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    Home»ब्लॉग

    प्लास्टिक प्रदूषण के आगे हांफती दुनिया !

    By June 9, 2018 ब्लॉग No Comments4 Mins Read
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    जी क़े चक्रवर्ती

    बीते पांच जून 2018 को अपने देश में भी विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। फिलहाल यह हर साल की तरह की इस बार भी खानापूर्ति ही साबित हुआ लेकिन वास्तव में यदि कहा जाये तो जमीनी हकीकत पर शायद ही पर्यावरण बचाव के लिए कोई बड़ा काम हुआ हो, यदि एक बार भी 20 परसेंट ईमानदारी से काम हो जाये, तो इसके लाभ लोगो को दिखने लगेंगे। यूपी के सीएम ने अभी दो दिन पहले ही कहा है कि प्लास्टिक हमारे जीवन का सबसे बड़ा खतरा है और इस पर प्रतिबन्ध अति आवश्यक है उन्होंने यह भी कहा कि इसे ख़त्म करने के लिए हम हर संभव प्रयास यूपी में करेंगें। यह वास्तव में एक सकारात्मक सोच है।

    फिलहाल पर्यावरण दिवस सुरक्षा एवं उसके संरक्षण के लिए पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक एवं सामाजिक जागृति लाने के लिए वर्ष 1972 में की किया था। इसके दो वर्षो के बाद इसे 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया था।

    विश्व पर्यावरण पर्यावरण दिवस पर भारत वैश्विक मेजबान था। जिसका उद्देश्य और संकल्प दुनिया को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने का है। अभी पिछले ही वर्ष दिसंबर में राष्ट्रसंघ की तीसरी पर्यावरण एसेम्बली में दुनिया के 193 देशों ने विश्व को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने का संकल्प लिया।

    प्लास्टिक हम इंसानो के जीवन की अत्यंत उपयोगी वस्तु बन गयी है। हम प्रतिदिन जीवन निर्वाह में प्लास्टिक का उपयोग कई रूपों में करते हैं। प्रातः सोकर उठने से लेकर शाम के सोने तक टूथब्रश से लेकर पानी के पीने वाली बोतलों एवं भोजन की पैकिंगों में इस्तेमाल होने वाले सामग्रियों जैसे अनेक रूप में प्लास्टिक का प्रयोग तो करते ही हैं इसके अलावा कंप्यूटर, फ्रिज, मोबाइल जैसे दैनिक उपयोग में होने वाले सामग्रियों में प्लास्टिक का मौजूद रहना एक आम बात बन गयी है। प्लास्टिक के बिना जीवन की परिकल्पना असंभव सी बात बन गयी है, लेकिन यह पर्यावरण के लिए बहुत घातक साबित होने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक से बनी अधिकांश वस्तुएं पूर्णतया नष्ट नहीं होती हैं, इसके नष्ट होने में 500 से 1000 वर्षों तक का समय लगता हैं।

    वर्ष 1950 से अब तक उत्पादित प्लास्टिक पदार्थ में सिर्फ 20 फीसदी ही या तो रीसाइकल किया जाता है, बाकी के कुछ भाग बिजली बनाने में इस्तेमाल किया जाता है और शेष प्लास्टिक हमारी इसी धरती के भूमि एवं समुद्रों को लगातार प्रदूषित करते चले जा रहे हैं। हम जितना भी प्लास्टिक का उपयोग करते हैं उसका साठ 60 प्रतिशत प्लास्टिक से बनी वस्तुयें ऐसी हैं, जो सिर्फ एक बार इस्तेमाल के लिए ही बनाए जाते हैं, उनमे से जैसे- चाय/कॉफी के कप, पानी या अन्य पेय पदार्थों की बोतलें एवं पॉलिथीन से बने प्लास्टिक के थैले इत्यादि।

    उत्पादित प्लास्टिकों का एक बड़ा हिस्सा या तो भूमि में या समुद्रों में डाल दिया जाता है जिसे या समुद्री बड़े जिव या व्हेल, सील जैसे बड़ी मछलियां प्लास्टिक में फंसकर या उसे खा कर प्रतिदिन मर जाती हैं। प्लास्टिक टूटकर माइक्रो प्लास्टिक यानी अत्यंत सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिसे मछलियां खा लेती हैं और उन्ही मछलियों को जब हमारे द्वारा सेवन किया जाता है तो उन अति सूक्ष्म प्लास्टिकों के कण भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं इसके अलावा हमारे द्वारा रोज मर्रे के उपयोग में लाया जाने वाला घरेलू सामग्रियों में प्लास्टिक के कप जिसमे हम स्वमं चाय पिते है प्लास्टिक के बने प्लेटों में गर्म खाना परोसा जता है चाय गर्म पेय पीने से या प्लास्टिक की पानी की गर्म हुई बोतल में कई तरह के टॉक्सिन पैदा हो जाते हैं, जो हमारे शारीर में प्रवेश कर कैंसर जैसे कई घातक बीमारियों को जन्म देते हैं।

    यदि आने वाले समय में समुद्रों एवं अन्य जलाशयों में प्लास्टिक प्रदूषण इसी गति से होता रहा तो वर्ष 2050 तक इन जलाशयों में जलचरों के स्थान पर प्लास्टिक के वस्तुएं एवं इससे बने थैले और पन्नियां ही तैरते मिलेंगे। वर्त्तमान समय में पॉलिथीन के झोले एवं पानी व अन्य पेय पदार्थों की बोतलें सबसे बड़ी समस्या बन कर उभरी है। संपूर्ण दुनिया में प्रति मिनट दस लाख से भी अधिक पेय पदार्थ एवं पानी की बोतलें बेची जाती हैं। इंडोनेशिया, चीन, अमरीका एवं थाईलैण्ड जैसे देश में प्लास्टिक के इस्तेमाल के बाद उससे होने वाले अपशिष्ट पैदा करने वाले विश्व के अन्य देशों में अग्रणी हैं। इसीलिए इस बार मनाये गए विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कई देश के वैज्ञानिको ने इस पर चिंता व्यक्त की है कि यदि हम समय रहते नहीं चेते तो यह समस्या किसी भी समय विकराल रूप धारण कर जलवायु परिवर्तन का बड़ा कारण बन सकती है।

    #plastic polution #polution

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