डॉ दिलीप अग्निहोत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के एक कार्यक्रम में महाराणा प्रताप को महान क्या बताया, उस पर भी राजनीति शुरू हो गई। बसपा प्रमुख सहित कई नेताओं के बयान आ गए। इनके लिए यह वोटबैंक का मसला हो गया। जिसमें अकबर को ही तरजीह देनी पड़ती है। जबकि महाराणा ने देश को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त रखने की हिमायत की थी। यह सही है कि इतनी शताब्दी बीतने के बाद यहां रहने वाले सभी भारतीय एक है। यह मुल्क इन सभी लोगों का है। लेकिन पांच सौ वर्ष पहले इन्हें विदेशी आक्रांता ही कहा जाता था। उस माहौल में अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाले मानसिंह जैसे लोगों का भारतीय समाज नाम लेना भी पसन्द नहीं करता था। ऐसे लोग महलों में रहते थे। लेकिन समाज में इनकी कोई इज्जत नहीं थी।राणा प्रताप जंगलों में रहने के बाद भी सम्मानित थे। उनके प्रति राष्ट्र का यह सम्मान कभी कम नहीं होना चाहिए। न तो इस विषय पर उनकी अकबर से तुलना होनी चाहिए। अकबर साम्राज्य विस्तारक था। हिन्दू कन्याओं से विवाह भी उसके अभियान का एक हिस्सा था। लेकिन ऐसा एक भी उदाहरण नहीं जिसमें उसने किसी हिन्दू युवक का विवाह मुस्लिम युवती से कराया हो।
आजादी के लिए संघर्ष करने वाले, इसके लिए महलों का वैभव त्याग करने वाले अपनी जान की बाजी लगाने वाले सदैव महान होते है। इस आधार पर महाराणा प्रताप न केवल महान थे बल्कि वह राष्ट्रनायक भी थी। उनके जीवन का प्रत्येक पहलू प्रेरणा देता है। वह आजादी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर थे। उन्होंने वनवासियों को साथ लेकर संघर्ष किया। यह समरसता का सन्देश था। विश्व मे ऐसा कोई मुल्क नहीं जहाँ स्वतंत्रता के ऐसे सेनानी को महान न मानकर उनसे युद्ध करने वाले को महान कहा जाय। इतिहास की यह विकृति दूर होनी चाहिए। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महान होने के भी सुनिश्चित मापदंड होते है। इसमें राष्ट्रीय और व्यक्तिगत चरित्र दोनों का आकलन होना चाहिए।
महाराणा प्रताप दोनों ही पहलुओं पर अकबर से बहुत आगे थे। राणाप्रताप भरतवंशी थे, अकबर के दादा विदेशी आक्रांता थे। राणाप्रताप आजादी के लिए लड़ रहे थे, अकबर भारतीय राजाओं को गुलाम बंनाने का अभियान चला रहा था। महाराणा मुस्लिम महिलाओं तक का सम्मान करते थे। बाद में उन्होंने जितना राज्य जीता वहां मुगल सूबेदारों की महिला परिजनों को सुरक्षा व सम्मान दिया। उनकी तरफ आंख उठा कर देखने की किसी को इजाजत नहीं थी। दूसरी तरफ अकबर राजनीति के नाम पर राजपूत राजपरिवारों की महिलाओं से विवाह रचाया करता था। उसके हरम में अनगिनत महिलाएं थी। जाहिर है कि अकबर और महाराणा की तुलना बेमानी है। महाराणा ही वास्तविक रूप में महान है। उनसे प्रेरणा ली जा सकती है। अकबर का चरित्र प्रेरणा के लायक नहीं था। वह बहुत चालाकी से भारत में मुगलों की जड़ें जमाने के कार्य में लगा था। वर्तमान और भावी पीढ़ी उन्हीं से प्रेरणा ले सकती है। क्योंकि उनमें राष्ट्रीय के साथ साथ नैतिक बल भी था।







