Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, August 27
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    शाश्वत भारतीय चिंतन का ध्येय मार्ग

    By June 8, 2018 Current Issues No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 684
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नागपुर में  उदार व शाश्वत भारतीय चिंतन से प्रेरित विचार व्यक्त किये। इस चिन्तन के अभाव में उन लक्ष्यों को प्राप्त ही नहीं किया जा सकता, जिसका उल्लेख किया गया। उन्होंने पंथनिरपेक्षता ,राष्ट्रवाद, बहुलवादी समाज, सहिष्णुता जैसे शब्दों की चर्चा की। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी ऐसे ही समाज और राष्ट्र की आकांक्षा रखता है। इसी दिशा में उसके प्रयास जारी है। निश्चित ही यह बहुलवादी देश है। ऐसी विविधता विश्व में कहीं नहीं है। ऐसे में हमारे सामने उदार चिंतन के अलावा सौहार्दपूर्ण ढंग से रहने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है। दुनिया में ऐसा उदार चिंतन दुर्लभ है। सभ्यताओं का संघर्ष विश्व इतिहास की सच्चाई है।
    यह अपने मजहब के तलवार के बल पर प्रचार का परिणाम था। इनके बीच भी भारतीय चिंतन वसुधा को कुटुंब मानने का सन्देश देता रहा, सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना करता रहा। ऐसे में जब कोई संघठन हिंदुत्व की बात करता है ,तब उसमें किसी अन्य मतावलंबी के प्रति द्वेषभाव नहीं होता। वल्कि हिंदुओं के संघठन का विचार अवश्य होता है। जिससे मानवता का शाश्वत सन्देश कमजोर न पड़े। मुखर्जी ने जिस पंथनिरपेक्षता की बात कही ,वह ऐसे ही उदार चिंतन में संभव है। यह किसी पर थोपा नहीं जाता, तलवार के बल पर किसी को हिन्दू नहीं बनाया जाता, यह मजहबी भेदभाव से ऊपर का चिंतन है। इसमें माना जाता है कि उपासना पद्धति अलग अलग हो सकती है। यह सबका अधिकार है। हमको सभी का सम्मान करना चाहिए। हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों ने भी यही कहा। उन्होंने अपने विचार दिए, लेकिन साथ में यह भी जोड़ दिया कि ये विचार अंतिम नहीं है। जिज्ञाषा अनन्त है। समाधान के प्रयास चलते रहने चाहिए।
    बहुलवाद, पंथनिरपेक्षता, सहिष्णुता की आज दुनिया में क्या स्थिति है, यह बताने की जरूरत नहीं। सभ्यताओं के संघर्ष का इतिहास भी रक्त रंजित था। आज भी अनेक इलाके हिंसाग्रस्त है।इनका सहिष्णुता से कोई लेना देना नहीं होते। ऐसे में मानवता की रक्षा उदार उदार भारतीय विचारों से हो सकती है।  मुखर्जी ने राष्ट्रवाद शब्द का उल्लेख किया। भारतीय राष्ट्रवाद भी उसी चिंतन से प्रेरित है। भारत विश्वगुरु था, यह दर्जा उसने तलवार के बल पर प्राप्त नहीं किया था। यह ज्ञान,सद्भाव और विश्वकल्याण की कामना पर आधारित था। संघ आज भी ऐसे ही राष्ट्रवाद का हिमायती है। प्रणव मुखर्जी ने डॉ हेडगेवार को भारत माता का महान सपूत बताया। निःसन्देह डॉ हेडगेवार के योगदान से आज भी प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
