का केवल धार्मिक ही नहीं आध्यात्मिक महत्व ही नहीं होता। बल्कि इसमें सामाजिक और पर्यावरणीय सन्देश भी समाहित होता है। अयोध्या में पहली बार समाज के सभी लोगों ने एक साथ मिलकर दीपोत्सव का आयोजन किया था। इस प्रकार हमारे समाज ने समरसता को प्रतिष्ठित किया। वर्षा के बाद सफाई की आवश्यकता होती है। लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली आतिशबाजी उस समय नहीं थी। अयोध्या की यह दीपावली पर्व के रूप में स्थापित हुई। भारत ही नहीं विश्व के अनेक देशों में इसे मनाया जाता है। लेकिन हजारों वर्ष बाद अयोध्या की दीपावली उपेक्षित हुई। खासतौर पर विदेशी दासता में अयोध्या की विश्व स्तरीय दीपावली की प्रतिष्ठा कायम नहीं रह सकी। आजादी के बाद भी उत्तर प्रदेश में सरकारों ने यह मान लिया कि अयोध्या की दीपावली से उनका कोई सरोकार नहीं है।
लेकिन पहली बार यहां एक सन्यासी के नेतृत्व में सरकार बनी। अयोध्या की दीपावली को पुनः विश्वस्तरीय बनाने का संकल्प लिया गया। गत वर्ष इसकी शुरुआत हुई। इस बार कोरिया सहित अनेक देशों तक इसकी गूंज पहुंच गई।
अयोध्या में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित हुआ। अयोध्या में एक साथ तीन लाख दीपक जगमगा उठे। इससे पहले एक लाख पांच हजार  दीए जलाने का रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज है। इस बार का एक अन्य आकर्षण वॉटर शो था। पिछली बार अयोध्या में लेज़र शो के माध्यम से रामकथा दर्शाई गई थी। इस बार वॉटर प्रोजेक्शन शो के माध्यम से इसे दिखाया गया। इसके अलावा इंडोनेशिया, रूस, टोबैगो, त्रिनिदाद, श्रीराम भारतीय कला केंद्र के कलाकारों ने रामलीला का मंचन भी किया।अयोध्या में भगवान राम की डेढ़ सौ फीट से ऊंची प्रतिमा स्थापित होगी।  इसके नीचे पचास मीटर का पेडेस्टल बनाया जाएगा। मूर्ति राम कथा पार्क में स्थापित होगी। प्रतिमा के ठीक नीचे पौराणिक कथाओं पर आधारित म्यूजियम बनाया जाएगा। इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला किम जुंग-सूक से नई दिल्ली में मुलाकात की थी।
किम अयोध्या में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित दीपोत्सव समारोह तथा महारानी सुरीताना हिवो ह्वांग-वोक स्मारक के भूमिपूजन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। भारत और कोरिया के बीच सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक संबंध बहुत मजबूत रहे है। योगी आदित्यनाथ का यह प्रयास सराहनीय है। केवल एक ही वर्ष में इसका स्वरूप व्यापक हो गया है। इस बार कोरिया गणराज्य की प्रथम महिला इसमें सहभागी बनी। यह आशा को जा सकती है कि भविष्य में विदेशी अतिथियों के इस प्रकार शामिल होने की परंपरा आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा यहां रामलीला प्रस्तुत करने वाले देशों की संख्या भी बढ़ेगी। इस प्रकार अनेक देशों के साथ हमारा सांस्कृतिक संवाद बढ़ेगा। अयोध्या दीपोत्सव समारोह भक्तिभाव से प्रेरित था। बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।इस अवसर पर राज्यपाल राम नाईक ने तो इस आयोजन को अभियान बताया। योग और प्रयागराज कुंभ की तरह अयोध्या की दीपावली भी वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय और प्रतिष्ठित हो होगी। इस बार की अयोध्या दीपावली गत वर्ष की अपेक्षा अधिक भव्य है। यह क्रम चलता रहेगा।
 विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा कि देश अयोध्या के प्राचीन गौरव की ओर बढ़ रहा है। पिछले वर्ष से शुरू हुआ यह दीपोत्सव इसका प्रमाण है। इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल लालजी टण्डन भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि आज त्रेता युग की कल्पना की जा सकती है। उस समय भी अयोध्या के लोग ऐसे ही आनन्दित हुए होंगे। उस समय अयोध्या में प्रभु राम को ऋषि वशिष्ठ ने गले लगाकर स्वागत किया था। आज भी प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से उतरे राम, सीता, लक्ष्मण का स्वागत संतों ने किया।
योगी आदित्यनाथ ने करीब पौने दो सौ करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। कोरिया के लोग अयोध्या को मातामही या ननिहाल के रूप में मानते है। वहां के अधिसंख्य लोग इसी वंश से संबंधित है। अयोध्या की राजकुमारी पिता की आज्ञा से समुद्री यात्रा पर गईं थी। वाही उनका कोरिया के राजयकुमार से उनका विवाह हुआ था। यह सांस्कृतिक आज भी कोरिया में अनुभव किया जाता है।
दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला नागरिक ने कहा कि इस बात में कई संदेह नहीं कि अयोध्या की राजकुमारी का दो हजार वर्ष पहले कोरिया के राजकुमार से विवाह हुआ था, कोरिया के लोग आज तक भारत के साथ भावनात्मक रूप में जुड़े है। भारत की मान्यता है कि दूसरे को खुशी बांटने से खुशी मिलती है। भारत का यह विचार विश्व को प्रेरणा देने वाला है। यहां का दीपोत्सव विश्व को प्रकाशित करेगा। अंधकार कभी प्रकाश की जीत नहीं सकता। यह भारत का विश्व को सन्देश है। दीपावली इसी का प्रतीक है।
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या हमारी आन बान शान की प्रतीक है। विश्व  में दीपावली का व्यापक रूप दिखाई देता है। पिछले दिनों अयोध्या से जनकपुर की बस सेवा शुरू की गई। इसका भी प्रतीकात्मक महत्व है। इससे लोगों की सुविधा भी बढ़ी है। नरेंद्र मोदी पिछले चार वर्षों में करोड़ो गरीब लोगों को अनेक सुविधाएं प्रदान कर चुके है। गरीबो को कष्ट न हो, यही रामराज्य की कल्पना है। योगी ने कहा कि पहले की सरकारों ने अयोध्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। वह डेढ़ वर्ष में छह बार अयोध्या आये है, और यहां विकास कार्यो के क्रियान्वयन पर स्वयं ध्यान दिया। हरिद्वार की हरी की पौढ़ी की भांति अयोध्या में भी हरि की पौड़ी बनेगी। इस प्रकार योगी आदित्यनाथ अयोध्या को उसका गौरव दिलाने का प्रयास कर रहे है।

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