उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र से कहा: ब्लू व्हेल गेम पर अंकुश के लिये विशेषज्ञ समिति गठित करे

0
524

नयी दिल्ली,13 अक्तूबर: उच्चतम न्यायालय ने आज सरकार से कहा कि वह ब्लू व्हेल चैलेन्ज जैसे वर्चुअल दुस्साहस वाले खेल अवरूद्ध करने के लिये विशेषज्ञों की समिति गठित करे। इस खेल की वजह से कथित रूप से आत्महत्या की अनेक घटनायें हुयी हैं।
शीर्ष अदालत ने साइबर दुनिया में उपलब्ध चोकिंग गेम , साल्ट एंड आइस चैलेन्ज , फायर चैलेन्ज , कटिंग चैलेन्ज , आईबाल चैलेन्ज और ह्यूमन एम्ब््रााइडरी गेम जैसे हिंसक और जीवन को खतरा पैदा करने वाले खेलों को फायरवाल (अवरूद्ध) करने के लिये दायर याचिका पर सरकार से जवाब भी मांगा है।
फायरवाल एक ऐसी प्रणाली है जो निजी नेटवर्क की सामग्री तक अनधिकृत पहुंच को नियंत्रित करती है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस तरह की फायरवाल तैयार करने के लिये विशेषज्ञों की समिति गठित करने का निर्देश दिया। न्यायालय इस मामले में अब 27 अक्तूबर को आगे विचार करेगा।
इस बीच, पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को इसी तरह की याचिकाओं पर आगे कार्यवाही करने से रोक दिया है।
यह याचिका वकील और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहा कलिता ने दायर की है। याचिका में इंटरनेट सर्विस प्रदाताओं, नेटवर्क सर्विस प्रदाताओं, वेब होस्टिंग सेवा प्रदाताओं और साइबर कैफे आदि को सावधानी बरतने और सभी कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वालों को वर्चुअल डिजिटल गेम्स की व्यवस्था करने, उन्हें दिखाने और साझा करने से रोकने के लिये उचित कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है क्योकि ये बहुत ही नुकसानदेह और जीवन को खतरा पहुंचाने वाले हैं।
कलिता ने सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि भारत में कार्यक्रमों की छानबीन करने वाली सेवाओं में प्रत्येक केबल लैंडिंग स्टेशन में फायरवाल जैसी व्यवस्था की जाये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here