डॉ दिलीप अग्निहोत्री
कर्नाटक के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रियता से माहौल बदलने लगा है। अभी तक कांग्रेस राहुल गांधी और मुख्यमंत्री सिद्धर्मय्या मोदी व शाह के प्रहारों से हलकान थे, अब रही सही कसर योगी आदित्यनाथ ने पूरी कर दी।योगी की कर्नाटक यात्रा दो रूप में महत्वपूर्ण है। पहला यह कि वह नाथ सम्प्रदाय के प्रतिष्ठित सन्त है, गोरक्षा पीठ के महंत है। कर्नाटक में नाथ संप्रदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते है। इसके अलावा अन्य समुदायों, मठों से भी गोरक्षा पीठ के सौहार्दपूर्ण संबन्ध है। इनके बीच आध्यत्मिक संवाद भी चलता है। ऐसा नही की यहाँ के लोग योगी को मुख्यमंत्री बनने के बाद जानने लगे है। बल्कि गोरक्षा पीठाधीश्वर के रूप में उनकी पहचान पुरानी है। इस कारण उनकी सभाओं में भीड़ उमड़ रही है। योगी कांग्रेस को विभाजन की राजनीति पर भी घेर रहे है। उन्होंने कर्नाटक में आह्वान किया कि कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति, जेहादी मानसिकता, आतंकवाद और भ्र्ष्टाचार में मदद देने वाली नीतियों को खारिज कर दें।
योगी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में जेहादी तत्व सिर नहीं उठा सकते। लेकिन कर्नाटक के कांग्रेसी शासन के संबन्ध में ऐसा नहीं कहा जा सकता। यहां राजनीतिक हिंसा की अनेक घटनाये होती रही है। कर्नाटक में योगी की अलख असर दिखा रही है। भाजपा के प्रति लोगों का रुझान बढा है। कर्नाटक में नाथ संप्रदाय के लगभग पचहत्तर मठ है। लाखों की संख्या में लोग इनसे जुड़े है। कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित किया था। इसे विभाजनकारी राजनीति माना जा रहा है। ऐसी राजनीति का विरोध करने वालों की संख्या बढ़ रही है। इसका भी फायदा भाजपा को मिल रहा है।
योगी आदित्यनाथ का दूसरा रूप उत्तर प्रदेश के सुशासन से जुड़ा है। सिद्धरमैया पांच वर्ष शासन चलाने के बाबजूद विकास और सुशासन पर चर्चा को तैयार नहीं है। योगी एक वर्ष के अपने शासन की उपलब्धियां गिना रहे है। उनका कहना है कि मोदी सरकार की योजनाओं को ईमानदारी से लागू करके उन्होंने उत्तर प्रदेश को विकास के मार्ग पर पहुंचाया है। गरीबों को प्रधानमंत्री आवास देने के मामले में एक वर्ष पहले उत्तर प्रदेश सत्रहवें स्थान पर था। अब पहले स्थान पर आ गया। शौचालय निर्माण में तेइसवें से पहले स्थान पर पहुंच गया। इन्वेस्टर्स समिट का ऐसा सफल आयोजन पहले नहीं हुआ। अब उसपर अमल भी शुरू हो गया है।
कर्नाटक रवाना होने के ठीक पहले योगी कैबिनेट ने विकास को गति देने वाले अनेक निर्णय लिए। उत्तर प्रदेश की अनेक सड़को को सात से दस मीटर तक चौड़ा किया जाएगा। इसके लिए दो हजार एक सौ पच्चीस करोड़ रुपये के सात प्रस्तावों को कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके अलावा इन मार्गों को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्सन तरीके से बनाने की मंजूरी भी मिली है। इससे कार्य बढ़िया और निर्धारित अवधि में पूरा होगा। विश्वबैंक ने तीन हजार पच्चासी करोड़ रुपये और एडीबी ने अट्ठाइस करोड़ रुपये का ऋण मंजूर कर दिया है। तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की बढ़ी हुई लागत को भी कैबिनेट ने मंजूर कर लिया है। इसमें ललितपुर की सजनम नदी पर बन रहे भवानी बांध, ललितपुर की बंडाई परियोजना, चलहरी के निकट घाघरा पर बनने वाले पुल का निर्माण शामिल है।
लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। शीघ्र ही इसका शिलान्यास किया जाएगा। इन्वेस्टर्स समिट में साढ़े चार लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे।जाहिर है कि कर्नाटक में योगी आदित्यनाथ की जनसभाओं और संपर्क, संवाद से भाजपा को दोहरा लाभ हो रहा है।
वह जनसभाओं के अलावा अनेक महंतों से भी मिल रहे है। इनमें आदित्यनाथ गौड़ा, लिंगायत और नाथ संप्रदाय की महंत शामिल है। चिकमंगलूर के मठ में उनका रुकना भी महत्वपूर्ण था। इससे सकारात्मक संदेश गया है। सामान्यतः योगी आवश्यकता पड़ने पर महंगे होटलों की जगह सरकारी गेस्ट हाउस में रुकना पसन्द करते है । मठ में रुकने से तो उन्हें आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है। महंत के रूप में यह उनके लिए सहज भी है । कर्नाटक के जिस मठ में वह गए, उन्हें सम्मान और अपनत्व मिला।
