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    मोदी का निष्क्रिय प्रचार विभाग

    By May 19, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    श्याम कुमार

    प्रधानंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार के गठन के बाद कुछ मामलों में चूक गए, जिसका उन्हें नुकसान हुआ। ऐसे ही मामलों में एक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय है, जिसने मोदी सरकार के गठन के बाद अब तक सिर्फ अपने निकम्मेपन का परिचय दिया है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस विभाग का महत्व नहीं समझा। विगत सत्तर वर्षों की अवधि में जो कांग्रेसी सरकारें थीं, वे जनकल्याण के बजाय सिर्फ नेहरू वंश का पोषण करती रहीं। नेहरू वंश की यशगाथा हमेशा इस प्रकार प्रचारित की गई, जैसे वह कोई देवलोक से उतरा हुआ वंश है। भ्रस्टाचार, घोटालों आदि में आकंठ डूबी हुई कांग्रेसी सरकारें अपनी उपलब्धियों में शुन्य होने के बावजूद प्रचार के बल पर छाई रहीं।

    इसका सम्पूर्ण श्रेय उन सरकारों के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को था। किन्तु मोदी सरकार के समय बिलकुल विपरीत स्थिति हो गई। इस सरकार के शपथ ग्रहण करते ही उसकी उपलब्धियां शुरू हो गईं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मनमोहन/सोनिया सरकार ने अपनी सरकार के समय में हुए लाखों करोड़ के घोटालों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन नहीं किया था। लेकिन मोदी सरकार ने अपनी मंत्रिपरिषद् की पहली बैठक में ही उक्त विशेष कार्यदल का गठन कर दिया। यह बहुत बड़ा कदम था, लेकिन कम लोगों को उसके बारे में पता लग पाया। प्रचार की इस निष्क्रियता के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पूरी तरह जिम्मेदार है। पहले यह विभाग वित्तमंत्री अरुण जेतली के पास था, जिन्हें बेहद भारी भरकम वित्त विभाग से फुरसत नहीं थी। हाल में यह विभाग स्मृति ईरानी के पास था, जिन्हें उस विभाग से हटाकर प्रधानमंत्री ने बहुत सही निर्णय किया है। अब यह विभाग राज्यवर्धन सिंह राठौर को पूरी तरह सौंपा गया है, जिनसे उम्मीद है कि वह सही अर्थाें में जिम्मेदारी का निर्वाह करेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले चार सालोँ में जनता के ठोस कल्याण के लिए इतने अधिक कदम उठाए हैं कि अब तो उनकी गिनती करना आसान नहीं रह गया है। पिछले सत्तर सालोँ में हमारा देश सड़ान्ध भरे दलदल की तरह हो गया था। नरेन्द्र मोदी न केवल उस दलदल को साफ करने में जुटे, बल्कि उन्होंने जनता के कल्याण की ऐसी-ऐसी योजनाएं चलाईं, जिनकी पहले कभी कल्पना नहीं की जा सकती थी। अब मोदी सरकार ‘आयुष्मान भारत’ नामक योजना शुरू करने जा रही है, जिसमें गरीबों का मुफ्त इलाज किया जाएगा, जिसके बाद मरीज को घर पहुंचाने का भी पुख्ता इंतजाम रहेगा। गरीब मरीज के अस्पताल में भरती होने और इलाज का सारा खर्च सरकार उठाएगी। चिकित्सालय किसी गरीब मरीज की बीमारी को पुरानी बीमारी कहकर उसका मुफ्त इलाज करने से मना नहीं कर सकेंगे।

    पुरानी से पुरानी और गम्भीर से गम्भीर बीमारी का मुफ्त इलाज किया जाएगा। उक्त योजना के अंतर्गत दस करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। स्पस्ट किया गया है कि इस योजना को कार्यान्वित करने की जिम्मेदारी जिन बीमा कम्पनियों को दी जाएगी, वे सरकार की इस योजना को कार्यान्वित करने में न तो कुछ परिवर्तन कर सकेंगी और न अपनी कोई शर्त लगा सकेंगी। पांच लाख रुपये का तक खर्च बीमा कम्पनियों को उठाना होगा, जिसका प्रीमियम सरकार उन कम्पनियों को देगी। सरकार ने दस करोड़ गरीब परिवारों को मदद देने का जो लक्ष्य रखा है, उसका अर्थ यह हुआ कि यदि एक परिवार में पांच व्यक्ति हैं तो कुल लगभग पचास करोड़ गरीबों का निशुल्क इलाज किया जाएगा। सरकार ने तेरह सौ बीमारियों व उनके इलाज का पैकेज भी तैयार कर लिया है।

