एक अच्छा लीडर, या नेता, होने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि क्या किया जाए, और उसे क्यों किया जाए। केवल उत्साह, प्रेरणा, योग्यता और कामों को सही तरीक़े से करना ही पर्याप्त नहीं है। यह जानना भी बहुत ज़रूरी है कि सही काम आख़िर है क्या। इसके लिए ज़रूरत है नैतिक नेतृत्त्व की। नैतिक नेतृत्त्व के दो मुख्य पहलू हैंः अपने सच्चे स्वरूप को जानना और दूसरों की सेवा करना। सच्चे नेता को अपने आप के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि वह अपने आंतरिक नैतिक कम्पास के संपर्क में आ सके, जोकि फिर उसके कार्यों को निर्देषित करेगा तथा उसके पीछे चलने वालों को भी सही मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इस संबंध में महापुरुषों ने सदियों से हमें एक स्पष्ट और सरल निर्देष दिया गया हैः “अपने आपको जानो!”
ये बातें हैं महत्वपूर्ण:
नेतृत्त्व में ज़रूरी यह है कि “हम कौन हैं” और “हम क्या करते हैं”। एक नेता की तरह आचरण करने के अलावा, हमारे अंदर एक सच्चे नेता के गुण, व्यवहार, और आदतें होना भी ज़रूरी है। एक सच्चा नेता अपने अस्तित्व की सच्चाई का सामना करने की हिम्मत रखता है। वह अपने उदाहरण द्वारा दूसरों को प्रेरित करता है कि वे भी प्रभु की आदर्श संतान बन सकें।
ऐसा नेता अपने हृदय और आत्मा के अंदर झाँकता है, आत्म-विश्लेषण करता है, और अपने भीतर की आत्मिक शक्ति के संपर्क में आता है। वह अपनी आत्मा की असीम शक्ति के साथ जुड़ जाता है, तथा चरित्र व इच्छाशक्ति के अद्वितीय बल का प्रदर्षन करता है। लेकिन फिर भी उसका व्यवहार बेहद नम्रता और करुणा से भरपूर होता है। सच्चा नेतृत्त्व केवल एक ख़ास ढंग से आचरण करना नहीं है; सच्चा नेतृत्त्व तो वो होता है जो हमारी भीतरी सच्चाई का प्रतिबिंब हो।
जीवन क्या है?
कई लोग सिर्फ़ जीवन की साधारण दिनचर्या में ही व्यस्त रहते हैं – जागना, तैयार होना, खाना, ड्राइव करना, पैसा कमाने के लिए काम करना, वापस घर आना, और अगले दिन फिर इसी दिनचर्या का पालन करना। हमारा पूरा जीवन बड़े होने, नौकरी या व्यवसाय करने, परिवार की देखभाल करने, रिटायर होने, और फिर इस संसार को छोड़कर चले जाने में ही व्यतीत हो जाता है। अक्सर हम सोचने लगते हैं कि क्या यही जीवन है? उन्हें समझ में आ जाता है कि कोई उच्चतर शक्ति है जो हमारा मार्गदर्शन कर रही है। यही आध्यात्मिक शक्ति समस्त नैतिकता, सद्गुणों, ताक़त और जीवन का स्रोत है। इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि हम उसे क्या कहकर पुकारते हैं – परमात्मा, चेतनता, आत्मा। यह शक्ति हममें से हरेक के भीतर मौजूद है और हमें जान दे रही है। एक बार जब हम इस अनंत आध्यात्मिक शक्ति के संपर्क में आ जाते हैं, तो हम उस शक्ति के संपर्क में आ जाते हैं जो सभी सच्चे नेताओं के गुणों का स्रोत होती है।
नेतृत्व का दूसरा पहलू
नेतृत्त्व का दूसरा पहलू है सेवा। इतिहास के महान् नैतिक नेताओं ने कहा है कि अपने से पहले दूसरों के बारे में सोचना ही एक सुखी और संतुष्टिपूर्ण जीवन की कुंजी है। एक नेता को सबसे पहले एक सेवक होना चाहिए। दूसरों की सेवा करने से ही हमें उनका नेतृत्त्व करने का अधिकार मिलता है।
सच्चे नेता का अर्थ
सच्चा नेता बनने का अर्थ है सच्चा इंसान बनना। नेतृत्त्व अति गहन और निरंतर चलने वाले आत्म-विष्लेषण से ही उत्पन्न होता है। यह व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास और सेवा के प्रति समर्पित जीवन का चयन करना है। यदि हम अपने आंतरिक आध्यात्मिक स्रोत के साथ जुड़ जाएँ, तो हम ऐसे नेता बन सकते हैं जिनका जीवन दूसरों को भी प्रेरणा प्रदान करेगा।
-संत राजिन्दर सिंह जी महाराज








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