बेशक मानवीय मूल्यों में गिरावट आ रही है, आदर्श मूल्यों की उपेक्षा की जा रही है, जीवन मूल्य धुसरित हो रहे हैं, लेकिन यह भी कटु सत्य है कि बिना मानवीय गुणों के मानव का कोई महत्व नहीं रह जाता है और यह भी सत्य है कि बेशक मानवीय मूल्य कम हो रहे हैं, लेकिन मानवीय गुणों से युक्त लोगों की भी कमी नहीं है और ऐसे लोगों के कारण ही दुनिया में संतुलन बना हुआ है-रिश्ते, परिवार, समाज, देश और दुनिया बची हुई है।
एक मानवीय गुणों से युक्त व्यक्ति हजारों अमानवीय कारनामों को परास्त कर सकता है। मानवीय गुणों में जितनी शक्ति होती है, जितनी क्षमता होती है, जितनी सच्चाई और ईमानदारी होती है, उतनी शक्ति धरती की किसी अन्य चीज में नहीं होती है। नैतिकता में बहुत बड़ी ताकत होती है, नैतिकता अपने साथ साहस ईमानदारी और सरलता को लेकर चलती है। ईमानदार व्यक्ति को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति तक कहा जाता है, इसका सीधा सा अर्थ यही हुआ कि ईमानदार व्यक्ति हजारों बेईमानों के लिए सबक होता है।
करुणा को मानवीय गुणों की नींव कहा जाता है। बिना करुणा के मानव के मन-मस्तिष्क में किसी भी प्रकार के भावों का सृजन नहीं होता है। संवेदनाओं का सृजन नहीं होता है, विचार जन्म नहीं लेते हैं, सहयोग की भावना जन्म नहीं लेती है, शालीनता और मधुरता का जन्म भी नहीं होता है, आत्मियता और अपनापन तो दूर-दूर तक भी दिखाई नहीं देते हैं।
बिना किसी करुणा भावना के व्यक्ति को पत्थर की संज्ञा दी जाती है, निष्ठुरता की संज्ञा दी जाती है और उसे चलता-फिरता रोबोट ही कहा जा सकता है। करुणा का सीधा सा मतलब ही किसी की निस्वार्थ सहायता करना है, किसी की तकलीफ को अपने मन-मस्तिष्क में धडक़वाना है, किसी के दर्दों को महसूस करना है, किसी के दर्दों को अपनी आंखों में बहाना है और इन सबका मतलब होता है कि अपने संकटों को भूलकर, अपने हित की परवाह किए बिना, स्वेच्छा से किसी के संकटों को, दर्दों और विवशताओं को काम करना होता है, खत्म करना होता है, उससे हाथ मिलाना होता है, उससे गले मिलना होता।
उससे दिल मिलाना होता है और इन सबका मतलब होता है ऐसा व्यक्ति एक बेहतरीन इंसान कहलाता है, उसमें मानवता कूट-कूट कर भरी होती है और जिसमें मानवता होती है, वही वास्तविक रूप से मानव कहलाने का सच्चा अधिकारी है और मानवता का आधार करुणा होती है। आइए, इंसानों की श्रेणी में शामिल हों, श्रीप्रभु ने यह बेहतरीन अवसर जो दिया है।







