देश में प्रदूषण को लेकर बढ़ रही चिंता आम जनमानस को झकझोर रही ही थी कि इस बीच एक यह अच्छी खबर आयी कि देश में ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर काफी हद तक घट गया है। जो हाल के दिनों में काफी चिंतनीय रूप ले चुका था उम्मीद की जानी चाहिए कि अब तक आने वाले दिनों में यही स्थिति बनी रहेगी और कम से कम इस मोर्चे पर लोगों को राहत की सांस मिलेगी।
सर्दियों का मौसम तो आमतौर पर निश्चित रूप से खाने-पीने घूमने फिरने के लिए मुफीद माना जाता है लेकिन सेहत के प्रति सावधानी भी लोगों के लिए इस दौरान बेहद जरूरी है। वैसे तो यह जरूरत सभी के लिए होती है पर बच्चों वृद्धजनों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इस मौसम में खासतौर से जरूरी है जो कई बीमारियों का शिकार होने के जोखिम से घिरे रहते हैं। निर्धन असहाय वर्ग तथा पशु पंछियों के लिए तो यह मौसम मानव मुसीबत बनकर ही आता है। उनके पास आश्रय के नाम पर कुछ नहीं या नाम मात्र के लिए ही कोई जगह नहीं होती हैं।
हल्की ठंडक अभी शुरू ही हुई है, आने वाले दिनों में हर बार की तरह शीतलहर भी चल सकती हैं ठंड के तेज होने पर इस से होने वाली हानियों से बचने के लिए जरूरी है कि शुरुआती दौर में उपाय कर लिए जाने चाहिए। इनमें दादा -दादी के नुस्खों से लेकर वर्तमान में उपलब्ध चिकित्सीय परामर्श काफी कारगर होते हैं और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में मदद करते हैं अपना ध्यान रखने के साथ जरूरी यह भी है कि असहाय वर्गों के लोगों तथा पशु पंछियों को ठण्ड से बचाने के लिए जो भी उपाय संभव हो वह किए जाएं गरीब भाइयों के लिए रैन बसेरे, अलाव की व्यवस्था अब तक प्रशासन के साथ स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा की जाने लगी है। जो प्रशंसनीय है इस व्यवस्थाओं का दायरा और बढ़ाया जाए और इससे कई वंचित लोगों को भी शीत के प्रकोप से बचाने में मदद मिल सकती है समाज के समर्थ वर्ग का काम में स्वाभाविक रूप से उत्तर दायित्व बढ़ जाता है।








1 Comment
An intriguing discussion is worth comment. I do
think that you need to publish more on this subject matter, it may not be a taboo subject but typically people don’t talk about such issues.
To the next! Best wishes!!