बेवजह मंदी की अफवाह

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 वायरल इशू :

बड़ा शोर है कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते आटो सेक्टर में मंदी है। साढ़े तीन लाख नौकरियाँ चली गयी हैं । सरकार को सुधार पैकेज देना चाहिये, जीएसटी हटाना चाहिये, आदि – आदि । मेरा मानना है कि कोई भी सरकार ऐसी मंदी जानबूझकर नही करती। सेक्टर की परिस्थितियों पर काफी कुछ निर्भर करता है ।
देखा जाय तो कारें सामान्य तौर पर विलासिता की वस्तु हैं जो अमीरों के लिये अधिक उपयुक्त होती हैं । सर्वाधिक उपयोग भी अमीर व्यक्ति ही करते हैं । नव धनाढ्यों के पास भी अब दो से तीन कारें अक्सर दिख जाती हैं। प्रदूषण का एक बड़ा कारण ये कारें भी हैं, जिसे एनजीटी, केजरीवाल या सुप्रीमकोर्ट चाहकर भी नही रोक पा रहे।

किसी गरीब के वश का नही है कि न्यूनतम छः लाख रूपये वाली सस्ती कार भी खरीद सके । खरीद भी ले किसी तरह तो उसका प्रतिवर्ष रखरखाव, भारी भरकम बीमा राशि, और ऊपर से 73 रूपये के पेट्रोल में 10 -12 किमी का सफर करना उसकी औकात से बाहर ही रहेगा । अतः गरीब नही खरीद पायेगा तो आबादी के अनुसार बिक्री नही बढ़ेगी और अमीर की भी जरूरत व खरीदारी की एक सीमा है । इसलिये भी बिक्री सीमित होना लाजिमी है । ऊपर से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्याएं तमाम संसाधन बढ़ने के बावजूद कम पड़ते ही जा रहे हैं । कारों की बिक्री घटने के ये कारण सभी समझ सकते हैं ।

अब रही सरकार की बात, तो सारे प्रोत्साहन पहले जैसे अब भी लागू हैं। सरकारी कोई कटौती नही कर रही। क्योंकि उसकी भी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा आटो सेक्टर से आता है । सरकार द्वारा 28%जीएसटी हटाने से भी कोई बड़ा फर्क नही पड़ने वाला, क्योंकि मलाई खाने वाले बिचौलियों के चलते उपभोक्ता के मूल्य में कोई बड़ी राहत नही मिलेगी । जीएसटी घटने सरकार को राजस्व का नुकसान होगा। इसी कमाई से सरकार जनता के लिये सुविधाएं जुटाती है।

कल मारुति सुजुकी के चेयरमैन ने भी ये बात कहा कि इसी जीएसटी रेट पर पहले गाड़ियाँ खूब बिकी हैं इसलिये अब जीएसटी को दोषी नही ठहराया जा सकता । यह बात एकदम सच है।

अब आते हैं वास्तविक कारण पर। तमाम आलोचना व कटाक्ष के बीच आज एक मित्र की पोस्ट पर इस संबंध में जो विवेचन पढ़ा , वह प्रभावित करने वाला है । उसका लब्बोलुआब भी देख लीजिये। एक एमजी हेक्टर नाम से कार है जिसकी बुकिंग कंपनी ने बंद कर दी है क्योंकि इतनी ज्यादा बुकिंग हो चुकी है कि कार की डिलीवरी 8 महीने बाद मिलेगी इसका अर्थ यह है कि बाजार में कारों के ग्राहक हैं कारों की डिमांड है केवल बढ़िया माल की डिमांड है भारतीय कंपनियां बिना कारों में सुधार के बिना नए फीचर के अपनी कारें बेच रही थी बढ़िया माल बनाएंगे बेचेंगे तो जरूर बिकेगा कारों की बिक्री कुल 28 पर्सेंट तक घटी है बिक्री बंद नहीं हुई है । यह कारें पर्यावरण के नियम bs4 के तहत इंजन वाली है अब अगले साल से पर्यावरण के नियम के अनुसार बीएस 6 इंजन वाली कारें आनी है । लोग उन्हीं कारों के इंतजार में है ।

अतः बेवजह मंदी की अफवाह फैलाकर सरकार व उद्योगजगत को निरुत्साहित न करें । समय व व्यवस्था को हमेशा परिवर्तन की दरकार होती है । समयानुसार सकारात्मक रवैया स्वयं परिस्थितियों में बदलाव ला देता है । सरकार व उद्योग दोनो ही इस मुद्दे पर गम्भीरता से कार्य कर रहे हैं ।

  • अरविन्द कुमार ‘साहू’

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