    मोदी सरकार की अन्य अनगिनत योजनाओं की तरह यह योजना भी लाजवाब जनोपयोगी योजना है। विगत सत्तर सालोँ में नेहरू वंश देश से गरीबी मिटाने का नारा देता रहा है। इन्दिरा गांधी तो ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के बल पर चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बना लिया करती थीं। लेकिन देश में गरीबी खत्म होने के बजाय लगातार बढ़ती गई और नेहरू वंश के अन्य नारों की तरह यह नारा भी खोखला सिद्ध हुआ। इसका मुख्य कारण यह था कि नेहरू वंश के नेतृत्व में कांग्रेस सिर्फ ढोंग किया करती थी और जातिवाद, साम्प्रदायिकता आदि का जहर फैलाकर ‘बांटो व राज करो’ की नीति का पालन कर सत्ता पर अपना कब्जा बनाए रखती थी। इसके विपरीत नरेन्द्र मोदी ने तुरन्त लाभ पहुंचाने वाले लुभावने व ढ़ोंगी नारे देकर सत्ता पर काबिज रहने के बजाय देश के दूरगामी हितोंवाली योजनाएं व कार्यक्रम कार्यान्वित किए। इनमें से अधिकांश योजनाओं से जनता को तात्कालिक लाभ नहीं मिल सकता था, लेकिन आगे चलकर वही योजनाएं जनता के जीवन को सुखी बनाने वाली हैं। जनधन योजना, गरीबों के यहां मुफ्त गैस-कनेक्षन, देश के जिन हजारों गांव में जहां सत्तर सालोँ में बिजली नहीं पहुंची थी, वहां बिजली पहुंचाना आदि ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनसे गरीबों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। इसी प्रकार ‘आयुष्मान भारत’ योजना भी गरीबों के लिए गजब की योजना है।

    प्रधानमंत्री ने विगत चार सालोँ में जनकल्याण की सत्तर से अधिक चमत्कारपूर्ण योजनाएं कार्यान्वित की हैं, जिनके बारे में अधिकांश जनता को जानकारी ही नहीं है। कुछ योजनाएं इस प्रकार है- कुसुम योजना, प्रधानमंत्री युवा योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित सड़क योजना, डिजिटल लाॅकर स्कीम, पहल योजना, मुद्रा स्वास्थ्य कार्ड योजना, स्वर्ण मुद्रीकरण योजना, वन रैंक वन पेंषन योजना, दरवाजा बंद अभियान, प्रधानमंत्री जन औशधि योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिषन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, स्टार्टप इन्डिया-स्टैन्डप इन्डिया, स्मार्ट सिटी मिषन, अमृत योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, मिशन इन्द्रधनुश अभियान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, उड़ान योजना, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इन्डिया, मेक इन इन्डिया, प्रधानमंत्री फसल योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, सौभाग्य योजना, सागर माला योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौषल्या योजना, प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, वस्तु एवं सेवाकर योजना (जीएसटी), सेतु भारतम योजना, वरिश्ठ पेंशन बीमा योजना, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना, मिषन भगीरथ जीरो डिफिसिट जीरो इफेक्ट योजना, लकी ग्राहक योजना व डिजिधन व्यापार, हेरिटेज सिटी डेवलपमेन्ट एन्ड आॅगमेन्टेशन योजना, उदय उज्ज्वल डिस्काॅम बीमा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगरीय मिशन, नमामि गंगे योजना, प्रधानमंत्री वयवंदना योजना, मेन्टर इन्डिया अभियान, आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना आदि। आशचर्य यह है कि ‘प्रसार भारती’ के मुखिया वरिष्ठ पत्रकार, अत्यन्त ईमानदार एवं बेहद योग्य सूर्यप्रकाश हैं, तब भी सरकार का प्रचार-कार्य लगभग शुन्य है। सूर्यप्रकाश को यह निश्क्रियता अविलम्ब दूर करनी चाहिए।

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