बजट चूं-चूं का मुरब्बा ही साबित हुआ!

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आपकी बात फेसबुक के साथ: अंशुमाली रस्तोगी
इस बजट को बजट न कहिए बल्कि बजट के नाम पर ‘जुमलेबाजी’ कहना ज्यादा उचित होगा। 2 घण्टे 40 मिनट के बजट में एक भी ऐसी बात नहीं कही गई, जिससे सुनकर लगा हो कि यह आम जनता का बजट है। उस जनता का जिसके नाम पर 2014 और 2019 में वोट मांगे गए थे। तरह-तरह के ख्वाब दिखाए गए थे। विकास के नाम पर जितने जुमले गढ़े जा सकते थे, सब गढ़े गए। फिर भी, बजट चूं-चूं का मुरब्बा ही साबित हुआ।
2024 तक पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था को बनाना भी कोरा जुमला ही है। जनाब प्रधानमंत्री ये कैसे करेंगे, इसका जवाब उनके पास नहीं। जुमलों के नाम पर बल्लियों उछलने वाले भक्त बताएं, अगर उन्हें बजट समझ आ गया हो, कि किसानों को योजनाओं के नाम पर जो सब्जबाग दिखाए गए हैं, वो पूरे कैसे होंगे? वित्तमंत्री कह रही हैं कि हमने किसानों के लिए ये भी किया और वो भी किया तिस पर भी किसान आत्महत्या करने को मजबूर क्यों है? किसान गरीब क्यों है? किसान आज भी साहूकारों का कर्जदार क्यों है? अगर सरकार उसे लाभ दे रही है तो वो मिलता हुआ दिख क्यों नहीं रहा ?
सुना है सरकार एलआईसी में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचेगी! बहुत खूब! बेचे जरूर बेचे। जब सरकार से बड़ी चीजें संभल नहीं पा रहीं तो उन्हें बेचने में लग जाती है। एयर इंडिया का जो हाल है, रेलवे का जो हाल है, किसी से छिपा नहीं। उसी क्रम में अब एलआईसी है। यानी, जनता की बचत की गाढ़ी कमाई कभी भी खतरे में पड़ सकती है।
सरकार मान लीजिए, आपसे न देश संभल पा रहा है न अर्थव्यवस्था।

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