व्यंग्य: अंशुमाली रस्तोगी
खबर गर्म है कि डोनाल्ड ट्रंप भारत नहीं ‘न्यू इंडिया’ में आ रहे हैं। आएं, उनका स्वागत है। न्यू इंडिया को देखें। समझें। यह भी जानें कि न्यू इंडिया में ‘विकास’ पिछले सत्तर साल के रिकॉर्ड तोड़ चुका है। यहां अब न तो कहीं गरीबी नजर आती है न गरीब; न बेरोजगार ही दिखाई पड़ते हैं। हर तरफ खुशहाली और समृद्धि की धारा बह रही है।न्यू इंडिया इतनी तेजी से ‘डिजिटल इंडिया’ में तब्दील होता जा रहा है कि कुछ पूछिए मत। हर हाथ में मोबाइल है। भिखारी हाथ फैलाकर भीख मांगने के बजाए सीधे पेटीएम करवाते हैं। शायद ही कोई पैसों का लेन-देन नोट से करता हो, वरना तो सब प्लास्टिक मनी ही उपयोग में लाते हैं। लोगों के वॉलेट में नोट अब मिलते ही कहां हैं, डिबेट या क्रेडीट कार्ड ही धरे रहते हैं। किसानों का पैसा उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। देश में भ्रष्टाचार नाम मात्र को रह गया है! सरकारी दफ्तर और अफसर सब सुधर चुके हैं। स्वच्छता का आलम देखकर उपेंद्र नाथ अश्क का एकांकी ‘तौलिया’ स्मरण हो आता है।
ट्रंप को यह जानकर हैरानी होगी कि न्यू इंडिया के लोगों ने सोच-विचार के लिए खुद के दिमाग का इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। यह जिम्मा उन्होंने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को दे दिया है। एआई ही अब उनका ‘मार्गदर्शक’ है। फलाने की शादी में कितने रुपए का लिफाफा देने से लेकर, ढिमकाने की जॉब का इंटरव्यू तक सब एआई ही तय करता है। और तो और लोग अपने जरूरी काम अब एलेक्सा को निर्देश देकर करवाने लगे हैं। एलेक्सा कभी उनका मन-पसंद गाना सुनाता है तो कभी चाय का आर्डर देता है।
न्यू इंडिया ने भारत को इतना पीछे छोड़ दिया है कि ट्रंप देखेंगे तो गदगद हुए बिना रह ही नहीं पाएंगे। राजनीति और राजनेता भी सत्तर साल पहले जैसे न रहे। सब बदल चुके हैं। रात-दिन जनता और सिर्फ जनता की सेवा में रत रहते हैं। चुनाव यहां अब जाति-धर्म के नाम पर नहीं बल्कि विकास के नाम पर लड़ा और जीता जाता है। अभी एक पार्टी ने दिल्ली को जैसे जीता, यह सुनकर ट्रंप खुश तो जरूर हुए होंगे। सच कहूं तो कभी-कभी मेरी आंखें भी इतना विकास और सुधार देखकर चौंधिया-सी जाती हैं।
ट्रंप इस अफवाह पर कतई कान न दें कि किसी राज्य में वहां की विकृतियों को ढांकने के लिए कोई दीवार-फिवार खींची जा रही है। न न ऐसा कुछ न है। इसमें मुझे पड़ोसी देश का हाथ होने का अंदेशा है। जैसा मैंने पहले ही कहा यह न्यू इंडिया है। बदला हुआ न्यू इंडिया। बदहाल भारत नहीं है। विकास ने तस्वीर को बदल दिया है।
जब ट्रंप भारत आ ही रहे हैं तो मैं चाहूंगा कि वे मेरे शहर (बरेली) भी आएं। मैं उन्हें उस स्थान पर ले जाना चाहूंगा जहां, साधना का खोया हुआ ‘झुमका’ लटकाया गया है। मुझे उम्मीद है, झुमका देखकर ट्रंप प्रसन्न अवश्य होंगे। यह झुमका भी दरअसल न्यू इंडिया की ही तो देन है। वरना, हमेशा हम बरेली वालो से यही पूछा जाता था कि साधना का गुम हुआ झुमका मिला कि नहीं! यों, मेरे शहर में एक पागलखाना भी है लेकिन वो भारत का हिस्सा है। सो, दिखाने का कोई मतलब नहीं।
मुझे विश्वास है, ट्रंप ‘न्यू इंडिया’ को देखकर विकास की पीठ जरूर थप-थपाएंगे!
– चिकोटी से साभार







