डॉ दिलीप अग्निहोत्री
नरेंद्र मोदी सरकार ने जहां गरीबों के लिए अनेक लागू की, वही भारत को विकसित देश बनाने की दृष्टि से अर्थव्यवस्था में अनेक बुनियादी सुधार किए है। मोदी नए विजन के साथ चल रहे है। तीस करोड़ जनधन खाते, दस करोड़ परिवारों को स्वास्थ्य बीमा, तीन करोड़ परिवारों को गैस कनेक्शन, पिछली सरकार के मुकाबले पांच गुना ज्याद तेज गति से सड़क निर्माण,आदि उपलब्धियों की सूची लंबी है। दशकों से लंबित अनेक कार्य पूरे हुए। सैकड़ो व्यर्थ व बाधक कानून समाप्त हुए, ईज ऑफ डूइंग में साढ़े चार वर्ष पहले भारत एक सौ बयालीसवें स्थान पर था,आज सत्तरहवे स्थान पर आ गया,प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत शीर्ष पर है। इसके अलावा विश्व में भारत का प्रभाव बढा है। मोदी सरकार के कार्यो को को लिखना आसान नहीं है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेशनलिस्ट फाउंडेशन के तत्वावधान में यह कार्य किया गया। मेकिंग ऑफ न्यू इंडिया का विस्तृत ब्यौरा सामने आया।स्वतंत्रता के बाद भारत की अर्थव्यवस्था में अनेक प्रयोग हुए। समाजवादी और मिश्रित अर्थव्यवस्था का दौर प्रारंभिक दशकों तक चला। कृषि की हिस्सेदारी सर्वाधिक थी। इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। गांव उपेक्षित हुए। वहां कृषि उपज के लिए बाजार नहीं थे। यातायात के पर्याप्त साधन नहीं थे, करीब आधी कृषि भूमि असिंचित रही। यह सब चल ही रहा था कि प्रधानमंत्री नरसिंहराव और उनके वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण की बुनियाद रखी। लेकिन इससे पैदा होने वाली कठिनाइयों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने बड़ी हद तक व्यवस्था को नियंत्रित रखा। उदारीकरण के साथ लोककल्याण का उचित सामंजस्य स्थापित किया। घोटालों पर नियंत्रण रहा। अटल बिहारी वाजपेयी को एक अन्य कार्यकाल भी मिलता, तो भारत को विकसित देश बनाने का कार्य आगे बढ़ता। लेकिन उदारीकरण और वैश्वीकरण की शुरुआत करने वाले वित्तमंत्री मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उन्हें एक नहीं दो कार्यकाल मील गए। एक बार फिर अर्थव्यवस्था उनके पुराने अंदाज में संचालित होने लगी। फिर उदारीकरण व वैश्वीकरण के नकारात्मक प्रभाव रोकने की व्यवस्था नहीं गई। अर्थव्यवस्था में बड़ा असंतुलन आ गया। किसानों की एक बार कर्जमाफी के अलावा कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया। नीतिगत पंगुता थी। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की स्थिति कमजोर बनी रही।
साढ़े चार वर्ष पहले नरेंद्र मोदी ने इसी माहौल में सत्ता संभाली थी। उन्होंने सुधार का संकल्प लिया। उनकी नीतियों को दो प्रमुख भागों में देखा जा सकता है। एक मे गरीबों, वंचितों के कल्याण की योजनाएं शामिल है, दूसरे में भारत को विकसित देशों की सूची में पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इसके अनुरूप अर्थ व्यवस्था में सुधार किए गए।
पुस्तक मेकिंग ऑफ न्यू इंडिया में इन तथ्यों का व्यापक विवरण प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रपति भवन में इसका लोकार्पण किया।
पुस्तक में नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों का उल्लेख अवश्य है,लेकिन यह सरकार की ओर से कराया गया संकलन नहीं है। इसमें नरेन्द्र मोदी सरकार के साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान किये गए कार्यों का संकलन किया गया है। इसके तीन हिस्से हैं। पहले खंड में आकलन, पेश दूसरे हिस्से में विकास एवं सुशासन तथा तीसरे हिस्से में विदेश मामले हैं। प्रधानमंत्री की कार्यशैली की भी चर्चा की गई है। नरेंद्र मोदी ने इसमें अनेक परिवर्तन किए है। जिसके चलते उनकी अलग छवि बनी है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में एक भी छुट्टी नहीं ली, विदेश यात्राओं में पत्रकारों को ले जाना बंद कर दिया, विदेश यात्रा में वह अक्सर विमान में ही रात्रि विश्राम कर लेते है।