उनके पहले चरण के प्रचार अभियान की सभी रैलियां मलेनाडु, पश्चिमी घाट एवं कारवार क्षेत्रों में रखी गई हैं। इन सभी क्षेत्रों में विभिन्न मठों-मंदिरों की बहुतायत है। इनमें लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा एवं ब्राह्मण सभी समुदायों के मठ हैं। इन मठों में आस्था रखनेवाले लाखों लोग है। ये सभी भगवाधारी महंत है। यह हिन्दू धर्म के ही सम्प्रदाय है। योगी चुनावी राजनीति में धर्म का प्रयोग नहीं कर रहे है। लेकिन विभाजनकारी शक्तियों से सावधान अवश्य कर रहे है। यह कार्य चुनावी जय पराजय से ज्यादा महत्वपूर्ण है। चुनाव के लिए किसी धर्म को विभाजित करने वाले लोग किसी भी हद तक जा सकते है। ऐसे लोगों को समय रहते हतोत्साहित करना होगा। जिससे भविष्य में कोई ऐसे विभाजन की हिम्मत न कर सके। प्रजातन्त्र में यह कार्य मतदान के द्वारा किया जा सकता है। योगी कर्नाटक में यही सन्देश दे रहे है।
वह बता रहे है कि नाथ, लिंगायत, वोक्कालिगा, कुरुबा आदि सभी सम्प्रदाय हिन्दू की विशेषता को रेखांकित करते है। जिसमें उपासना पद्धति में अंतर होना सहज, स्वभाविक है। इसे विभाजन का आधार बनाने वाले भारतीय समाज को कमजोर बनाने की कोशिश कर रहे है। ये सभी सम्प्रदाय भगवद्गीता, उपनिषद एवं वेदों पर विश्वास रखते है। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भी अलख जगा रहे है। प्रभु राम और हनुमान जी के प्रसंग का वह इसी संदर्भ में करते है। प्रभु राम ने अयोध्या और हनुमान जी ने कर्नाटक में अवतार लिया था। कर्नाटक में ही प्रभु अपने सबसे प्रिय हनुमान जी से मिले थे। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और एकता मजबूत बनाये रखने वाले प्रसंग है। इनसे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। योगी कर्नाटक में राघवेंद्र जी से मिले। वह कर्नाटक में देसी गायों के संरक्षण के लिए गोतीर्थ बनाने की परियोजना शुरू करने जा रहे हैं।
आदियनाथ की सरकार भी प्रत्येक गांव में गौशाला का निर्माण करने जा रही है। गौ के प्रति आस्था भी उत्तर प्रदेश को कर्नाटक को ही नहीं पूरे राष्ट्र को जोड़ती है। योगी के इस दोतरफा प्रचार ने कांग्रेस की मुसीबत बढा दी है। वह पिछले काफी समय से कर्नाटक की यात्रा करते रहे हैं। उन्हें सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील तटीय इलाके और वोक्कालिगा बहुल क्षेत्रों में मतदाताओं को आकर्षित करने में सफलता मिली है। आदित्यनाथ कर्नाटक की खराब कानून-व्यवस्था को निशाना बना रहे है। कर्नाटक की जनता को सावधान कर रहे है। उनका कहना है कि यहां हिन्दू विरोध की शक्तियां सक्रिय है। कांग्रेस के शासन में ऐसे तत्वों का मनोबल बढ़ता है। आतंकी रियाज भटकल को यहीं पनाह मिली थी। यहां भाजपा की सरकार बनी तो जिहादियों को पनाह नहीं मिलेगी। योगी अपने शासन की भी चर्चा करते है। जहां किसानों के ऋण माफ किये गए। दो मई को तूफान से नुकसान हुआ, तीन मई को प्रभावित किसानों तक राहत पहुंच गई।
बीजेपी के सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया कर्नाटक के मठों में योगी के संपर्क से चिंतित है। कर्नाटक में यह माना जा रहा है कि योगी नाथ संप्रदाय के गुरु हैं। कर्नाटक के वोक्कालिगा बहुल इलाके में उनके बहुत से अनुयायी हैं। योगी की भाषण शैली और तर्कसंगत बात लोगों को प्रभावित कर रही है। वह एक ऐसे नेता हैं जो कर्नाटक में भाजपा को बड़ा फायदा कर सकते हैं। इसलिए कांग्रेस परेशान है। आदित्यनाथ ने अपनी पहली जनसभा बहुत कामयाब रही थी। इसमें भीड़ उमड़ी थी। फिर यह सिलसिला उनकी सभी जनसभाओं में चलता रहा। आदित्यनाथ कर्नाटक को हनुमान जी की जमीन बताते है। विजयनगर साम्राज्य के गौरव की चर्चा करते है। उनके अनुसार यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस हनुमान और विजयनगर की पूजा करने के बजाय टीपू सुल्तान की पूजा कर रही है। यदि कर्नाटक की जनता कांग्रेस को खारिज कर देती है तो कोई भी टीपू सुल्तान की पूजा करने नहीं आएगा। योगी का आक्रामक भाषण लोगों को आकर्षित कर रहा है। उनके व्यापक प्रचार से भाजपा को लाभ मिलना तय है।






