डॉ दिलीप अग्निहोत्री
पता नहीं किसानों की दस वर्ष में एक बार की गई कर्जमाफी को राहुल गांधी कब तक भुनाते रहेंगे। दो हजार नौ के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस सरकार ने किसानों का सत्तर हजार करोड़ कर्ज माफ किया था। कांग्रेस इसका राजनीतिक लाभ भी उठा चुकी। कर्जमाफी के बाद हुए चुनाव में उसे सफलता मिली थी। इसके बाद दो हजार चौदह तक उंसकी सरकार रही। किसान तब भी बेहाल थे। कांग्रेस सरकार भूमि अधिग्रहण समस्या का समय रहते समाधान नहीं कर सकी, खाद, बीज सिंचाई की पर्याप्त सुविधा की ओर भी ध्यान नहीं दिया गया।स्वामीनाथन रिपोर्ट पर लगातार आठ वर्ष तक कांग्रेस कुंडली मारे बैठी रही, कांग्रेस का फसल बीमा निरर्थक साबित हुआ था। अब फिर चुनाव नजदीक आ रहा है। किसानों के सामने राहुल गांधी ने फिर कर्जमाफी का जाल फेंका है। इसके अलावा राहुल गांधी के पास किसानों की भलाई का कोई विजन नहीं है। सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस किसानों की स्थिति के लिए जिम्मेदार है। अब राहुल कह रहे है कि नरेंद्र मोदी को सोने नहीं देंगे। सवाल यह है कि राहुल अपनी सरकार के समय कितना जाग रहे थे, जो दस वर्ष में एक बार कर्जमाफी के अलावा उनके पास कहने को कुछ भी नहीं है।
विशेषज्ञ मानते है कि कृषि ऋण माफी जैसे मुद्दों को चुनावी वादा नहीं बनाया जाना चाहिए। रघुराम राजन ने इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र लिखा है कि ऐसे मुद्दों को चुनाव अभियान से अलग रखा जाना चाहिए। इससे ना केवल कृषि क्षेत्र में निवेश रुकता है, बल्कि उन राज्यों के खजाने पर भी दबाव पड़ता है जो कृषि ऋण माफी को अमल में लाते है। पिछले पांच साल के दौरान राज्यों में होने वाले चुनावों में किसी ना किसी राजनीतिक दल ने कृषि ऋण माफी का वादा किया है। अभी राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कर्जमाफी की घोषणा से चुनाव जीत गई। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने ऐसा ही वादा किया था। किसानों का एक छोटा समूह ही है जो इस तरह का ऋण पाता है।

इसके अलावा संबंधित राज्य की राजकोषीय स्थिति के लिए कई समस्याएं पैदा होती हैं। जो इसे लागू करते हैं और मेरा मानना है कि दुर्भाग्यवश इससे कृषि क्षेत्र में निवेश भी घटता है। रिजर्व बैंक एक रिपोर्ट में कहा था कि कर्ज माफी से राजकोषीय घाटा पटरी से उतर सकता है, महंगाई बढ़ने के साथ वित्तीय घाटा बढ़ सकता है। सात राज्यों ने लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ किया है। यह आंकड़ा अगले वर्ष तक चार लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। क्योंकि अन्य राज्य भी वोट पाने के लिए इस तरह की घोषणाएं करेंगे। उन्नीस सौ नब्बे में वीपी सिंह सरकार ने देशभर में किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। तब कुल कर्ज की लागत दस हजार करोड़ रुपये थी। यूपीए सरकार ने दो हजार आठ नौ के बजट में इकहत्तर हजार करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ किया था।
सांसद और किसान नेता वीरेंद्र सिंह का मानना है कि किसानों की कर्ज माफी से कोई लाभ नहीं होता। किसान कर्ज लेकर आधे पैसों से खेती का सामान खरीदते हैं जबकि आधे बचे पैसों से गाड़ी खरीद लेते हैं। यही कारण है जिसकी वजह से उनका कर्ज चुकता नहीं हो पाता है। अगर हम उनके कल्याण की सोचते हैं तो किसानों के सामाजिक स्तर को भी सुधारना होगा। पंचायतों को मजबूती देनी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि और किसानों की बेहतरी के लिए तमाम कार्यक्रम चला रही है। दो हजार बाइस तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मोदी सरकार ने किसानों के हित के लिए इतने कार्य किए हैं, जितने पहले किसी भी सरकार के दौरान नहीं हुए।
कृषि की विकास दर को रफ्तार देने के लिए पशुधन, डेयरी, पॉल्ट्री और मत्स्य पालन को भी खूब प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र की प्रगति और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फायदा दिलाने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में सॉयल हेल्थ कार्ड, प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नीम कोटेड यूरिया, खाद सब्सिडी का सीधे खाते में भुगतान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों को सस्ता कृषि कर्ज, कृषि एप की लांचिंग, ई-कृषि मंडी, ई- पशुहाट, आर्गेनिक खेती को बढ़ावा जैसी तमाम योजनाएं हैं जो देशभर में चलाई जा रही है।

किसानों के लिए बिजली की अलग फीडर लाइन पर पिछले डेढ़ दशक से चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के दखल के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश में किसानों के लिए अलग फीडर लाइन बनाने के कार्य को वरीयता दी। ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मोदी सरकार विशेष रूप से ध्यान दे रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि केंद्र सरकार ग्रामीण और कृषि क्षेत्र पर करीब तीन लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
कृषि उर्वरक पर सत्तर हजार करोड़ से ज्यादा रुपए की सब्सिडी दी गई। जिससे किसानों को राहत मिल सके। सभी बैंक खातों पर पांच हजार रुपये तक की क्रेडिट सुविधा के साथ रुपे क्रेडिट कार्ड, जीवन ज्योति योजना शहर या गांव के गरीब के बैंक खाता धारको के लिए जीवन बीमा, जीवन सुरक्षा योजना-गरीबों के लिए दुर्घटना बीमा, उज्जवला योजना शहर या गांव के गरीब परिवारों के मुफ्त एलपीजी सिलेंडर योजना, डीबीटी मनरेगा में काम करने वालों का पैसा सीधे उनके खाते में साथ ही साथ अन्य योजनाओं से मिलने वाली आर्थिक सहायता बैंक खाते में अटल पेंशन योजना-असंगठित क्षेत्र में काम करने वालो के लिए पेंशन की व्यवस्था, प्रधानमंत्री आवास योजना-गांव या शहर में रहने वाले गरीबों के लिए मकान की व्यवस्था, दीनदयाल अंत्योदय योजना-गांव के गरीबों के लिए आर्थिक सहायता, ग्रामीण व शहरी कौशल विकास योजना-गांव और शहरों में रोजगारपरक कौशल विकास, फसल बीमा योजना-गांव के किसानों के लिए फसल बीमा, सॉयल हेल्थ कार्ड-किसानों की जमीन की उपज शक्ति की स्थिति पता करने के लिए सॉयल हेल्थ कार्ड, यूरिया की नीम कोटिंग- सिर्फ किसानों को ही खेती के लिए यूरिया मिले इसके लिए नीम कोंटिंग, इसकी वजह से यूरिया ना मिलने और काला बाजारी की समस्या पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

देश में यूरिया प्रचुर मात्रा मे उपलब्ध है। कृषि कौशल विकास-खेती के कामों करने के लिए कुशल कामगारों के लिए कौशल विकास, गोगुल मिशन खेती के अतिरिक्त किसानों को दूध के व्यापार से आमदनी हो इसके लिए काम ई नाम-किसान अपनी खेती की ऊपज को बाजार में सही कीमत पर बेच सकें इसके लिए ई-कृषि मंडी का इंतजाम किया गया। मूल्य-आनाजों के लिए समर्थन मूल्य में डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी की गई। मुद्रा योजना के तहत पचास हजार से दस लाख रुपये तक का बैंकों से उधार देने की व्यवस्था से छोटे और मझौले व्यापारियों को व्यापार बढ़ाने में सहयोग, स्वच्छता मिशन के तहत गांव और शहर के गरीब परिवारों के घरों के लिए शौचालय की व्यवस्था, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-देश के गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ना दीनदयाल उपाध्धाय ग्रामीण विद्युत योजना-इस योजना के तहत सभी गांवो के घरों में बिजली पहुंचाने का कार्य किया गया। ग्रामीण इलाकों में सौर संयंत्रों की स्थापना, युवाओं के बीच नशीली दवाओं की तस्करी को रोक कर मोदी सरकार अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी कमजोर क्षेत्रों का ख्याल रख रही है।
आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जो गरीब परिवारों के कल्याण पर केंद्रित है और उन्हें चिकित्सा लाभ प्रदान करती है। इस योजना में चल रही केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना शामिल हैं। सोलर चरखा मिशन शुरू किया, जिसमें सरकार हजारों कारीगरों को पांच सौ पचास करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी। जाहिर है कि राहुल गांधी यूपीए के पहले कार्यकाल में कई गई कर्ज माफी के अलावा किसी अन्य कृषि योजना की चर्चा नहीं करते है। जबकि मोदी सरकार किसानों की आय दुगुनी करने की दिशा में कारगर कदम उठा रही है।







