पेट्रोलियम पदार्थों का उचित संरक्षण जरूरी

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राम नाईक को देश में सर्वाधिक समय तक पेट्रोलियम मंत्री रहने का गौरव प्राप्त है। लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने इस मंत्रालय को बुलंदियों पर पहुंचाया। उनके पहले गैस सिलेंडर घर ले आना जंग जितने जैसा था। राम नाईक के कार्यकाल में वह दौर भी आया जब घर की कुंडी खटखटा कर सिलेंडर पहुंचाया जाता था। इसके बाद एक कनेक्शन पर दो सिलेंडर लेने की सुविधा प्रदान की गई।  शहीदों के परिजनों को गैस एजेंसी अथवा पेट्रोल पम्प देने का निर्णय भी उन्हीं का था। इसके अलावा राम नाईक ने अनेक मूलभूत सुधार किए थे। इस संदर्भ में  अरब देशों की यात्रा बहुत महत्वपूर्ण साबित हुई थी। यहां उन्होंने इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन सहित अनेक नेताओं से मुलाकात की थी। इस संबन्ध में उनके अनुभव बहुत व्यापक है। लखनऊ में पेट्रोलियम विषय से सम्बंधित कार्यक्रम में राम नाईक ने उपयोगी विचार व्यक्त किये।
उन्होंने इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में संरक्षण क्षमता महोत्सव  सक्षम दो हजार उन्नीस का उद्घाटन किया। इसका आयोजन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पेट्रोलियम कंजरवेशन एण्ड रिसर्च एसोसिएशन तथा तेल एवं गैस सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा तेल एवं गैस उत्पादों के संरक्षण एवं समुचित उपयोग के लिये जनमानस में जागरूकता के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में इण्डियन आॅयल कारपोरेशन के कार्यकारी निदेशक अरूण कुमार गंजू, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड के अनुज कुमार जैन, गैस अथारिटी आॅफ इण्डिया के  आर के  दास, भारत पेट्रोलियम लिमिटेड के  रमन मलिक सहित लगभग चारबसौ विद्यार्थीगण एवं बड़ी संख्या में तेल कंपनियों के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
राज्यपाल ने इस अवसर पर पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण की शपथ दिलायी तथा जागरूकता रैली में भाग लेने वाले विद्यालयों के प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह व शाॅल भेंटकर सम्मानित भी किया। सक्षम दो हजार उन्नीस के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा पोस्टर, बैनर, क्विज, चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से पेट्रोलियम उत्पादों के संरक्षण के लिये समाज को जागरूक किया जायेगा।
राज्यपाल ने कहा कि विकास के लिये ऊर्जा आवश्यक है। ऊर्जा के सही प्रयोग और संरक्षण पर ही आने वाले कल का विकास टिका है। सभी का यह दायित्व है कि ऊर्जा के विभिन्न विकल्पों का सही प्रयोग करें और इसके संरक्षण के प्रति हर संभव प्रयास करें। देश की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था में पेट्रोलियम उत्पाद अत्यंत आवश्यक हैं। इनका अपव्यय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं इसलिये उनके प्रति जागरूकता और संरक्षण जरूरी है।
इस विषय पर जनता को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जाना चाहिए। जैसे पानी जीवन के लिये महत्वपूर्ण है उसी तरह पेट्रोल को भी बचाने की आवश्यकता है। छोटी-छोटी बातों का ख्याल करके पेट्रोलियम बचाया जा सकता है। पेट्रोलियम की दो बूंद बचाना विकास के लिये जरूरी है। जन प्रबोधन के लिये जागरूकता आवश्यक है, उसे दायित्व और कर्तव्य समझकर करें तभी देश के विकास की गति बढ़ेगी। बढ़ते हुये प्रदूषण को ध्यान में रखकर अन्य ऊर्जा के स्रोत पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थ की बचत के लिये लोगों के सामने व्यवहारिक उपाय सुझाना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि अपने परिवार में आना सबको अच्छा लगता है। मैं भी एक समय में पेट्रोलियम मंत्री के नाते पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ा रहा हूँ। तीस दिन तक चलने वाला सक्षम महोत्सव वास्तव में पेट्रोलियम विभाग का कुम्भ महोत्सव जैसा आयोजन है। राज्यपाल ने बताया कि वर्ष दो हजार चार  में जब वे पेट्रोलियम मंत्री थे तब देश में सत्तर प्रतिशत पेट्रोलियम आयात होता था जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता था। आयात पर निर्भरता कम करने के लिये उनके कार्यकाल में पेट्रोल में पांच प्रतिशत इथनाॅल मिश्रित करने का निर्णय लिया गया। पेट्रोलियम मंत्री रहते हुये उन्होंने विदेशों में पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश का कठिन निर्णय लिया जिसके सकारात्मक परिणाम आये। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के स्तर से पेट्रोलियम के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास किये जा रहे हैं।
कार्यक्रम में इण्डियन आॅयल कारपोरेशन के कार्यकारी निदेशक श्री अरूण कुमार गंजू ने स्वागत उद्बोधन दिया। राज्यपाल ने स्कूली बच्चों की रैली को झण्डी दिखाकर रवाना किया।

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