Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, May 9
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»आर्ट एंड कल्चर

    मीर सैय्यद अली: जिसने बादशाह अकबर को चित्रकारी सिखाई

    By January 8, 2020 आर्ट एंड कल्चर No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 3,818

    सुमन सिंह

    क्या बादशाह अकबर चित्रकारी भी करते थे ? वैसे इतना तो हम जानते हैं कि अकबर एक कलाप्रेमी बादशाह था, जिसके दरबार में विद्वानों और कलाकारों को प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त थाI बहरहाल मुग़ल शैली के पर्सियन चित्रकारों में एक मीर सैय्यद अली से संबंधित जानकारी के क्रम में यह बात भी सामने आती है। यहाँ यह जिक्र मिलता है कि मीर सैय्यद अली ने बचपन से अब्द अल-समद के साथ, भविष्य के सुल्तान यानी अकबर को चित्रांकन की कला सिखाई थी।

    बहरहाल यहाँ हम बात करते हैं इस फारसी इलस्ट्रेटर और लघु चित्रों के चित्रकार मीर सैय्यद अली (1510-1572 संभवतः) का, जिनका जन्म तबरीज़ नमक शहर में हुआ। तत्कालीन ईरान का यह ऐतिहासिक शहर तबरीज़ इन दिनों अज़रबैजान की राजधानी है। कला का ज्ञान इन्हें विरासत में मिला क्योंकि पिता मीर मुसव्विर स्वयं फ़ारसी शैली के कलाकार थे। इतिहासकार क़ाज़ी अहमद का मानना है कि बेटा अपने पिता से अधिक प्रतिभाशाली था, लेकिन पिता की शैली के प्रभाव ने उसके काम को प्रभावित किया। हालिया शोध से पता चला है कि मीर सैय्यद अली ने 1525 में निर्मित शाह तहमास के प्रसिद्ध शाहनामे के चित्रण में भाग लिया था। इसमें बने दो लघुचित्रों को सैय्यद अली की कृति समझी जाती है। इस दिशा में अगला कदम शाह तहमास के आदेश से 1539-43 में शाह किटाबेन के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों द्वारा बनाई गई निज़ामी (“पाँच कविताएँ”) की खमसा की पांडुलिपि के लिए भव्य चित्रण के निर्माण में उनकी भागीदारी थी।

    1540 तक आते आते शाह तहमास रूढ़िवादी होता चला गया, जिसके कारण जीवित प्राणियों के चित्रण की परंपरा उसे रास नहीं आने लगी। इस बदलाव का परिणाम यह हुआ कि उसके दरबार के कलाकारों ने अन्य बादशाहों के दरबार में शरण लेना ही श्रेयस्कर समझा। इन कलाकारों में से अधिकांश ने शाह तहमास के भतीजे, सुल्तान इब्राहिम मिर्जा के दरबार में शरण ली। इधर भारत में शेरशाह सूरी के साथ असफल लड़ाई के बाद मुगल सम्राट हुमायूं ने अपना सिंहासन खो दिया और 1543 में फारस पहुंचे, जहां शाह तहमास ने उनका न केवल गर्मजोशी से स्वागत किया, उच्चतम सुरक्षा भी प्रदान की। जब हुमायूँ तबरीज़ में रह रहा था, तब वह वहां के स्थानीय कलाकारों से परिचित हो गया। यही नहीं वह उनकी प्रतिभा से मंत्रमुग्ध सा होता चला गया। बाद में जब तबरीज़ के पुस्तकालय की तर्ज़ पर एक पुस्तकालय बनाने का विचार हुमायूँ को आया तब उसने वहां के दो कलाकारों को इसके लिए आमंत्रित किया। ये कलाकार थे अब्द अल-समद और मीर मुसव्विर। किन्तु किसी कारण से मीर मुसव्विर के लिए इस आमंत्रण को स्वीकारना संभव नहीं हो पाया, ऐसे में यह आमंत्रण उनके बेटे मीर सैय्यद अली के पास चली गई।

    विदित हो कि हुमायूँ भारतीय उपमहाद्वीप में अपना खोया हुआ राज्य हासिल करने से पहले काबुल में रहा। 1549 में मीर सैय्यद अली काबुल पहुंचे और 1555 तक वहां काम किया। इसके बाद जब 1555 में हुमायूँ की सेना ने सिकंदर शाह की सेना को एक लड़ाई में हरा दिया। तब दिल्ली का द्वार खुलाऔर उनके पिता हुमायूँ ने दुबारा राजगद्दी हासिल की। काबुल में रहते हुए इस कलाकार ने जो चित्र बनाये उसमें “एक युवा लेखक का चित्रण” उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना मानी जाती है। लॉस एंजिल्स संग्रहालय के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि यह कलाकार का आत्म चित्र हो सकता है।

