स्वामी विवेकानन्द ने बढाई थी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा

0
imaging by: shagun news india .com
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
ब्रिटिश दासता के समय वैश्विक मंचों पर भारत को उचित महत्व नहीं दिया जाता था। यह बात स्वामी विवेकानंद को आहत करती थी। उनका सोचना था कि भारत जैसी उदार और सहिष्णु सभ्यता अन्य कोई नहीं है। इसमें मानवता के कल्याण की कामना की गई है। इसी आधार पर भारत को विश्वगुरु माना गया था। यहाँ विश्व को ज्ञान का प्रकाश मिलता था।
स्वामी विवेकानन्द चाहते थे कि भारत एक बार पुनः विश्वगुरु के पद पर आसीन हो। इसी के अनुरूप उन्होंने विश्व को सन्देश दिया। भगिनी निवेदिता ने कहा था कि भारत ने पिछले पांच हजार वर्षों में चिंतन मनन तप साधना और सौभाग्य से ज्ञान का जो नवनीत प्राप्त किया है। यदि रामकृष्ण परमहंस उसके प्रतीक हैं तो आगामी दो हजार वर्षों तक भारत अब जो चिंतन करेगा स्वामी विवेकानंद उस चिंतन के युगीन प्रतिनिधि हैं।
पृथ्वी पर केवल उनतालीस ऋतु चक्र देख सकने वाले इस युगपरिभाषक को अपना आदर और आश्वस्ति दें कि हम  उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत के जयघोष को सदैव प्राणों में गुंजित रखेंगे। विवेकानन्द जयंती पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक दो अलग अलग समारोहों में शामिल हुए। इसमें उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताया। उस पर चल कर हम अपने देश को पुनः विश्व गुरु बना सकते है।
स्वामी विवेकानन्द ने यह प्रमाणित कर दिया था कि भारत को विदेशी आक्रांताओं ने राजनीतिक रूप से भले ही गुलाम बनाया हो, लेकिन भारत सांस्कृतिक रूप से कभी परतंत्र नहीं रहा। यही कारण है कि जहाँ विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताएं समय के साथ समाप्त हो गई, भारतीय सभ्यता आज भी कायम है। यह हमारे ऋषियों का शाश्वत चिंतन है। राज्यपाल राम नाईक ने  कहा कि स्वामी विवेकानन्द बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे।  वह  महान संत होने के साथ-साथ देशभक्त, प्रखर ओजस्वी वक्ता, विचारक, लेखक तथा मानवता प्रेमी थे।
मात्र उनतालीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानन्द ने भारत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलायी। अठारह सौ तिरानवे  में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानन्द के भाईयों बहनों कहकर सम्बोधित करने से सम्मेलन का माहौल बदल गया। स्वामी जी ने भारत का मान वसुधैव कुटुम्बकम का दर्शन देकर बढ़ाया। वह समय ऐसा था जब अंग्रेजों द्वारा भारतीयों को हीनता की भावना से देखा जाता था तथा उन्हें अशिक्षित एवं संस्कारहीन समझा जाता था। स्वामी विवेकानन्द ने पूरा विश्व एक परिवार है कहकर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों को समाहित करने की क्षमता है।
यह श्लोक आज भी संसद के प्रवेश द्वार पर लिखा है। स्वामी विवेकानन्द की जयंती को युवा दिवस  के रूप में मनाया जाता है। हमारा देश युवाओं का देश है। वर्ष  दो हजार पच्चीस  तक दुनिया के सभी देशों की तुलना में सबसे ज्यादा युवा भारत में होंगे। युवा हमारे देश की पूंजी हैं जिन्हें उचित मार्गदर्शन मिलेगा तो भारत विश्व गुरू हो सकता है। स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आत्मसात कर युवा देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करना चाहिए।
राज्यपाल  राम नाईक ने स्वामी विवेकानन्द की जयंती पर अमीनाबाद के झण्डे वाले पार्क स्थित स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करके अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि यदि देशवासी इस भूमिका में काम करें तो भारत बौद्धिक सम्पदा के आधार पर विश्व गुरू बन सकता है। स्वामी विवेकानन्द ने देश और दुनिया के लोगों को नई सोच और नई दिशा दी तथा देशवासियों में स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। भारतीय वेदान्त, दर्शन और आध्यात्म पर समूचे विश्व के सामने अपने विचार रखे। शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में दिये गये उनके विचारों से भारत की एक विशेष छवि बनी। उनके व्याख्यान से यह सिद्ध हुआ कि भारतीय संस्कृति में सभी को समाहित करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा प्राप्त करके हमारे युवा उनके विचारों को आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए।
पूर्व विधान परिषद सदस्य विन्धवासिनी कुमार के सुझाव पर उन्होंने आश्वासन दिया कि ऐतिहासिक झण्डेे वाले पार्क में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के प्रस्ताव को लिखकर भेजें जिससे उस पर कार्यवाही की जा सके। जाहिर है कि राज्यपाल राम नाईक ने खासतौर पर युवा पीढ़ी का आह्वान किया, उन्हें स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके विचार आज भी प्रासंगिक है। विश्व में अशांति और तनाव का जो माहौल से उसका समाधान भारतीय चिंतन से हो सकता है। इसके लिए अंततः  विश्व हमारी ओर ही देखेगा। लेकिन इसके पहले हमको अपनी विरासत पर अमल करना सीखना होगा। इसी के साथ इस पर गर्व भी करना होगा। हमारे लिए यह राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय होना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here