डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग का हृदय परिवर्तन अप्रत्याशित है। एकबारगी इस पर विश्वास करना भी कठिन लगता है। विध्वंशक हथियारों का यह दीवाना अब शांति और सहयोग की बात करने लगा है। यह नजारा कुछ दिनों में ही दिखाई दिया है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया को यह अपना दुश्मन नम्बर वन मानता था। देखते ही देखते ऐसा बदलाव आया कि उसने गिलेशिकवे भुला दिए। वह दक्षिण कोरिया जा पहुंचा । अंदाज भी अपनी फितरत के अनुरुप निराला था। पैदल ही सीमा पार करके शांति का पैगाम भी दे दिया। बिना कहे यह बता दिया कि सात दशक पहले भी यह जमीन एक थी। अद्भुत दृश्य था। किमजोंग ने एक कदम बढ़ाया, वह दक्षिण कोरिया आ गए, कदम वापस लिया, अपने देश मे पहुंच गए। किम जोंग की कुछ दिन पहले वाली तस्वीरें दुनिया भूल नहीं सकती। उसने लोगों की नींद उड़ा दी थी । तीसरे विश्वयुद्ध की चर्चा होने लगी थी । किम की सनक का वही स्तर था। जिस प्रकार बच्चा खिलौना देखकर खुश होता था, वैसे ही किम रॉकेट और मिसाइल परीक्षण देखकर उछल जाते थे। जापान के ऊपर से उनके परीक्षण समुद्र तक पहुंच जाते थे। उसकी धमकी भी किसी छोटे देश के लिए के लिए नहीं होती थी । वह सीधे विश्व की महाशक्ति अमेरिका को सावधान कर रहा था। नेस्तनाबूत करने की धमकी दे रहा था। लेकिन यह विश्व के लिए राहत की बात है कि किम जोंग अब बदल गए है। उन्होंने ऐलान किया कि अगले महीने तक उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण स्थल बन्द कर देगा। अमेरिकी पर्यवेक्षकों को उत्तर कोरिया आने की अनुमति दी जाएगी। इस सबन्ध में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जो इन से सहमति बन गई है। अब किम इस संबन्ध में अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करेंगे।
इसका श्रेय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को देना होगा। किम जोंग को पूरा सनकी माना जा रहा था, तो आंशिक रूप में ट्रम्प को भी बहुत पीछे नहीं है। इसी बात का असर हुआ। यदि आज बराक ओबामा अमेरिकी राष्ट्रपति होते तो यह समस्या इतनी आसानी से न सुलझती। लोहे से लोहा काटा जाता है। जिम जोंग को रास्ते पर लाने की लिए डोनाल्ड ट्रम्प ही फिट बैठते थे। एक तो उन्होंने उत्तर कोरिया पर प्रभवी प्रतिबंध लगाए। दूसरे किम को समझाया को अमेरिका पर हमला उन्हें बहुत भारी पड़ेगा। किम जोंग के सामने सद्दाम हुसैन और अफगानिस्तान के तालिबान के उदाहरण भी था। ऐसे मसले अमेरिका में पार्टी लाइन से ऊपर हो जाते है। इस के बाद ही किम जोंग के विचारों में परिवर्तन हुआ।

उनकी बोली बदल गई। हिंसा, हमला, हथियार की जगह शांति, सहयोग ,सौहार्द की बात होने लगी। ट्रम्प उनके साथ वार्ता को तैयार हो गए। लेकिन यह भी बता दिया कि किम जोंग ने शालीनता नहीं दिखाई तो वह बीच में ही वार्ता छोड़ देंगे। दूसरी बात यह कि पहले से बदहाल उत्तर कोरिया की किम जोंग परेशानी बढ़ाई है। उसने हथियारों पर बेहिसाब खर्चा किया। अपने व अपने परिवार के लिए अकूत दौलत का इंतजाम कर लिया । खनन पर उसका ही निजी नियंत्रण बताया जाता है। इसकी आमदनी उसके हवाले हो जाती है। ऊपर