बजट में सभी तबकों का ध्यान

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राकेश कुमार मिश्र
देश की प्रथम पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विगत 5 जुलाई को मोदी 2.0 कार्यकाल का पहला पूर्णकालिक बजट पेश किया जिसे नये कलेवर में लाल कपड़े में रखा गया तथा इसे बही खाता कहा गया। माननीय वित्त मंत्री ने जो बही खाता देश के समक्ष रखा उसमें समाज के सभी तबकों का किसी न किसी रूप में ध्यान रखा गया। इस तरह इस बही खाता को सर्व समावेशी कहना गलत न होगा। नई सरकार के गठन के तत्काल बाद पेश इस बजट में वित्त मंत्री ने पूर्व सरकार के कार्यकाल की उपलब्धियां बताने के साथ साथ भविष्य की कार्ययोजना एवं दृष्टि पर भी व्यापक प्रकाश डाला। अगले दस वर्षों में नये भारत के निर्माण हेतु अधोसंरचना का आधुनिकीकरण एवं विकास, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, किसानों की आय में वृद्धि, युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार के भरपूर अवसर, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास एवं गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद एवं भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस, अंतरिक्ष कार्यक्रम में और तेजी तथा निरंतर सुधारों को लागू करते हुए भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनोमी बनाने की बात कही गई। इस प्रकार माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का भाषण आंकड़ों में उलझे बही खाते से बढ़कर सरकार का व्यापक दृष्टि पत्र कहा जाना अधिक उपयुक्त होगा।
माननीय वित्त मंत्री ने बजट में अनेक स्वागत योग्य एवं उल्लेखनीय कदम उठाये हैं। अगले दस वर्षों में सौ करोड़ का निवेश अधोसंरचना के विकास पर किए जाने से निश्चित रूप में देश की प्रगति को गति मिलेगी। 10000 किसान उत्पादक संघों के बनाने से किसानों को फसल का उचित मूल्य दिलाने में मदद होगी। मछली पालन, मुर्गी पालन आदि को कृषि के दायरे में शामिल कर समुचित मदद एवं प्रोत्साहन का कदम भी सराहनीय है। सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योगों को विशेष प्रोत्साहन की नीति भी रोजगार अवसरों में वृद्धि की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस क्षेत्र के लिए 350 करोड़ का प्राविधान ब्याज दरों में छूट के लिये रखा जाना उचित एवं स्वागत योग्य है।
रेलवे के विकास एवं आधुनिकीकरण के लिए पीपीपी माडल अपनाकर निजी क्षेत्र का सहयोग समय की मांग के अनुरूप है। सार्वजनिक बैंकों के सहायतार्थ 70000 करोड़ रुपये की मदद से इनकी समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी। दलहन के क्षेत्र में लगभग आत्मनिर्भरता की प्राप्ति के बाद तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर जोर भी समय की मांग के अनुरूप है।
वित्त मंत्री ने अपने अभिभाषण में सडक निर्माण, नदियों की सफाई, बन्दरगाहों के विकास, उज्जवला योजना, कौशल विकास, उद्यमिता विकास, मेक इन इन्डिया जैसे पूर्ववर्ती कार्यक्रमों को और गति प्रदान करने पर जोर देकर अपनी  पूर्व सरकार के कार्यक्रमों की उपादेयता एवं महत्व को ही रेखांकित किया है। नई शिक्षा नीति लागू करने तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देते हुए नेशनल रिसर्च फाउन्डेशन के गठन की घोषणा स्वागत योग्य कदम है। जरूरत इस बात की होगी कि इसे अमलीजामा पहनाने तथा लागू करने में पूरी ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता का परिचय दिया जाय।
पारदर्शिता को बढ़ावा देने तथा कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए एक वर्ष में खाते से एक करोड़ रुपये से अधिक की निकासी पर 2 प्रतिशत टीडीएस लगाने का प्रस्ताव भी उचित है बशर्ते यह सुनिश्चित किया जाय कि इससे बचने का अन्य कोई वैकल्पिक तरीका लोग न निकाल लें। निगम कर की दर 25 प्रतिशत के दायरे में उन सभी उद्यमों को लाना जिनका वार्षिक टर्न ओवर 400 करोड़ रुपये तक है, अपने पूर्व वित्त मंत्री द्वारा किए गए वादे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे 99.3 प्रतिशत कम्पनियां लाभान्वित होंगी।
स्टार्ट अप के लिए ऐंजल टैक्स की समाप्ति तथा आयकर जाँच में छूट देकर इनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया है। वित्त मंत्री ने ईमानदार करदाताओं की सराहना तो की परंतु इनके कर भार को कम करने एवं कर दरों को तर्कसंगत बनाने का जिक्र करना भी मुनासिब नहीं समझा। अंतरिम बजट में पाँच लाख ऱुपये तक सालाना आय वालों को आय कर से छूट की दुहाई देकर इस दिशा में अन्य कोई कदम उठाने की जरूरत न होने की बात कही।
45 लाख तक के मकानों की खरीद पर ब्याज भुगतान में अतिरिक्त 1.5 लाख की छूट मध्यम वर्ग को राहत प्रदान करने वाला कदम है तथा सरकार की सबको आवास की नीति के अनुरूप भी है। इसी तरह पर्यावरण संरक्षण के लिए इलैक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 1.5 लाख की छूट तथा जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया जाना तर्कसंगत एवं सराहनीय है परन्तु इनका लाभ सभी मध्यम आय वर्ग करदाताओं को नहीं मिलेगा।
माननीय वित्त मंत्री ने 2-5 करोड़ की वार्षिक आय पर तीन प्रतिशत तथा 5 करोड़ से अधिक वार्षिक आय पर सात प्रतिशत अतिरिक्त कर का भी प्रस्ताव रखा जिसे प्रगतिशील करारोपण एवं गरीबों के पक्ष में संसाधनों के हस्तांतरण के आधार पर सही कहा जा सकता है लेकिन मेरा यह सुनिश्चित मत है कि उच्च दरों से करारोपण कर वंचन को बढ़ावा देकर राष्ट्र की प्रगति में अवरोध उत्पन्न करता है। पेट्रोल एवं डीजल पर शुल्क वृद्धि को भी किसी सूरत में सराहा नहीं जा सकता क्योंकि इसका भार प्रत्यक्ष रुप से सामान्य उपभोक्ता पर पड़ेगा। यह महत्वपूर्ण है कि 2014 के बाद से सरकार पेट्रोलियम पदार्थ पर शुल्क में ढाई से तीन गुना वृद्धि कर चुकी है जिसके कारण कच्चे तेल की गिरती कीमतों का अपेक्षित लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच सका है।
उपरोक्त कमियों के बाद भी यह कहा जा सकता है कि सरकार का पहला बजट इकोनोमी को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध दिखता है। आठ प्रतिशत की संवृद्धि दर हासिल करने तथा निर्यातों में वृद्धि लाने के लक्ष्य महत्वपूर्ण हैं तथा राजकोषीय घाटे को भी 2020-21 तक जीडीपी के तीन प्रतिशत तक लाने का संकल्प दोहराया गया है। कहना न होगा कि माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने अपने पहले प्रयास में अपने बही खाता बनाने के  काम को कुशलतापूर्वक अंजाम दिया है।
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