उत्तर भारत तक गुजरात कांग्रेस की गूंज

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
गुजरात में कांग्रेस का दांव उल्टा पड़ा। उसने उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों पर हमले से राज्य सरकार को घेरने की योजना बनाई थी। इसमें कांग्रेस के विधायक और उसकी जातीय सेना का नाम आया है। अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल जैसे कुछ मोहरे है, जिनके बल पर कांग्रेस ने गुजरात में सरकार बनाने की रणनीति बनाई थी। लेकिन इसमें सफलता नही मिली। अब यही तत्व कांग्रेस की फजीहत करा रहे है। कुछ दिन पहले हार्दिक पटेल उन्नीस दिन अनशन पर बैठे थे। यह फ्लॉप शो रहा। कांग्रेस उनके साथ थी, इसलिए उसे भी कदम पीछे हटने पड़े। बिना किसी आश्वासन के अनशन तोड़ना पड़ा था। इस बार दूसरे जातिवादी नेता अल्पेश ठाकोर पर आरोप है। उत्तर भारतीयों को गुजरात से बाहर निकालने का उनका वीडियो चर्चा में है। एक तीर से तीन निशाने साधने के प्रयास किये जा रहे थे।
एक तो इससे राज्य सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया जाता, दूसरा उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भाजपा के खिलाफ उकसाने का काम होता। तीसरा यह कि गुजरात के उद्योग जगत में अफरा तफरी का माहौल बनता। इससे सरकार की फजीहत होती। गुजरात सरकार ने आरोपी को तत्काल गिरफ्तार किया, उपद्रव कर रहे लोगों के खिलाफ कार्यवाई की, वहां रहने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाए। इस प्रकार भाजपा ने अपने दायित्व का निर्वाह किया। लेकिन कांग्रेस विधायक और कार्यकर्ताओं की साजिश बेनकाब हो गई। एक आपराधिक घटना को ये ऐसा रूप देने में लगे थे, जिसकी गूंज उत्तर भारत तक सुनाई देने लगी थी। लेकिन सच्चाई जल्दी ही सामने आ गई।
मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने भी इसे सही बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले हिंसा भड़काती है, फिर उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष ट्वीट करके निंदा करते हैं। राहुल हिंसा के खिलाफ हैं तो उन लोगों को पार्टी से निकालें, जिन पर आरोप लगे हैं। वैसे राहुल गांधी का ट्वीट भी रोचक है। वह कमेंट्री करते लग रहे है। वह कहते है कि गुजरात मे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार के युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें यहां से निकलने को बाध्य किया जा रहा है। प्रकरण चाहे जहाँ का हो, राहुल की कोई बात नरेंद्र मोदी के बिना पूरी नहीं होती। आगे वह कहते है कि युवाओं ने मोदी पर भरोसा किया किंतु प्रधानमंत्री ने उन्हें धोखा दिया है। राहुल ने अपने ही आरोपी विधायक पर कुछ नहीं बोला।
वह गुजरात के मुख्यमंत्री पर हमला बोलते, तब भी ठीक था। लेकिन इस घटना में भी वह सीधे मोदी तक जा पहुंचे। मतलब साफ है। कांग्रेस इस पर केवल राजनीति करना चाहती है। मासूम से बलात्कार के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर ठाकोर सेना ने हमले किये। उन्हें गुजरात छोड़ने की धमकी दी। अल्पेश ठाकोर सेना के मुखिया हैं। गांधीनगर में पुलिस ने कांग्रेस के नेता महोत ठाकोर को गिरफ्तार कर लिया। धमकी भरा एक विडियो वायरल होने के बाद गिरफ्तार किया गया था। ठाकोर सेना के नेता की गिरफ्तारी से कांग्रेस के तेवर ढीले पड़े है। अल्पेश भी इस पर टिप्पणी से बचते रहे। जबकि करीब एक हफ्ते पहले अल्पेश ने सार्वजनिक रूप से नफरत फैलाने वाला बयान देते हुए कहा था। उसका कहना था कि दूसरे प्रदेश के लोगों के कारण अपराध बढ़ गया है, गुजरातियों को रोजगार नहीं मिल रहा है।
अल्पेश की पूरी रणनीति सुनियोजित थी। उंसकी दिलचस्पी अपराधियों के खिलाफ कार्यवाई की नहीं, बल्कि घटना को प्रांतीय नफरत में बदलने की थी। लेकिन उसे यह उम्मीद नहीं थी जितनीं जल्दी उंसकी असलियत सामने आ जायेगी।
यह लगभग साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों के विरोध की शुरुआत अल्पेश ने ही की थी,  यह दांव उल्टा पड़ा है। अब वह डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। वह कांग्रेस पार्टी के बिहार सह प्रभारी भी हैं। असलियत सामने आने के बाद अल्पेश बैकफुट पर हैं। उनकी छवि बिगड़ी है। जिसे बचने के लिए वह हाँथ पैर मार रहे है।  उत्तर भारतीयों के खिलाफ हमले  गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और महसाण में हुए। इनमें अल्पेश की सेना का प्रभाव है।पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में करीब दो सौ लोगों को हिरासत में लिया है। गुजरात के साबरकांठा जिले में एक चौदह वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार के आरोप में रविंद्र साहू को गिरफ्तार किया गया था। रविंद्र साहू बिहार के रहने वाले हैं। इसके बाद ही जगह-जगह उत्तर भारतीय लोगों के खिलाफ गुजरात में हमले शुरु हो गए। बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू नाम के मजदूर को घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
गुजरात में अपने जीर्णोद्धार के लिए कांग्रेस ने जातिवादी युवा नेताओं को मोहरा बनाया था। ये सीमित सोच के साथ राजनीति में उतरने वाले लोग थे। कांग्रेस ने इनमें तात्कालिक हित देखे। लेकिन इनके विचारों की तरह इनसे होने वाले राजनीतिक लाभ भी सीमित ही रहने थे। इनके उभरने के समय भी अटकलें लगी थी। यह माना जा रहा था कि पर्दे के पीछे से इन्हें कोई आगे कर रहा है। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले यह पर्दा भी हट गया। ये लोग कांग्रेस के पाले में आ गए। अब यही मोहरे कांग्रेस की मुसीबत बन गए है। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है। वह कमजोर हो चुकी है। विभिन्न राज्यों में उसे स्थानीय पार्टियों से तालमेल करने पड़ रहे है। बिहार में राजद उंसकी सहयोगी है। लेकिन गुजरात में कांग्रेस के लोग बिहारियों पर हमले करेंगे तो राजद की स्थिति भी खराब होगी। जाहिर है गुजरात की घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की छवि धूमिल हुई है।

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