बेरहम नक्सलवाद पर गैर ज़िम्मेदाराना बयान

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नक्सलवाद की पीड़ा झेल रहे अपने भारत में नेताओं बयान अब जख्मों पर नमक छिड़कने के जैसे प्रतीत होते हैं कहीं पर भी वह वोटों की रजनीति कर देते हैं लेकिन इससे हासिल कुछ नहीं होने वाला! कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राज बब्बर द्वारा नक्सलियों को क्रांतिकारी कहने पर बवाल मचना ही था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस का इतना बड़ा नेता नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में इस तरह का बयान दे रहा है। अगर उनका इरादा इससे कांग्रेस को चुनावी लाभ दिलाना हो तो यह संभव नहीं। इसके ठीक विपरीत परिणाम हो सकते हैं। जो प्रदेश नक्सलवाद की बेरहम हिंसा से पीड़ित हैं, वहां के लोगों के अंदर ऐसे बयान के खिलाफ जाना बिल्कुल स्वाभाविक है।

file photo

राज बब्बर कह रहे हैं कि वे लोग क्रांति के लिए निकले हैं। उन्हें रोक नहीं सकते हैं। यह किसी फिल्म का कथानक नहीं है कि आप ऐसे डायलॉग बोलकर दर्शकों से ताली पिटवा लेंगे। लोग नक्सलियों की हिंसा से त्रस्त हैं। यह कहना कि जो अभाव में होता है, जिन लोगों को उनका अधिकार नहीं मिलता, जिनका अधिकार छीना जाता है, कुछ ऊपर वाले लोग उनका अधिकार छीनते हैं तो वे अपने प्राणों की आहुति देते हैं उन सारे लोगों का अपमान है, जिन्होंने इस उन्मादी हिंसा से संघर्ष में अपने प्राणों की आहुतियां दी हैं।

भारत में गरीबी में जीने वालों की बड़ी संख्या है, जो अनेक मामलों में मानवीय अधिकारों से वंचित होते रहते हैं। तो क्या उन सबको भी हथियार उठा लेना चाहिए? हालांकि यह कांग्रेस का अधिकृत रुख नहीं रहा है। पता नहीं राज बब्बर यह कैसे भूल गए कि इन्हीं नक्सलियों ने घात लगाकर एक साथ कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की नृशंसता से हत्या कर दी थी। स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी यह बयान रास नहीं आ सकता है। वास्तव में इस तरह का बयान गैर जिम्मेवार ही नहीं, खतरनाक है। इससे नक्सलियों की हिंसा और सारी संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट कर अराजकता पैदा करने के लिए किए जा रहे अमानवीय संघर्ष को वैधता मिलती है। इसे नक्सली अपने समर्थन में उद्धृत कर सकते हैं।

अच्छा हो कांग्रेस इसका जल्द-से-जल्द खंडन करे और ऐसे नेताओं को नसीहत दे कि देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हिंसक अभियान पर सोच-समझकर बयान दें। किसी पार्टी की सरकार हो नक्सल समस्या सभी के लिए समान है। जब तक उनके हाथों में हथियार है, उनका सामना हथियार से ही किया जा सकता है। यह संभव नहीं कि कोई भी सरकार हथियार का सामना फूल की माला से करे।

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