Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, August 10
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Hot issue

    हाथियों पर मंडराने लगा है अस्तित्त्व का संकट!

    By May 11, 2018 Hot issue No Comments9 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    google
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 589

    पंकज चतुर्वेदी

    बात थोड़ी पुरानी है झारखंड-उडीसा-छत्तीसगढ की सीमा के आसपास एक हाथी-समूह का आतंक है। जंगल महकमे के लोग उस झुण्ड को भगाते घूम रहे हैं जबकि जिन दर्जनों लोगों को वह हाथी-दल घायल या नुकसान कर चुका है; उसे मारने की वकालत कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि हाथी बस्ती में आ गया है, लेकिन यदि तीस साल पहले के जमीन के रिकार्ड को उठा कर देखें तो साफ हो जाएगा कि इंसान ने हाथी के जंगल में घुसपैठ की है। दुनियाभर में हाथियों को संरक्षित करने के लिए गठित आठ देशों के समूह में भारत शामिल हो गया है। भारत में इसे ‘राष्ट्रीय धरोहर पशु’ घोषित किया गया है। इसके बावजूद भारत में बीते दो दशकों के दौरान हाथियों की संख्या स्थिर हो गई हे। जिस देश में हाथी के सिर वाले गणेश को प्रत्येक शुभ कार्य से पहले पूजने की परंपरा है, वहां की बड़ी आबादी हाथियों से छुटकारा चाहती है ।

    कभी हाथ्यिों का सुरक्षित क्षेत्र कहलाने वाले असम में पिछले सात सालों में हाथी व इंसान के टकराव में 467 लोग मारे जा चुके हैं। अकेले इस साल नवंबर तक 43 लोगों की मौत हाथों के हाथों हुई। पिछले साल 92 लोग मारे गए थे। झारखंड की ही तरह आए रोज  हाथी को गुस्सा आ जाता है और वह खड़े खेत, घर, इंसान; जो भी रास्ते में आए कुचल कर रख देता है । देशभर से हाथियों के गुस्साने की खबरें आती ही रहती हैं । पिछले दिनों भुवनेश्वर में दो लेाग हाथी के पैरों तले कुचल कर मारे गए ।.ऋ़शिकेश के कई इलाकों में हाथियों के डर से लोग खेतों में नहीं जा रहे हैं । छत्तीसगढ़ में हाथी गांव में घुस कर खाने-पीने का सामान लूट रहे हैं । इंसान को भी जब जैसया मौका मिल रहा है, वह हाथियों की जान ले रहा है । दक्षिणी राज्यों  के जंगलों में गर्मी के मौसम में हर साल 20 से 30 हाथियों के निर्जीव शरीर संदिग्ध हालात में मिल रहे हैं । प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ को अपना हक समझने वाला इसांन हाथी के दर्द को समझ नहीं रहा है और धरती पर पाए जाने वाले सबसे भारीभरकम प्राणी का अस्तित्व संकट में है ।

    Related image

    19 वीं सदी की शुरूआत में एशिया में हाथियों की संख्या दो लाख से अधिक आंकी गई है । आज यह बामुश्किल 35 हजार है । सन 1980 में भारत में 26 से 28 हजार हाथी थे । अगले दशक में यह घट कर 18 से 21 हजार रह गई । भले ही सरकारी दावे कुछ हों, लेकिन आज यह आंकड़ा 15 हजार के आसपास सिमट कर रह गया है । भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में सबसे अधिक हाथी हैं । उसके बाद दक्षिण का स्थान आता है । हिमालय की तराई भी गजराज का पसंदीदा क्षेत्रा रहा है।

    1959 में एशियाई हाथी को संकटग्रस्त वन्यजाति में शामिल किया गया था । इसी के मद्देनजर आठवीं पंचवर्षीय योजना में हाथी परियोजना के लिए अलग से वित्तीय प्रावधान रखे गए थे । सरकारी फाईलों के मुताबिक 1991-92 से देश में यह विशेष परियोजना लागू है । लेकिन दुर्भाग्य है कि इसी के बाद गजराज के सिर पर मौत का साया अधिक गहराता जा रहा है।

    उत्तर-पूर्वी राज्यों में, विशेषकर नगा लोग हाथियों को ‘बवाल’ समझते हैं । उनका डर है कि हाथी उनके लहलहाते धान के खेतों को तबाह कर डालता है और मौका मिलने पर उनके गांवों को भी नहीं छोड़ता है । इस लिए वे इसके शिकार की फिराक में रहते है। इस शिकार में एक तरफ तो वे ‘शत्रुा विजय’ का गर्व अनुभव करते हैं और दूसरी ओर उन्हें दावत के लिए प्रचुर मांस मिलता है । इन क्षेत्रों में हाथी की हड्डी, मद, दांत व अन्य अंगों  को ले कर कई चिकित्सीय व अंधविश्वासीय मान्यताएं हैं , जिनके कारण जनजाति के लोग हाथी को मार देते हैं । वैसे इन दिनों कतिपय बाहरी लोग इन आदिवासियों को छोेट-मोटे लालच में फंसा कर ऐसे शिकार करवा रहे हैं ।

