डॉ दिलीप अग्निहोत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के प्रति सजग है। वह लगातार प्रदेश के हित में कार्य कर रहे है। उन्होंने अभी कर्नाटक की संक्षिप्त यात्रा के पहले और तत्काल बाद में कई महत्वपूर्ण कार्य किये। कर्नाटक जाने के ठीक पहले उनकी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के विकास को गति देने वाले अनेक निर्णय लिए। कर्नाटक से लौटने के तत्काल बाद उनके दो महत्वपूर्ण कार्य हुए। एक तो रिकार्ड समय में आंधी तूफान से पीड़ित लोगों तक सहायता पहुचाई गई। जिलाधिकारियों को चौबीस घण्टे में रिपोर्ट देने को कहा गया। योगी स्वयं भी पीड़ितों से मिलने गए। दूसरा कार्य यह हुआ कि ग्राम स्वराज अभियान का समापन हुआ। इससे मील फीडबैक की निगरानी योगी स्वयं कर रहे है।ऐसे में विपक्ष के नेताओं द्वारा उनकी कर्नाटक यात्रा पर तंज करना कुंठा को ही उजागर करता है। मुख्यमंत्री रहते हुए ये नेता भी अन्य प्रांतों में चुनाव प्रचार के लिए जाते थे। जबकि इनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुलता था। योगी का राष्ट्रीय स्तर पर महत्व है। वह पांच बार सांसद रहे है। कर्नाटक में नाथ सम्प्रदाय के अनेक मठ है। बड़ी संख्या में इनके अनुयायी है। योगी इनके बीच लोकप्रिय है। फिर भी उत्तर प्रदेश में आंधी तूफान की खबर मिलते ही वह वापस आ गए। वह कर्नाटक से देर रात में ही आगरा पहुंच गए थे। इन क्षेत्र के लोगों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई। राजस्व और बिजली विभाग के अधिकारियों को मुख्यालय पर रहने के आदेश दिए गए। राजस्व वसूली और बिजली बिलों की वसूली रोक दी गई। इतना ही नहीं पीड़ितों के घर यदि शादी योग्य बेटी है तो उसका विवाह मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत कराया जाएगा। जिनके घर कच्चे है, उनको एक लाख बीस हजार रुपये देकर पक्के मकान बनवाये जायेगे। योगी उन नेताओं में नहीं है जो छुट्टी मनाने विदेश निकल जाते है। योगी अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते है। इसके पहले भी वह अनेक प्रदेशों और मॉरीशस, म्यामार की यात्रा पर गए है। लेकिन सभी जगह वह उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए वहां के लोगों से संवाद भी करते रहे है। इसका परिणाम इन्वेस्टर्स समिट में देखने को मिला था।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आंधी तूफान से नुकसान हुआ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी कर्नाटक यात्रा बीच में छोड़कर वापस आ गए। यह महत्वपूर्ण था। लेकिन विपक्ष ने लौटते ही मुख्यमंत्री द्वारा किये गए फैसले नही देखे। वह कर्नाटक पर ही अटके रहे। इसी प्रकार ग्राम स्वराज अभियान की सकारात्मक उपलब्धि की ओर विरोधियों ने देखना जरूरी नहीं समझा ,वह एक राज्यमंत्री द्वारा होटल से मंगाए गए खाने में उलझे रहे। लगता है कि उमा भारती ने भी इस अभियान को नहीं समझा। यह केवल उनके यहां भोजन का ही कार्यक्रम नहीं था, यह गांव में चौपाल लगाकर वहां की समस्याओं को समझने का व्यापक अभियान था। दलितों के यहां जाना, भोजन करना अभियान का एक अंग था।
किसी सकारात्मक कार्यक्रम की आलोचना अपवाद के कारण नहीं कि जा सकती। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संपर्क और समाधान अभियान ऐसा ही था। इसके पीछे की कल्पना का व्यापक आधार था। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े प्रदेश में आमजन तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना और उसके क्रियान्वयन की स्थिति देखना समस्या से कम नहीं होता।
सम्पर्क अभियान का एक उद्देश्य यह था। इसी के साथ योगी आदित्यनाथ ने दूसरा लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके पीछे सामाजिक समरसता का चिंतन था। इसमें विभिन्न योजनाओं का लाभ सनिश्चित करना भी शामिल था। इन सब तथ्यों को सोच कर संवाद और सम्पर्क अभियान चलाया गया था। इसके अंतर्गत मंत्रियों तथा सत्ता पक्ष के अन्य नेताओं को किसी गांव में दलित व्यक्ति के यहां रात्रि विश्राम करने, लोगों से संपर्क करने का निर्देश दिया गया था। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की लोगों को जानकारी देना, अब तक उन योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति देखना भी तय किया गया था।
यहां प्रश्न यह है कि ऐसे कर्यक्रम की आवश्यकता क्या थी । यदि पहले की सरकारों ने गांव ,दलित और वंचित वर्ग के कल्याण पर पर्याप्त ध्यान दिया होता ,तो योगी आदियनाथ को ऐसे कार्यक्रम चलाने की आवश्यकता ही नहीं थी।सपा और बसपा तो एक दूसरे के कार्यो को उलटने की नीति पर चलते थे। उनके अपने अपने अलग महापुरुष थे। उनके नाम पर ग्राम विकास की योजनाएं बनती और बिगड़ती थी। इतना ही नही किस गांव में वोटबैंक के हिसाब से किसकी कितनी संख्या है, यह देखकर प्राथमिकता दी जाती थी।
इसके ऊपर भ्र्ष्टाचार भी चर्चा में रहता था। मतलब जरूरतमंदों तक पूरा लाभ पहुंचता ही नहीं था। योगी आदित्यनाथ इस स्थिति को बदलना चाहते थे । इसी के अंतर्गत उन्होंने संपर्क और संवाद अभियान चलाया । वह स्वयं इसमें शामिल हुए। अपने मंत्रियों को इस कार्य में लगाया। मंत्रीगण दलितों के यहां गए, भोजन किया। यह सामाजिक समरसता का बड़ा अभियान साबित हुआ। गांवों में जब ऐसे कार्यक्रम होते है, तब वह एक परिवार तक सीमित नहीं रहते। किसी न किसी रूप में पूरा गांव उस कार्यक्रम से जुड़ता है। आस पास के गांवों तक उसकी चर्चा होती है। समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह सही है कि इतने बड़े अभियान में अपवाद स्वरूप कुछ जगहों पर कुछ कमियां दिखाई दी। यह संबंधित स्तर पर ठीक से व्यवस्था न करने का परिणाम था। इससे बचने का प्रयास होना चाहिए था। लेकिन ऐसी कतिपय घटनाओं के कारण एक व्यापक और सार्थक कार्यक्रम को खारिज नहीं किया जा सकता। स्वयं योगी आदित्यनाथ ने इसकी मिसाल पेश की। वह दलित परिवार में गए , जमीन पर बैठ कर भोजन किया। इसके पहले उन्होंने चौपाल लगाई ।आमजन से संवाद कायम किया। उनकी समस्याओं को समझा। अधिकारियों को वही पर निर्देश दिए। सपा, बसपा सरकार के मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करते थे।
संवाद संपर्क कर्यक्रम अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल रहा है। यह उसका पहला चरण था। दूसरे चरण में इस अभियान की समीक्षा होगी। इसके लिए खासतौर पर दलित भूल गांवों को चुना गया था। डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर जयंती पर शुरू हुए इस अभियान का छह मई को समापन हुआ । इसे ग्राम स्वराज अभियान का नाम दिया गया था। महात्मा गांधी भी ग्राम स्वराज के पक्षधर थे। संविधान के नीति निर्देशक अध्याय में भी ग्राम स्वराज की स्थापना के दिशा निर्देश दिए गए है। जाहिर है कि संविधान लागू होने के इतने समय बाद भी ग्राम स्वराज का सपना अधूरा है। योगी आदित्यनाथ ने इसे पूरा करने का बीड़ा उठाया है। इस प्रकार वह गांधी और आम्बेडकर दोनों का सपना पूरा कर रहे है। संपर्क और संवाद से सरकार तक सीधे आमजन की शिकायतें पहुंची है।
इसके बीच में अधिकारी और कर्मचारी नहीं थे। जिन समस्याओं का फौरी निस्तारण संभव था , वह किया गया। अन्य के लिए समयसीमा तय की गई । अधिकारियों को निर्देशित किया गया। बिजली कनेक्शन, पक्के मकान, फसल बीमा, मुद्रा बैंक सुविधा जैसे कार्यो को भी इस दौरान सनिश्चित किया गया। योगी आदित्यनाथ स्वयं इन फीडबैक को देखेंगे। इस आधार पर कह सकते है कि ग्राम स्वराज अभियान के सार्थक परिणाम निकट भविष्य में दिखाई देंगे।
इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में आये आंधी तूफान से हुए नुकसान का भी आकलन किया। मौके पर जाकर वह पीड़ित लोगों से मिले।इन्हें तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। डेढ़ दर्जन जिले इससे प्रभावित हुए है। यह मुख्यमंत्री की सक्रियता का परिणाम था कि चौबीस घण्टे के पहले पीड़ितों तक मुआवजा पहुंच गया। जाहिर है कि चाहे आपदा राहत की बात हो या ग्राम स्वराज की, योगी आदित्यनाथ ने सभी स्तर पर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया है।






