क्या साबित होगी प्लाज्मा थेरेपी रामबाण इलाज ?
दुनिया संकट में है लेकिन इस तथ्य के मद्देनजर कि कोरोना वायरस की कोई दवा, कोई इलाज नहीं है, यह स्वाभाविक ही है कि इसके इलाज के लिये उपयुक्त लगने वाले माध्यम को अपनाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। इसके बावजूद अक्सर ऐसा भी होता है कि इस मामले में जल्दबाजी ठीक नहीं होती। जरूरत यही होती है कि जिस भी तरीके को अपनाने की तैयारी है, उसे अच्छी तरह से ठोक बजाकर देख लिया जाय।
कोरोना के इलाज को लेकर भी कुछ इसी तरह की बात सामने आई है। पिछले दिनों यह माना गया कि कोरोना के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी एक कारगर इलाज हो सकता है और उसके माध्यम से इलाज की तैयारियां भी शुरू कर दी गईं लेकिन अब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि यह अभी प्रयोग के चरण में ही है और इस बात का कोई सबूत नहीं कि इसका इस्तेमाल कोविड-19 के इलाज में किया जा सकता है। अमेरिका की फेडरल ड्रग एजेंसी भी इसे एक प्रायोगिक थेरेपी के रूप में देख रही है।
निश्चित ही इससे उन लोगों के उत्साह पर असर पड़ेगा जिन्होंने प्जाज्मा थेरेपी को कारगर हथियार मान लिया था लेकिन यह भी सही है कि जब किसी नई चीज को समस्या हल करने का जरिया माना जाय तो यह जरूरी है कि उसके फायदे-नुकसान को अच्छी तरह जांच-परख लिया जाय। वह भी तब जब मामला बड़ी संख्या में लोगों की जिन्दगी से जुड़ा हो।
उम्मीद यह की जानी चाहिए कि प्लाज्मा थेरेपी को इस्तेमाल करने के मामले में जो जांचें की जा रही हैं, उनसे इसके बारे में विस्तृत रूप से पता लग सकने में आसानी हो सकेगी तथा आगे चलकर इसके लिए कोई निर्णय लेते समय भी उससे लाभ मिल सकेगा। यह लाभ किसी एक व्यक्ति को नहीं बल्कि सामूहिक स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों को हो सकेगा क्योंकि तब तक इसे लेकर तमाम किंतु-परंतु विषयक तथ्य सामने आ चुके होंगे। चिकित्सा का एक तथ्य यह भी है कि किसी अन्तिम निर्णय पर पहंचने से पहले उसके तमाम पहलुओं पर विस्तार के साथ जांच-परीक्षण कर लिया जाय। यही बात प्लाज्मा थेरेपी पर भी लागू होती है। निश्चित रूप से गहन जांचों के बाद सामने आने वाला निष्कर्ष हम में नया आत्मविश्वास भर सकेगा।







