करतारपुर कॉरिडोर पर केंद्र की कामयाबी

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण केंद्र सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धियों में शुमार हुआ। सत्तर वर्षो से यह लंबित सपना अब साकार होने को है। नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा कि विभाजन के समय समझदारी, बुद्धिमत्ता दिखाई होती तो हमारा करतारपुर, जो हमारी सीमा से महज तीन किलोमीटर दूर है, हमसे दूर नहीं जाता। इसके बाद दूसरी गलती यह हुई कि सत्तर वर्षों में मात्र चार किलोमीटर का कॉरिडोर बनाया नहीं जा सका। कांग्रेस लोगों के लिए गुरु नानक देवजी के अंतिम स्थान में मत्था टेकने का प्रबंध नहीं करा सके।
यह नरेंद्र मोदी की कूटनीति से मुनासिब हो सका।
कई दशक से लंबित अनेक समस्याओं का समाधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। इस सूची में एक नई उपलब्धि  जुड़ी। उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्यास किया। अगले कुछ समय में यह बहुप्रतीक्षित सपना साकार हो सकेगा।
यह कार्य तो आसान था। लेकिन पाकिस्तान की बदनीयत ने इसे बेहद मुश्किल बना दिया था। कुछ समय पहले कांग्रेस के नेता और पंजाब के उप मुख्यमंत्री नवजोत सिद्धू पाकिस्तान गए थे। भारत मे उनकी आलोचना की गई। अपनी शर्मिंदगी मिटाने के लिए उन्होंने कहा कि वहाँ करतारपुर कॉरिडोर के विषय में बात की थी। लेकिन पाकिस्तान ने तुरंत इसका खंडन कर दिया। उंसकी तरफ से कहा गया कि सिद्धू का बयान सही नहीं था। करतारपुर पर उनसे कोई बात नहीं हुई। यह इतनी सहजता से हो भी नही  सकता।
लेकिन नरेंद्र मोदी ने समय का इंतजार किया। पाकिस्तान की स्थिति अमेरिकी सहायता न मिलने से कमजोर हुई है। पाकिस्तान आर्थिक बदहाली के दौर में है। इस समय मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर का प्रस्ताव किया, जिसे पाकिस्तान ने स्वीकार कर लिया।
कैबिनेट ने फैसला किया है कि डेरा बाबा नानक जो गुरुदासपुर में है, वहां से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा तक एक करतारपुर करॉरिडोर बनाया जाएगा। यह धार्मिक स्थल के अनुरूप होगा। यहां पर वीजा और कस्टम की सुविधा मिलेगी। इसको व्यापक तरीके से करतार साहिब कॉरिडोर को बनाया जाएगा, यह तीन किलोमीटर का होगा। इसको भारत सरकार बनाएगी।
भारत-पाक बंटवारे के बाद सिखों के कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे पाकिस्तान की तरफ रह गए। इनमें पंजा साहिब, ननकाना साहिब, डेरा साहिब लाहौर और करतारपुर साहिब शामिल हैं। इन गुरुद्वारों में भारतीयों के जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। हालांकि कॉरिडोर बनने पर करतारपुर साहिब के लिए स्लिप दी जाएगी जिस पर शाम तक लौटना होगा।
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इसका शिलान्यास किया। उन्होंने सत्तर वर्ष के इंतजार की समाप्ति पर प्रसन्नता जाहिर की। वैसे शिलान्यास के मंच पर राजनीति भी हुई। अकाली और कांग्रेस की शत्रुता जगजाहिर है।
लेकिन इस मंच पर पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और उप मंत्री सिद्धू के बीच गहरे मतभेद भी उजागर हुए। अमरिंदर सिंह ने  पाकिस्तानी सेना प्रमुख पर की तीखी आलोचना की। यह निशाना सिद्धू पर था। जो कुछ समय पहले पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगा कर लौट है।
शिलान्यास कार्यक्रम में कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि बतौर सिख मैं इस कार्यक्रम में पाकिस्तान जाना चाहता हूं, लेकिन क्योंकि मैं पंजाब का मुख्यमंत्री हूं इसलिए मेरा कर्तव्य है कि मैं वहां न जाऊं पाकिस्तान लगातार हमारे जवानों-लोगों को मार रहा है, कुछ दिन पहले ही अमृतसर के एक गांव में ग्रेनेड फेंका गया। ऐसे में किस तरह पाकिस्तान चला जाऊं। जाहिर है कि यह तंज सीधा सिद्धू के ऊपर था। केंद्रीय मंत्री हृसिमरत कौर कॉरिडोर शिलान्यास के अवसर पर पाकिस्तान जाएगी। इसे सिद्धधु की यात्रा से नहीं जोड़ा जा सकता। क्योंकि सिद्धधु केवल यारी तफरी के लिए गए थे। हरि सिमरत केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने जाएगी, क्योकि केंद्र के अनुरोध पर ही पाकिस्तान अपने हिस्से में कॉरिडोर बनाने को तैयार हुआ है।
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने डेरा बाबा नानक  करतारपुर साहिब सड़क गलियारे की आधारशिला रखी। यह सड़क गुरदासपुर जिले के मान गांव से पाकिस्तान से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा तक जाएगी।
भारत सरकार ने अगले वर्ष गुरु नानक देव जी के पांच सौ पचासवें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में करतारपुर सड़क गलियारे के निर्माण का फैसला किया। इस सड़क का निर्माण भारत -पाकिस्तान सीमा तक एकीकृत विकास परियोजना के रूप में किया जायेगा। इस गलियारे के निर्माण से सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब में दर्शन कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उम्मीद जतायी है कि करतारपुर गलियारा भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच एक सेतु का काम करेगा। बर्लिन की दीवार के गिरने की तरह यह भी जोड़ने का कारण करेगा। दोनों देशों की सरकारों और सेनाओं के बीच मुद्दे बने रहेंगे और सिर्फ समय ही हमें इससे बाहर निकलने का मार्ग दिखायेगा।
गुरु नानक देवजी के आशीर्वाद से यह करतारपुर गलियारा महज एक गलियारा नहीं रह जायेगा बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच एक सेतु का काम करे। इसी क्रम में केंद्र सरकार  सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से श्री गुरू नानक देव जी की पांच सौ पचासवीं वीं जयंती को भव्यता से मनाने का अनुरोध करेगी।। यूनेस्को से अनुरोध किया जाएगा कि विश्व भाषाओं में श्री गुरु नानक देवजी के लेखन को प्रकाशित करें। ऐतिहासिक शहर सुल्तानपुर लोढ़ा को हेरिटेज टाउन के रूप में विकसित किया जाएगा। भारत सरकार की ओर से स्मारक सिक्के और डाक टिकट भी जारी किए जाएंगे। गुरुनानक देवजी ने करतारपुर साहब में अपने जीवन के अठारह वर्ष   बिताए थे।

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