    कर्नाटक के कोडगू और मैसूर जिले में 643 वर्ग किमी में फैला नागरहोल पार्क हाथियों का पसंदीदा आवास है । इसके  दक्षिण-पश्चिम में केरल की व्यानाद सेंचूरी है । पास में ही बांदीपुर(कर्नाटक) और मधुमलाई (तमिलनाडु) के घने जंगल  हैं । भारत में पाए जाने वाले हाथियों का 40 फीसदी यहां रहता है । पिछले कुछ सालों में यहां जंगल की कटाई बढ़ी है । हर साल बारिश से पहले इन जंगलों में हाथियों की मौत हो रही है । वन विभाग के अफसर लू या दूषित पानी को इसका कारण बता कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं । हकीकतन यहां हाथियों केा 100 लीटर पानी और 200 किलो पत्ते, पेड़ की छाल आदि की खुराक जुटाने के लिए हर रोज 18 घंटेां तक भटकना पड़ता है । गौरतलब है कि हाथी दिखने में भले ही भारीभरकम हैं, लेकिन उसका मिजाज नाजुक और संवेदनशील होता है । थेाड़ी थकान या भूख उसे तोड़ कर रख देती है । ऐसे में थके जानवर के प्राकृतिक घर यानि जंगल को जब नुकसान पहुचाया जाता है तो मनुष्य से उसकी भिड़ंत होती है।
    असल संकट हाथी की भूख है। कई-कई सदियों से यह हाथी अपनी जरूरत के अनुरूप अपना स्थान बदला करता था।

    गजराज के आवागमन के इन रास्तों को ‘‘एलीफेंट काॅरीडार’’ कहा गया । सन 1999 में भारत सरकार के वन तथा पर्यावरण मंत्रालय ने इन काॅरीडारों पर सर्वे भी करवाया था । उसमें पता चला था कि गजराज के प्राकृतिक काॅरीडार  से छेड़छाड़ के कारण वह व्याकुल है । हरिद्वार और ऋषिकेश के आसपास हाथियों के आवास हुआ करते थे । आधुनिकता की आंधी में जगल उजाड़ कर ऐसे होटल बने कि अब हाथी गंगा के पूर्व से पश्चिम नहीं जा पाते हैं्र। रामगंगा को पार करना उनके लिए असंभव हो गया है । अब वह बेबस हो कर सड़क या रेलवे ट्रैक पर चला जाता है और मारा जाता है । ओडिसा के हालात तो बहुत ही खराब हैं । हाथियों का पसंदीदा ‘‘ सिंपलीपल काॅरीडार’’ बोउला की क्रोमियम खदान की चपेट में आ गया । सतसोकिया काॅरीडोर को राष्ट्रीय राजमार्ग हड़प गया।

    ठीक ऐसे ही हालात उत्तर-पूर्वी राज्यों के भी हैं । यहां विकास के नाम पर हाथी के पारंपरिक भोजन-स्थलों का जम कर उजाड़ा गया और बेहाल हाथी जब आबादी में घुस आया तो लोगों के गुस्से का शिकार बना । हाथियों के एक अन्य प्रमुख आश्रय-स्थल असम में हाथी बेरोजगार हो गए है और उनके सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है। सन 2005 में सुप्रीम कोट के एक आदेश के बाद हाथियों से वजन ढुलाई का काम गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था। इसके बाद असम के कोई 1200 पालतू हाथी एक झटके में बेरोजगार हो गए। हाथी उत्तर-पूर्वी रज्यों के समाज का अभिन्न हिस्सा रहा है सदियों से ये हाथी जंगलों से लकड़ी के लठ्ठे ढोने का काम करते रहे हैं।  अदालती आदेश के बाद ये हाथी और उनके महावत लगभग भुखमरी की कगार पर हैं। असम में कहीं भी जाईए, सड़कों पर ये हाथी अब भीख मांगते दिखते हैं। सनद रहे कि एक हाथी की खुराक के लिए महीने भर में कम से कम दस हजार रूपए खर्च करना ही होते हैं। ऐसे में ‘‘हाथी पालना’’ अब रईसों के बस से भी बाहर है। असम के कुछ महावत अब अपने जानवरों को दिल पर पत्थर रख कर राजस्थान, दिल्ली जैसे राज्यों में बेच रहे हैं।