    वस्तुतः संघ के संस्थापक ने किसी नए विचार को चलाने का कभी दावा नहीं किया। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। संघ की स्थापना के बाद भी कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन की व्यवस्था उन्होंने की थी। जाहिर है कि वह देश को स्वतंत्र कराने के प्रयास में लगे थे। यह प्रयास उन्होंने संघ की स्थापना के बाद भी जारी रखा। केवल तरीका बदला था। संघ के स्वयं सेवक स्वतंत्रता संग्राम को संचालित रखने में सहयोगी बनते थे। लेकिन डॉ हेडगेवार को एक प्रश्न विचलित करता था। वह सोचते थे कि जो देश हजारों वर्षों तक विश्वगुरु रहा, वह गुलामी की जंजीरों में कैसे जकड़ गया। गहन चिंतन ,अध्ययन, विचार विमर्श के बाद वह इस चिंतन पर पहुंचे थे कि आत्मगौरव, आत्मस्वाभिमान को भुलाने और निजी स्वार्थ को राष्ट्र से ऊपर मानने के कारण हमारी यह दुर्गति हुई है। इसलिए आजादी और आत्मगौरव को एक हासिल करने की योजना के अंतर्गत उन्होंने संघ की स्थापना की थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कार्य पद्धति में प्रचार के मोह को स्थान नहीं मिला। इसकी जगह व्यक्तिगत संपर्क और निःस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा को वरीयता दी गई। लेकिन अक्सर आलोचकों के नकारात्मक कार्य अनेक सकारात्मक तथ्य उजागर करने का अवसर देते है।
    पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का नागपुर जाना ऐसा ही प्रकरण बन गया। कांग्रेस के नेताओ ने संघ के कार्यक्रम में उनके जाने का विरोध किया। उनकी इस हरकत से ही इतिहास के अनेक पृष्ठ नए सिरे से चर्चा में आ गये। जब महात्मा गांधी संघ के शिविर में जा सकते है, वहां स्वयं सेवकों से संवाद कर सकते है, उनके शिविरों में भोजन व्यवस्था, रसोई, भोजन वितरण आदि का अध्ययन कर सकते है, तो प्रणव मुखर्जी का वहाँ जाना गलत कैसे हो सकता है। महात्मा गांधी यह देख कर हतप्रभ थे कि संघ के स्वयंसेवको के बीच कोई जाति भेद की भावना ही नहीं थी। कौन बना रहा है, कौन परोस रहा है , कौन साथ में बैठ कर एक पंगत में भोजन कर रहा है, इसका कोई जातिगत विवरण ही नहीं था। यह वह समय था ,जब देश में अश्पृश्यता थी। महात्मा गांधी सहित अनेक महापुरुष इसे समाप्त करने का अभियान चला रहे थे। लेकिन यह कार्य संघ के संस्थापक इतनी सहजता से कर लिया था। इसे देख कर महात्मा गांधी बहुत प्रभावित थे।
    डॉ आम्बेडकर भी इस समरसता के विचार को अच्छा मानते थे। इस प्रकार इतिहास के अनेक पृष्ठ पलटे गये। आजादी के बाद गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने सरसंघचालक श्री गुरु गोलवलकर को कश्मीर नरेश से वार्ता हेतु भेजा था। कश्मीर समस्या के समाधान में उन्होंने भी सरदार पटेल के आग्रह पर पूरा सहयोग किया था। कांग्रेस के वर्तमान नेताओं को इतिहास के वह पृष्ठ भी दिखाए गए , जब जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री ने बतौर प्रधानमंत्री संघ के स्वयंसेवको को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने के लिए राजपथ पर आमंत्रित किया था। नेहरू जी बाँसठ और शास्त्री जी पैसठ के युद्ध में संघ के स्वयं सेवकों के आंतरिक व्यवस्था में सहयोग से प्रभावित थे। यह बताने की जरूरत नहीं कि संघ के  राष्ट्रभाव से प्रभावित होकर ही उन्हें गणतंत्र दिवस परेड में आमंत्रित किया गया था। यह राष्ट्रभाव की प्रेरणा है जो संघ के स्वयंसेवकों को सेवा कार्यो की ओर ले जाती है। फिर चाहे वह बाहरी आक्रमण हो या प्रकृति की आपदा , स्वयं सेवक निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य में लग जाते है। जाति मजहब के भेदभाव का कोई विचार नहीं किया जाता है।
