बॉर्डर पर बिगड़ती बात

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भारत और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर पर जो कुछ चल रहा है उससे पूरी दुनिया वाकिफ है लेकिन फिलहाल इसका कोई हल दूर तक निकलता नज़र नहीं आ रहा है। इस दौरान कश्मीर से लेकर बॉर्डर तक हमारे जवानों की कीमती जाने जा रही है आये दिन फायरिंग से न जाने कितनी निर्दोष नागरिकों की जाने भी जा रही हैं लेकिन फिर भी बॉर्डर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

इस बीच भारत-पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर तनाव चरम पर है। पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी से दोनों देशों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण हो चले हैं। पिछले चार दिनों में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में 11 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 15 जख्मी हुए हैं। वहीं खतरे को देखते हुए करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। हालात 3 जनवरी को तब खराब हुए जब पाकिस्तानी फायरिंग में बीएसएफ के एक जवान की मौत हुई थी। उसके बाद 17 जनवरी को ऐसी ही वारदात में एक और जवान शहीद हो गया। तब से सीमा रेखा पर हालात संभाले नहीं संभल रहे हैं।

पाकिस्तान की इस हरकत का हालांकि भारतीय सुरक्षा बल मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं लेकिन क्या इस खूनी जंग पर पूर्ण विराम भी लग पाएगा? पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब उसके सैनिकों को मारकर उनकी चौकियों को बर्बाद करने से लगता है हल नहीं होने वाला। सरकार को अमन बहाली के वास्ते कुछ दूसरे उपाय जल्द-से-जल्द तलाशने होंगे। जानकारों का कहना है कि बॉर्डर पर स्थिति इतनी बदतर पहले कभी नहीं थी। इस नाते सरकार को दोतरफा रणनीति अपनानी होगी।

एक तरफ उसे पाकिस्तानी बददिमागी का सख्ती से प्रतिउत्तर देना होगा वहीं बॉर्डर के पास स्थित गांवों के लोगों की जिंदगी को भी राहत देनी होगी। सिर्फ गाल बजाने से काम नहीं चलने वाला। गृह मंत्री के सिर्फ ‘‘घर में घुसकर मारेंगे’ कहने भर से पाकिस्तान का इलाज नहीं हो सकता। ‘‘ईट का जवाब पत्थर से’ देने के अलावा बातचीत के विकल्प को भी खुला रखना होगा।

पड़ोसी मुल्कों से शांति-सौहार्द बनाए रखना किसी एक की जिम्मेदारी नहीं होती है। अलबत्ता दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को रोज-रोज की चिकचिक को दफनाने के लिएआगे आना चाहिए। बॉर्डर पर जिस ढंग से हालात बद-से-बदतर हो चले हैं और स्थिति हाथ से न निकल जाए; इसके लिए पाकिस्तान को अच्छे पड़ोसी की भूमिका निभाने के लिए कदम बढ़ाने चाहिए। हालात की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गोलीबारी रुकने के बावजूद लोगों के चेहरों पर खौफ पसरा हुआ है। लिहाजा स्थायी रूप से शांति बहाली पर काम होना वक्त की जरूरत है।

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