तेरा भी टाइम खराब चल रहा आतंकी हाफिज सईद!

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संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आतंकवादी हाफिज सईद से प्रतिबंध हटाने की याचिका खारिज किया जाना बिल्कुल स्वाभाविक है। हालांकि हाफिज सईद की ओर से लाहौर की एक प्रसिद्ध लॉ फॉर्म ने जोरदार वकालत की थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ डैनियल फासियाती ने पूरी समीक्षा के बाद कहा कि ऐसा कोई तय नहीं मिला, जिससे उस पर प्रतिबंध का आधार गलत साबित हो।

हाफिज के आवदेन आने के समय से ही भारत पूरी तरह सक्रिय था एवं फ्रांस, ब्रिटेन आदि को साथ लेकर लड़ाई लड़ी। वस्तुत: भारत के प्रस्ताव पर ही दिसम्बर 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे प्रतिबंधित किया था। हाफिज सईद भारत के सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों में से हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत में रखे गए तय, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन आदि द्वारा हाफिज को आतंकवादी घोषित करने के कारण भी शामिल थे, को स्वीकारने का मतलब साफ है। यानी हाफिज की आतंकवादी गतिविधियां जारी हैं और उससे विश्व शांति को खतरा है। इसके बाद भविष्य में हाफिज कभी प्रतिबंधों से मुक्त हो सकेगा, इसकी संभावना लगभग खत्म हो गई है।

पाकिस्तान के पास इस मामले की सुनवाई से अलग रखने का ही विकल्प था। अगर पाकिस्तान इसमें हाफिज के पक्ष में खड़ा होता तो यह साबित हो जाता कि उसके संरक्षण में भी उसकी आतंकवादी गतिविधियां चल रहीं हैं। भारतीय कूटनीति के कारण उस पर आतंकवाद को लेकर जैसा दबाव है, उसमें वह चाहकर भी हाफिज की मदद नहीं कर सकता था। जैश के ठिकानों पर भारतीय बमबारी के बाद भारत की यह बड़ी कूटनीतिक सफलता है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के लिए सुरक्षा परिषद में फिर प्रस्ताव लाया जा चुका है।

सुरक्षा परिषद के सदस्यों के तेवर देखते हुए इसके भी पारित हो जाने की संभावना दिख रही है। ऐसा होता है तो संयुक्त द्वारा प्रतिबंधित दो बड़े आतंकवादी पाकिस्तान के नागरिक होंगे। पाकिस्तान विश्व के तेवर को देखते हुए हाफिज के संगठनों को प्रतिबंधित कर तत्काल कार्रवाई कर रहा है, लेकिन उसने उसे स्वतंत्र छोड़ा हुआ है। अगर हाफिज का संगठन आतंकवादी कानून के तहत पाकिस्तान में प्रतिबंधित किया जा सकता है तो उसे उसी कानून के तहत गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? पाकिस्तान अगर अपने देश को प्रतिबंधों और इन आतंकवादियों के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई से बचना चाहता है तो वह इसे आतंकवादी कानून के तहत गिरफ्तार कर मुकदमा चलाए।

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