आतंकियों को हिरासत के आंचल में छिपाने के बाद शांति की पहल का नाटक

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file photo

आतंकियों को आंचल में छिपाने के बाद अब पाकिस्तान शांति की अपील कर दुनिया को दिखाना चाहता है कि वह कितना बड़ा साधू है, लेकिन भारत देश पाक की हर चाल से वाकिफ है।

पुलवामा हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान में तनाव अपने चरम पर है। हालात इस कदर संजीदा हो गए हैं कि कई पक्ष दोनों देशों के बीच युद्ध को ही शांति का अंतिम समाधान मानने लगे हैं। मगर यह हर कोई जानता है कि युद्ध ने हमेशा बर्बादी ही की है। उसने कुछ भी बेहतर नहीं किया।

शायद इसी भय के चलते दुनिया भर के 59 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर दोनों मुल्कों के बीच दिनोदिन बढ़ते जा रहे तनाव को खत्म करने का आग्रह किया है। स्वाभाविक तौर पर दो देशों के बीच युद्ध की विभीषिका को कौन नहीं जानता और समझता है? युद्ध किस कदर उस देश के आर्थिक विकास के पतन का मार्ग प्रशस्त करता है, यह बात अमनपसंद शख्स या राष्ट्र के लिए समझना कठिन नहीं है।

युद्ध के केवल एक ही झटके से न केवल आर्थिक तंत्र नेस्तनाबूद होता है, वरन सैकड़ों वर्षो के मानव प्रयत्न और साधना से ज्ञान-विज्ञान, साहित्य कला आदि का किया गया विकास मटियामेट हो जाता है। स्पष्ट तौर पर कहा जाए तो युद्ध के दुष्परिणाम पराजित और विजेता दोनों देशों को भुगतने पड़ते हैं। वहां की जनता को सबकुछ खोने पर मजबूर होना पड़ता है। अगर हाल के दिनों में पैदा होते तनाव पर बात करें तो भारत ने हमेशा से शांति की ही बात की है।

भारतीय उप महाद्वीप में अमन हो, इससे इतर भारत ने कभी सोचा ही नहीं। मगर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भारत में जिस तरह से पिछले 60 सालों से हिंसा और निदरेष लोगों का खून बहाया है, वह नाकाबिले बदार्शत है। हमने हमेशा से अच्छे पड़ोसी होने का धर्म निभाया है। और इस भावना को अंतिम दम तक बरकरार रखेंगे। किंतु ताली दोनों हाथों से बजे तभी सबकुछ अच्छा लगता है। पाकिस्तान ने इसी भावना की कमी हमेशा से दिखाई है। उसने कभी भी निर्माण या सृजन के बारे में विचार नहीं किया।

दरअसल, भारत एक लोकतांत्रिक और जिम्मेदार राष्ट्र है। विश्व शांति हमारा ध्येय है। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान हमारे खिलाफआतंकवादी कार्रवाई करके हमारी संप्रभुता और स्वतंत्रता को लगातार अस्थिर करने की साजिश करता रहा है। ऐसे में हमें अपनी सीमा की रक्षा करना फर्ज बनता है। सच तो यह है कि पाकिस्तान आतंकी हमले करवा कर हम पर युद्ध थोप रहा है। अब यह पाकिस्तान को तय करना है कि वह युद्ध चाहता है या शांति।

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