    बादशाह हुमायूँ का उत्तराधिकारी अकबर था, जो अपने पिता की तुलना में चित्र लघु चित्रों का और भी अधिक भावुक प्रेमी था। मीर सैय्यद अली ने बचपन से अब्द अल-समद के साथ, भविष्य के सुल्तान को गर्मजोशी भरे संबंधों के बीच ड्राइंग की कला सिखाई थी। सैय्यद अली ने शाही अदालत के कला पहल की अगुवाई की, और उनके नेतृत्व में विश्व इतिहास की पुस्तक में सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक शुरू हुई जिसे आज हम “हमजानामा ” के नाम से जानते हैं। समझा जाता है कि यह पुस्तक अमीर मुहम्मद, जो पैगंबर मुहम्मद के चाचा थे, का इतिहास है। इस पुस्तक को चौदह खंडों में विभाजित किया गया था, जिनमें से प्रत्येक में एक सौ चित्र थे, यानी कुल – 1,400 लघुचित्र। हालांकि अब इनमें से लगभग 140 ही बचे हैं, जो दुनिया भर के विभिन्न संग्रहालयों और संग्रह में बिखरे हुए हैं।

    मीर सैय्यद अली फ़ारसी परंपरा और सुल्तान अकबर के अंत तक वफादार रहे, जहाँ उन्होंने उन कलाकारों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह के लिए काम किया जिन्होंने फ़ारसी चित्रकला के सिद्धांतों की वकालत की। उनकी रचनाओं में, उनके पिता मीर मुसव्विर और सुल्तान मुहम्मद के प्रभाव को देखा जा सकता है। उनके काम से उन्हें कई पुरस्कार और प्रशंसा मिली। अबू-फ़ज़ल द्वारा रचित अकबरनामा में भी इस कलाकार का जिक्र आता है। उसी दौर में अल फदल द्वारा बनायीं गयी उस युग के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों की सूची जिसमें सौ से अधिक कलाकारों को रखा गया में मीर सैय्यद अली को पहला स्थान दिया गया। उनकी सेवाओं से प्रसन्न होकर सम्राट हुमायूँ ने उन्हें “नादिर-उल-मुल्क” की मानद उपाधि दी थी।

    समझा जाता है कि “हमज़ानमा” के पूरा होने के सात साल बाद लगभग 1569 में, इस कलाकार ने मुगल दरबार छोड़ दिया, और एक श्रद्धालु मुस्लिम की तरह हजयात्रा पर मक्का चला गया। कुछ शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि हज के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई थी, जबकि अन्य का मानना है कि वह अकबर के दरबार में वापस लौट आए और 1580 में उनकी मृत्यु हो गई। यहाँ प्रस्तुत हैं गूगल के सौजन्य से विभिन्न संग्रहालयों में संग्रहित उनके कुछ मौजूदा चित्र- 

    (विवरण श्रोत : wikipidia) – singhh63.blogspot.com से साभार

    Keep Reading

    The suspense of the vote count has brought about major upsets!

    तमिलनाडु में सिनेमा-सियासत की नई लहर, विजय ने लिखी नई इबारत

    सत्य और साधना का आध्यात्मिक प्रेम, आज के दौर का दुर्लभ प्रेम

    Newsmakers 2026: A Celebration of Passion, A Toast to Achievements!

    न्यूज़मेकर्स 2026: जुनून का उत्सव, उपलब्धियों का मना जश्न!

    The Unbreakable Bond of Humanity: 'Ramadan'—An Oasis of Love Amidst an Era of Hate | Bargi Dam

    मानवता की अटूट डोर: नफरत के दौर में मोहब्बत का ‘रमजान’

    The Himalayas Chose Her: The Russian Girl Who Never Returned

    हिमालय ने चुना: रूसी लड़की जो कभी लौटी ही नहीं

    A Growing Crisis on the Path to Peace: Uncertainty Over Iran Ceasefire Amid Washington's Attacks on Trump

    बहरे- गूँगों को जगाने की कोशिश है ट्रम्प पर हमला

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Wedding Guests Fed a Powerful Laxative! The Bride's Father's Anger Takes a Heavy Toll on the Guests' Health.

    बारातियों को खिलाया जमालघोटा! दुल्हन के पिता का गुस्सा बारातियों की सेहत पर भारी पड़ा

    May 8, 2026
    The film connecting the new generation to Lord Krishna: ‘Krishnavataram Part 1: The Heart (Hridayam)’

    नई पीढ़ी को श्रीकृष्ण से जोड़ती है फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट 1 द हार्ट (हृदयम्)

    May 8, 2026

    ईरानी हमलों ने अमेरिकी ठिकानों में मचाई भारी तबाही: सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

    May 8, 2026
    The suspense of the vote count has brought about major upsets!

    तमिलनाडु में सिनेमा-सियासत की नई लहर, विजय ने लिखी नई इबारत

    May 8, 2026
    India's Swift Action Immediately After Ceasefire: Contacts Iran; Preparations Begin to Bring Back 16 Ships Stranded in the Strait of Hormuz

    ट्रंप का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ मात्र 48 घंटे में फेल! होर्मुज में 1600 जहाज अभी भी फंसे

    May 8, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading