डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति में मध्य एशिया को पर्याप्त महत्व दिया था। वह उज्बेकिस्तान सहित मध्य एशिया के अन्य देशों की यात्रा कर चुके है। उसमें आपसी सहयोग बढ़ाने की मजबूत बुनियाद कायम हुई थी। मध्य एशिया के मुल्क प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न है। पन बिजली, तेल, गैस के वहाँ भंडार है। इसके अलावा ये मुल्क इस्लामी आतंकवाद से मुक्त है। भारत के लिए यह सभी स्थितियां अनुकूल है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव पिछले दिनों भारत यात्रा पर आए। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।संयुक्त बयान में अनेक मसलों पर साझा रणनीति बनाने की घोषणा की गई। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी इस क्षेत्र की समस्या हैं। भारत सदैव आतंकवाद के विरुद्ध साझा प्रयास करने की पैरवी करता रहा है। उज्बेकिस्तान ने इसका समर्थन किया है। दोनों पक्ष अफगानिस्तान में टिकाऊ शांति एवं सुरक्षा के लिये आतंकवाद के सभी स्वरूपों का बिना भेदभाव के मुकाबला करने का विचार साझा करते हैं । अफगानिस्तान में पुनर्निमाण कार्य में संयुक्त रूप से जारी रखेंगे। इसके लिए दोनों देश नियमित सम्पर्क में रहेंगे। शावकत मिर्ज़ियोयेव ने कहा कि दोनों देशों का यह साझा विचार है। अफगानिस्तान में समस्या का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता। शांति की स्थापना के लिये अफगानिस्तान की सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक वार्ता की एकमात्र रास्ता है। भारत और उज्बेकिस्तान इसमें सहयोग कर सकते है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत एवं उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचाने तथा सामरिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया । दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यटन, फार्मा, स्वास्थ्य समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के सत्रह समझौते पर भी हस्ताक्षर किये। नरेन्द्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव के बीच सुरक्षा, शान्ति, समृद्धि और सहयोग संबंधी क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों समेत आपसी सहयोग एवं साझा हितों से जुड़े विविध विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।
व्यापार और निवेश को भी आगे बढ़ाया जाएगा। अगले चार वर्ष में एक अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा है। तरजीही कारोबार समझौते पर वार्ता शुरू करने का भी निर्णय लिया गया है। उज़्बेकिस्तान के प्रस्ताव पर भारत ने वहां के सामाजिक क्षेत्रों में कम लागत के घरों और ऐसे और भी सामाजिक क्षेत्र की आधाारभूत ढांचे की परियोजनाओं के लिए बीस करोड़ डॉलर की ऋण सुविधा देगा। अंतरिक्ष, मानव संसाधन विकास और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में उज़्बेकिस्तान के हित के लिए हमने भारत के अनुभव से लाभ उठाने का प्रस्ताव रखा है।
भारत और उज़्बेकिस्तान के राज्यो के बीच समझौते का नया अध्ययय जोड़ा गया। आगरा और समरकंद के बीच समझौते और गुजरात तथा उज़्बेकिस्तान के अंदिजन के बीच समझौते हुए हैं। दोनों देशों के बीच शिष्टमंडल स्तर की वार्ता में भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सम्पर्क में वृद्धि करने के रास्तों पर विचार किया गया है। इसमें व्यापार और सम्पर्क के लिए चाबहार बंदरगाह को एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। भारत अश्गाबात समझौते का इस वर्ष फरवरी में सदस्य बना है। उज़्बेकिस्तान अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन कॉरिडोर में शामिल होने पर सहमत हुआ है। उज्बेकिस्तान ने परिवहन कारिडोर का विकास करने पर सहमति जताई। सामरिक सहयोग को मज़बूत बनाया जाएगा।
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को सफल माना जा सकता है। इसके माध्यम से द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार हुआ है, वही आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर भी सहमति बनी है। इसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम होंगे।







