मॉनसून की लेटलतीफी बढ़ाएगी किसानों की चिंता?

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इस बार मॉनसून के देर से आने की भविष्यवाणी ने लोगों को एक बार फिर चिंता में डाल दिया है। किसान इस बात को लेकर चिंता में हैं कि उनकी फसल को फिर कहीं नुक्सान न उठाना पड़े। अगर ऐसा हुआ तो एक बार फिर मंहगाई के साथ आर्थिक संकट का सामना करना झेलना पड़ सकता है।

बता दें कि इस बार सामान्य से कम बारिश का अनुमान और मॉनसून के पांच दिन देरी से आने की सूचना वाकई अच्छी नहीं है। भारतीय मौसम विभाग और मौसम के बारे में जानकारी देने वाली निजी संस्था स्काईमेट वेदर, दोनों ने सामान्य और सामान्य से कम बारिश और मॉनसून के देर से आने की भविष्यवाणी की है। यानी इस साल सरकार और जनता दोनों के लिए चुनौतियां ज्यादा हैं। और इसकी वजह भी बहुत हद तक स्पष्ट है। कम बारिश मतलब सूखे के हालात और खेती-किसानी पर चोट। देर से बुवाई समेत तमाम तरह की दुश्वारियों से किसानों को दो-चार होना होगा। कह सकते हैं कि मॉनसून देश की अर्थव्यवस्था की मोहताज है।

2014 और 2015 में कमजोर मॉनसून के चलते उपज नहीं होने का परिणाम देश देख चुका है। सूखे के हालात बनने के चलते उन सालों में किसानों की आत्महत्या करने की खबरें सुर्खियों में थीं। हालांकि इस बार हालात उतने संजीदा नहीं हैं मगर कुछ इलाकों मसलन, मराठवाड़ा, उत्तरी कर्नाटक, मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में स्थितियां मनमाफिक नहीं हैं। चूंकि मॉनसून से ही कृषि उत्पादन का सीधा संबंध जुड़ा हुआ है।

कृषि उत्पादन का भारत की अर्थव्यवस्था में 14 फीसद का योगदान है। और यह सेक्टर (कृषि सेक्टर) देश की 65 करोड़ से अधिक आबादी को रोजगार देता है। चूंकि यह व्यवस्था छिन्न-भिन्न न हो, इसलिए सरकार को ज्यादा जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा। उन कारणों को ढूंढ़ना होगा, जिसके चलते मॉनसून में कमी आती जा रही है। साथ ही मॉनसून की रफ्तार सुस्त रहने की वजह तलाशनी होगी।

ग्लोबल वार्मिग और अल नीनो का सही से अध्ययन कर इसकी काट तलाशनी होगा। सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान आने वाली सरकार के लिए भी चिंता का सबब होगा। इस नाते केंद्र और राज्य सरकारों को सतर्क रहने की जरूरत है। खाद्यान्न उत्पादन पर असर पड़ने की आशंकाओं के बीच आकस्मिक फसल योजना की पूरी तैयारी रखनी होगी। सूखा प्रबंधन कौशल का उपयोग करना होगा। सबसे महत्त्वपूर्ण तय जल संरक्षण पर ध्यान देने की जरूरत है। न्यूनतम पानी में तैयार होने वाली फसल की जानकारी किसानों से साझा करनी होगी।

किसानों को उसी तरीके से बेहतर प्रशिक्षण देने से भी इसकी भरपाई की जा सकती है। किसान भाइयों के मनोबल को मजबूत बनाने का काम करना होगा। कुल मिलाकर सरकार को अपनी प्रबंधन क्षमता का उम्दा परिचय देना होगा। यानी अर्थव्यवस्था को मॉनसून से सुरक्षित किए जाने को नीतिगत लक्ष्य बनाने होंगे।

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