    इतिहास का एक अन्य महत्वपूर्ण पृष्ठ जय प्रकाश नारायण आंदोलन से निकले नेताओं के लिए था। इनमें केवल जदयू नेताओं में सच्चाई की स्वीकार करने का साहस है। अन्य लोग प्रणव के वहाँ जाने से नाराज बताए गए। जबकि जिनके आंदोलन से ये नेता बने वह जयप्रकाश नारायण संघ के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
    उन्होंने तो यहां तक कहा था कि यदि संघ साम्प्रदायिक है ,तो मैं भी साम्प्रदायिक हूं। प्रणव मुखर्जी ने भी इन्हीं बातों को आगे बढ़ाया है। उन्होंने ठीक कहा कि हमारा समाज शुरू से ही खुला था और सिल्क रूट से पूरी दुनिया से जुड़ा था। यही नहीं, यूरोप से बहुत पहले ही हम राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुके थे और हमारा राष्ट्रवाद उनकी तरह संकुचित नहीं था।  यूरोपीय राष्ट्रवाद साझा दुश्मन की अवधारणा पर आधारित है, लेकिन वसुधैव कुटुंबकम की विचारधारा वाले भारत ने पूरी दुनिया को अपना परिवार माना। प्राचीन काल में भारत आने वाले सभी यात्रियों ने इसकी प्रशासनिक दक्षता, ढांचागत सुविधा और व्यवस्थित शहरों की तारीफ की है।
    राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान होती है।  भारतीय राष्ट्रवाद में एक वैश्विक भावना रही है। हम एकता की ताकत को समझते हैँ । विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम एकता की ताकत को समझते हैं। सहिष्णुता हमारी सबसे बड़ी पहचान है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसी ध्येय मार्ग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही हमारी संस्कृति है। तत्वज्ञान की यहाँ कभी कमी नहीं थी। व्यवहार में अवश्य लापरवाही हुई। इसका देश को नुकसान उठाना पड़ा। भारत को दुनिया की समस्याओं का जबाब देना है। संघठित समाज ही बदलाव ला सकता है।
    प्रणव मुखर्जी के भाषण को सिलसिलेवार रूप में देखें तो लगेगा कि उन्होंने संघ को बेहतर ढंग से समझा है। यही कारण है कि उनके और सरसंघचालक के विचारों का मूल तत्व एक जैसा है। भारत और विश्व की समस्याओं का  समाधान  भारतीय चिंतन से हो सकता है। उन्होंने संघ के समारोह में उदारता, राष्ट्रवाद , मानव कल्याण, सहिष्णुता, पंथ निरपेक्षता की जो बात उठाई वह भारतीय चिंतन के अनुरूप है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नकारात्मक हमलों के बाबजूद इस शाश्वत चिंतन के ध्येय मार्ग पर चल रहा है।

    Keep Reading

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Soulful bhajan ‘Aan Baso Mere Man Darpan Mein’ released on Janmashtami.

    जन्माष्टमी पर रिलीज हुआ भावपूर्ण भजन ‘आन बसो मेरे मन दर्पण में’

    August 26, 2026
    Shopping just got even more stylish! Sara Ali Khan launches Shoppers Stop's new credit cards.

    शॉपिंग अब और भी स्टाइलिश! सारा अली खान ने लॉन्च किए शॉपर्स स्टॉप के नए क्रेडिट कार्ड

    August 26, 2026
    Azim Premji Foundation to provide scholarships to 20,000 female students in Delhi.

    अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन दिल्ली में 20,000 छात्राओं को देगा स्कॉलरशिप

    August 26, 2026
    Women sanitation workers tied Rakhis to the Urban Development Minister.

    स्वच्छताकर्मी महिलाओं ने नगर विकास मंत्री को बांधी राखी

    August 26, 2026

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    August 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading