पंकज चतुर्वेदी
बीते एक सप्ताह के दौरान गरियामाथा, ओडिशा के संरक्षित समुद्री तट पर 600 से ज्यादा ओलिव रिडले कछुओं और दो डॉल्फिन के कंकाल बिखरे मिले हैं। हुकीटोला से इकाकूल के बीच ये कंकाल वन विभाग को मिले हैं और सरकारी दावा है कि इन दुर्लभ जल-जीवों की मौत का कारण मछली पकड़ने वाले ट्राले या बड़े जाल हैं। इस पूरे इलाके के 20 किलोमीटर क्षेत्र में मछली पकड़ने पर पूरी तरह पाबंदी है, क्योंकि हर साल नवंबर-दिसंबर से लेकर अप्रैल-मई तक ओडिशा के समुद्र तट एक ऐसी घटना के साक्षी होते हैं, जिसके रहस्य को सुलझाने के लिए दुनिया भर के पर्यावरणविद और पशु प्रेमी बेचैन हैं।
हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा कर ओलिव रिडले नस्ल के लाखों कछुए यहां अंडे देने आते हैं। इन अंडों से निकले कछुए के बच्चे समुद्री मार्ग से फिर हजारों किलोमीटर दूर जाते हैं। यही नहीं, ये शिशु कछुए लगभग 30 साल बाद जब प्रजनन के योग्य होते हैं, तो ठीक उसी जगह पर अंडे देने आते हैं, जहां उनका जन्म हुआ था। ये कुछए विश्व की दुर्लभ प्रजाति ओलिव रिडले के हैं। पर्यावरणविदों की लाख कोशिशों के बावजूद अवैध मछली-ट्रालरों और शिकारियों के कारण हर साल हजारों कछुओं की मौत हो रही है।

यह आश्चर्य ही है कि ओलिव रिडले कछुए हजारों किलोमीटर की समुद्र यात्रा के दौरान भारत में ही गोवा, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों से गुजरते हैं, लेकिन अपनी वंश-वृद्धि के लिए वे अपने घरौंदे बनाने के लिए ओडिशा के समुद्र तटों की रेत को ही चुनते हैं। दुनिया भर में ओलिव रिडले कछुए के घरौंदे महज छह स्थानों पर ही पाए जाते हैं और इनमें से तीन स्थान ओडिशा में हैं। ये कोस्टारिका में दो व मेक्सिको में एक स्थान पर प्रजनन करते हैं। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले का गरियामाथा समुद्री तट दुनिया का सबसे बड़ा प्रजनन-आशियाना है। इसके अलावा रूसिक्लया और देवी नदी के समुद्र में मिलनस्थल इन कछुओं के दो अन्य प्रिय स्थल हैं।







