आज 24 फरवरी 2020 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल ट्रंम्प के भारत दौरे को लेकर एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि भारत को अमेरिका इससे कोई अपेक्षा नहीं रखना चाहिए, क्योंकि ट्रम्प के भारत आने की चर्चा शुरू होने के साथ ही विश्व समुदाय के लोगों द्वरा ऐसा अनुमान लगाये जाने लगा था कि इस मौके पर दोनों देशों के मध्य कई तरह के बड़े-बड़े समझौते होंगे लेकिन आज से दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यह स्प्ष्ट कर दिया गया था कि फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है लेकिन उनके द्वारा दिये गये एक बयान से ऐसा आभास होता है कि जहाँ तक आपसी व्यापार के मामले में को लेकर ऐसा अनुमान है कि भारत के साथ कुछ व्यापारिक समझौते हो सकते हैं।
ट्रंम्प के भारत आने की चर्चा शुरू होते ही ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि वे इस मौके पर दोनों देशों के बीच कई बड़े समझौते कर सकते हैं लेकिन अभी दो दिन पहले ही ट्रंप ने स्वमं यह बात स्प्ष्ट कर दिया था कि ऐसा कुछ भी नहीं होने जा रहा लेकिन मैं प्रधानमंत्री मोदी को काफी पसंद करता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ हम व्यापार समझौता कर सकते हैं, मगर बड़े समझौतों को मैं आगे आने वाले दिनों के लिए बचा कर रख रहा हूं।

वहीं पर एक राजनयिक सूत्रों के अनुसार ट्रंप के भारत यात्रा के दरमियान अमेरिका से 24 नौसेना हेलिकॉप्टर खरीदने के 2.6 अरब डॉलर के अनुबंध सहित कई अन्य सौदों पर समझौते हो सकते है। अहमदाबाद में उनके स्वागत में होने वाले एक विशेष आयोजन ‘नमस्ते ट्रंप’ जो एक तरह से प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी यात्रा के दौरान उनके स्वागत में किये गये ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम जैसा ही भारतीय संस्करण होगा जबकि ‘हाउडी मोदी’ में पचास हजार लोगों की भीड़ जुटी थी जोकि अमेरिका की जनसंख्या के अनुरूप बहुत अधिक थी, जबकि अहमदाबाद में आज एक लाख से भी ज्यादा लोगों ने ट्रम्प का वेलकम किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अहमदाबाद पहुंचने पर उनके स्वागत में एयरपोर्ट से लेकर स्टेडियम तक में 50 से 70 लाख से अधिक लोगों के एकत्र होने की बात स्वमं ट्रंप द्वारा स्वीकार की गयी है। असल में यहाँ भारत में होने वाले इस आयोजन का प्रभाव इसी वर्ष के नवम्बर माह में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिये अमेरिका में बसे भारतीय मूल के लगभग 40 लाख लोगों को अपनी ओर लुभाने के अतिरिक्त ट्रंप अमेरिकी वोटरों को भी उनके वैश्विक लोकप्रिय होंने जैसा संदेश भी देना चाहते हैं। वहीँ पर यदि हम इस पर भारत को मिलने वाले कूटनीतिक लाभ की बात करें तो इसमें मात्र इतना ही लाभ है कि मौजूदा समय देश में सीएए, एनआरसी एवं कश्मीर को लेकर दुनिया भर में जहां-जहां भी बहुत कड़वी बातें हो रही हो वहां पर इस बात का प्रभाव अवश्य पड़ेगा कि संसार के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र का मुखिया जब स्वयं ही इन नीतियों के पक्ष में खड़े है तो भारत के विरुद्ध होने वाली सभी बातें गौण हो जाती है जब हम अपने देश की स्थिती को आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो हमारा देश वर्ष 2009 के बाद से सबसे कमजोर विकास दर का सामना करता चला आ रहा है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे से उन विदेशी निवेशकों के मध्य भी एक सकारात्मक सन्देश जायेगा जो लोग अभी तक भारतीय बाजार को लेकर उहापोह की स्थिति का सामना कर रहे थे।
खैर जो भी हो ट्रंम्प के इस दौरे को लेकर देश के विपक्षी दलें जिस तरह की अंदेशा जाहिर कर रहे हैं, उसमें यह है कि किसी एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के लिए देश में रैली का आयोजन करना कहां तक उचित होगा? और दूसरी बात यह है कि किसी अन्य देश के राष्ट्राध्यक्ष को इतनी तवज्जो देना क्या दुनिया के अन्य देशों से हमारे सबंधों में इसका प्रतिकूल असर नहीं होगा?
- प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