से प्रतिबन्धों ने मुसीबत बढा दी। इन सबका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। किम जोंग जनता है कि जनता के धैर्य की एक सीमा है। इस लिए भी वह शांति सौहार्द को हिमायती बना है। वैसे यह उसकी मूल प्रवृती नहीं लगती । उसका मूल चरित्र वह है जो रॉकेट दागते समय दिखाई देता था। फिर भी यह अच्छा है कि दक्षिण कोरिया ने उत्साह के साथ किम जोंग का स्वागत किया। किम ने राजधानी प्योंगयांग में आयोजित एक पॉप कांसर्ट में हिस्सा लिया है। इस कांसर्ट में साउथ कोरिया के पॉप गर्लबैंड और वहां के आर्टिस्ट्स शामिल थे। ये आर्टिस्ट्स एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए प्योंगयांग आए थे। इसके अलावा
किम जोंग ने दक्षिण कोरिया के नेता मून से द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने का संकल्प लिया।

कभी ये दोनों देश एक थे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया दो अलग देश बने। उन्नीस सौ दस में कोरिया पर जापान ने कब्जा कर लिया था। उन्नीस सौ पैतालीस के दूसरे विश्व युद्ध में जापान पराजित हुआ। इसी के साथ कोरिया भी मुक्त हुआ। लेकिन उसकी त्रासदी का अंत नहीं हुआ। इसके बाद सोवियत सेना ने कोरिया के उत्तरी भाग और अमेरिका ने दक्षिणी हिस्से को अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके बाद दोनो में कम्युनिस्ट और पूंजीवाद के आधार पर नफरत की दीवार बन गई। आज दक्षिण कोरिया काफ़ी संपन्न राष्ट्र है, उत्तर कोरिया बदहाल है। विभाजन के समय पूरा कोरिया गरीब था।
दक्षिण कोरिया को भारी अमरीकी मदद मिली थी। जनरल पार्क चुंग-ही ने एक सैन्य तख़्तापट के तहत दक्षिण कोरिया की सत्ता पर कब्ज़ा किया था। लेकिन उन्नीस सौ उन्यासी में उनकी हत्या कर दी गई थी। उत्तर कोरियाई शासक किम इल-सुंग तानाशाह थे। दक्षिण कोरिया ने अमरीकी मदद से इंडस्ट्री को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया। उसने उन्नीस सौ अठ्ठासी में ओलंपिक खेलों की भी मेजबानी। दूसरी तरफ़ उत्तर कोरिया किम राजवंश के शासन में कोरिया आर्थिक रूप से बहुत पीछे रह गया। उन्नीस सौ अड़सठ में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की हत्या की नाकाम कोशिश की थी। उन्नीस सौ तिरासी में म्यांमार में एक धमाके का मामला सामने आया. इसमें सत्रह दक्षिण कोरियाई नागरिक मारे गए थे।इस धमाके के तार उत्तर कोरिया से जोड़े गए थे। ये पुरानी बातें है। नए अध्याय के लिए इन्हें अलग रखना होगा।
किम जोंग के स्वर बदल चुके है। कुछ दिनों बाद उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात होगी। किम ने कहा कि अमेरिका के विचार हमारे बारे में अच्छे नहीं है। लेकिन जब बात होगी तो उन्हें पता चलेगा कि मैं अमेरिका या दक्षिण कोरिया पर परमाणु हमला करने वाला आदमी नहीं हूं। युद्ध का अंत होगा। इतना ही नहीं किम ने कहा कि वह जापान से भी वार्ता के लिए तैयार है।
ये पैसठ साल बाद उत्तर कोरिया का कोई शासक दक्षिण कोरिया गया। अंतर कोरियाई सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए किम का पैदल ही सीमा पार करना शांति का रास्ता बना सकता है।