अनेक योजनाएं नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों के रूप में दर्ज है। इनमें नई और पहले से चल रही योजनाएं शामिल है। फर्क यह रहा कि इस सरकार ने रिकार्ड तेजी से कार्य किया। यह सही है कि अनेक योजनाएं कांग्रेस सरकार ने शुरू की थी।लेकिन मोदी सरकार ने चार वर्ष में अभूतपूर्व कार्य किये। कांग्रेस सरकार की गति से इसमें तीन चार दशक लग जाते। जनधन, स्वच्छ भारत, नमामि गंगे और उज्जवला आदि का आंकड़ों के साथ विवरण दिया गया है।
विदेश नीति को भी नरेंद्र मोदी ने प्रभावी बनाया है। भारत इजरायल संबंध, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण वाली सागरमाला परियोजना, आधार, लोगों की दक्षता बढ़ाने, रोजगार और नौकरियों के आकलन की चुनौतियों, जीएसटी भ्रष्टाचार काले धन के खिलाफ कदम उठाने, रियल एस्टेट, इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड जैसे कानून बनाने, आवास योजना बनाने और पुराने बेकार हो चुके कानूनों को खत्म करने का भी उल्लेख है।
प्रधानमंत्री के रेडियो प्रोग्राम मन की बात को भी अभूतपूर्व कहा जा सकता है। मोदी के जनसंपर्क का तरीका भी विशिष्ट है। तीन तलाक का विषय पर निर्णय मोदी के साहस का प्रतीक है।
नरेंद्र मोदी का अपना विशिष्ठ विजन और मिशन है। के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। उनके द्वारा किये गए कार्यो की लंबी श्रृंखला है। एक स्थान पर इनका संकलन किया गया है। इस प्रकार नरेंद्र मोदी के कार्यो को पुस्तक रूप में प्रस्तुत करने का यह चौथा प्रयास है। दो हजार पन्द्रह में रिडिफाइनिंग गर्वनेंस, इसके दो हजार सोलह में द मोदी डॉक्ट्रिन न्यू पैरडाइम इन इंडियाज फॉरेन पॉलिसी और दो हजार सत्रह इंडिया और मोदी का प्रकाशन किया गया। मोदी की समस्त योजनाएं इनमें संग्रहित हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मेकिंग ऑफ न्यू इंडिया ट्रांसर्फोमेशन अंडर मोदी गवर्न्मेंट को सकारात्मक प्रयास बताया। जेटली ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में इस पुस्तक का औपचारिक रूप से विमोचन किया था। राष्ट्रपति ने इसकी पहली प्रति ग्रहण की। उन्होंने कहा कि समसामयिक शासन ने नये भारत के समावेशी विचार को मूर्त रूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। समावेशन नारा मात्र नहीं है।
सरकार ने इस सिद्धांत को नीति निर्माण के केन्द्र में रखा है। ऐसे सामाजि आर्थिक समूहों को समग्र ढंग से मुख्य धारा में लाने के लिए असंख्य उपाय किए गए हैं, जो अभी तक भारत की विकास गाथा में पिछड़े हुए थे। यह कहना गलत है कि विकास की यात्रा में सिर्फ सरकार आगे बढ़ रही है। नागरिकों ने भी उत्साह के साथ इसमें सहभागिता की है। इस पुस्तक में विभिन्न नीतियों और कार्यक्रमों का समग्र मूल्यांकन करने का प्रयास किया गया है। इसी के साथ राष्ट्रीय विकास की यात्रा के विभिन्न आयामों समझाया गया है।
सरकार ऐसी कई अहम योजनाएं लेकर आई जिससे करोड़ो लोगों को फायदा पहुंचा है। गरीबों, पिछड़ों के सशक्तिकरण के लिए भी सरकार ने सराहनीय भूमिका निभाई है। अरुण जेटली ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत थी जो निर्णय ले सके। पिछले साढ़े चार सालों में केंद्रीय कर में बढ़ोतरी हुई है साथ ही हमारी सरकार राज्य सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विकास की इस यात्रा में चल रही है। मोदी सरकार ने उस मार्ग को मजबूत बनाया है जिस पर चलकर भारत अगले कुछ वर्षों में विकसित देश बन जायेगा।