    दक्षिणी राज्यों में जंगल से सटे गांवों मे रहने वाले लोग वैसे तो हाथी की मौत को अपशकुन मानते हैं , लेकिन बिगड़ैल गजराज से अपने खेत या घर को बचाने के लिए वे बिजली के करंट या गहरी खाई खोदने को वे मजबूरी का नाम देते हैं । यहां किसानों का दर्द है कि ‘हाथी प्रोजेक्ट’ का इलाका होना उनके लिए त्रासदी बन गया है । यदि हाथी फसल को खराब कर दे तो उसका मुआवजा इतना कम होता है कि उसे पाने की भागदौड़ में इससे कहीं अधिक खर्चा हो जाता है । हाथी के पैरों के नीचे यदि इंसान कुचल कर मर जाए तो मुआवजा राशि 25 हजार मात्रा होती है । वैसे यहां दुखी ग्रामीणों की आड़ में कई ‘वीरप्पन’ हाथी दंात के लिए हाथियों के दुश्मन बने हुए है।

    उत्तरांचल के जिम कार्बेट पार्क में कुछ साल पहले तक 1300 से अधिक हाथी रहते थे । रामगंगा परियोजना के लिए रिजर्व जलाशय और फिर कुनाई चीला शक्ति नहर के लिए उस जंगल के बड़े हिस्से को उजाड़ा गया । फिर बांध से विस्थापितों ने अपने नए घर-खेतों के लिए 1,65,000 एकड़ वन क्षेत्रा को काट डाला । यहां हरियाली के नाम पर यूक्लेपिटस जैसे गैर-चारा पेड़ लगाए गए । ंजंगल कटने से हाथियों के लिए चारे-पानी का संकट खड़ा हुआ । भूख से बेहाल गजराज कई बार फसल और संपत्ति को नुकसान कर बैठते हैं।

    ऐसे ही भूखे हाथी बिहार के पलामू जिले से भाग कर छत्तीसगढ़ के सरगुजा व सटे हुए आंध्रप्रदेश के गंावों तक में उपद्रव करते रहते हैं । कई बार ऐसे बेकाबू हाथियों को जंगल में खदेड़ने के दौरान उन्हें मारना वन विभाग के कर्मचारियों की मजबूरी हो जाता है । उत्तरांचल में पिछले 25 सालों के दौरान कई हाथी ट्रेन से टकरा कर मारे गए हैं । कोई एक दर्जन हाथियों की मौत जंगल से गुजरती बिजली की लाईनों में टूटफूट के कारण होना सरकारी रिकार्ड में दर्ज है । ये वाकिये अनियोजित विकास के कारण प्राकृतिक संपदा को हो रहे नुकसान की बानगी हैं।

    नदी-तालाबों में शुद्ध पानी के लिए यदि मछलियों की मौजूदगी जरूरी है तो वनों के पर्यांवरण को बचाने के लिए वहां हाथी अत्यावश्यक हैं । मानव आबादी के विस्तार, हाथियों के प्राकृतिक वास में कमी, जंगलों की कटाई और बेशकीमती दांतों का लालच; कुछ ऐसे कारण हैं जिनके कारण हाथी को निर्ममता से मारा जा रहा है । यदि इस दिशा में गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो जंगलों का सर्वोच्च गौरव कहलाने वाले गजराज को सर्कस, चिडि़याघर या जुलूसों में भी देखना दुर्लभ हो जाएगा ।

    Keep Reading

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Dreams buried in the silence of hospitals

    अस्पतालों की खामोशी में दफन होते सपने

    Voyager's Discovery and the Cosmic Shivling

    वॉयेजर की खोज और ब्रह्मांडीय शिवलिंग

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    The Tricolour is a symbol of development, heritage, and India's pride and glory: CM Yogi.

    तिरंगा विकास, विरासत और भारत की आन-बान-शान का प्रतीकः सीएम योगी

    August 10, 2026
    'Take 5 lakhs, just save my brother...' Kanwariya swept away by the Ganga's strong current; brother stood on the bank, pleading desperately.

    ‘5 लाख ले लो, बस मेरे भाई को बचा लो…’ गंगा की तेज धार में बह गया कांवड़िया, किनारे खड़ा भाई गिड़गिड़ाता रहा

    August 10, 2026
    Haryana’s Sakshi Chaudhary shines with Virat Kohli’s support; lands a 'golden punch' at the Commonwealth Games.

    विराट कोहली की मदद से चमक उठी हरियाणा की बेटी साक्षी चौधरी, कॉमनवेल्थ में मारा गोल्डन पंच

    August 9, 2026
    Deputy Chief Minister joins youth in 'Tiranga Yatra' in Lucknow; calls for hoisting the Tricolour at every home.

    तिरंगा हमारी आन-बान-शान का प्रतीक, हर घर तिरंगा बना राष्ट्रप्रेम का जनआंदोलन: केशव प्रसाद मौर्य

    August 9, 2026

    चित्रकूट की रेल कनेक्टिविटी और मजबूत, दो एक्सप्रेस ट्रेनों का विलय

    August 8, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading