“वह झूठा है” से लेकर “अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर” तक: असरानी की हंसी और सच्चाई का सफर
मुंबई, 21 अक्टूबर 2025: बॉलीवुड को एक अपूरणीय क्षति हुई है। मशहूर हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी, जिन्हें दुनिया प्यार से असरानी कहती थी, का आज दोपहर करीब 3 बजे मुंबई के आरोग्य निधि अस्पताल में निधन हो गया। वे 84 वर्ष के थे और लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे। निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, खासकर दिवाली के इस पावन पर्व पर जब असरानी ने खुद सोशल मीडिया पर सबको बधाई दी थी। उनका अंतिम संस्कार शाम को ही सांताक्रूज के शांतिनगर श्मशान घाट में कर दिया गया।
दिवाली के इस पावन पर्व पर जब असरानी ने खुद सोशल मीडिया पर सबको बधाई दी थी
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को गुजरात के जयपुर में हुआ था। उन्होंने अपने पांच दशक लंबे करियर में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी पहचान बनी हास्य के उस अनोखे अंदाज से, जो दर्शकों को हंसते-हंसते लोटपोट कर देता था। 1975 में रिलीज हुई रमेश सिप्पी की कालजयी फिल्म शोले में उनका जेलर का किरदार अमर हो गया। “हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं…” – यह डायलॉग तो हर पीढ़ी का फेवरेट है। असरानी ने इस भूमिका में ब्रिटिश जेलर के अंग्रेजी अंदाज को इतनी बारीकी से निभाया कि दर्शक आज भी उनकी नकल करते हैं। जेल में कैदियों के साथ उनकी शरारतें, आंखें चुराना और सलामी ठोकना – सब कुछ इतना जीवंत था कि फिल्म के डायलॉग आज भी मीम्स और रील्स में जीवित हैं।

RPI: 1 जनवरी 1941 – 20 अक्टूबर 2025
लेकिन असरानी सिर्फ हास्य के बादशाह ही नहीं थे; वे गंभीर भूमिकाओं में भी उतने ही प्रभावशाली थे। 1973 की हृषिकेश मुखर्जी निर्देशित नमक हराम में उनका रोल इसका जीता-जागता उदाहरण है। अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना अभिनीत इस फिल्म में असरानी ने एक मजेदार लेकिन सच्चाई पर कायम रहने वाले दोस्त का किरदार निभाया। फिल्म के एक यादगार सीन में वे एक चुनावी रैली में किशोर कुमार का सदाबहार गाना “वह झूठा है, वोट न उसको देना” गाते हुए नजर आते हैं। यह गाना मूल रूप से 1962 की फिल्म बॉम्बे टाकीज से लिया गया था, लेकिन असरानी के अभिनय ने इसे नई जान फूंक दी। उनका यह रोल आज भी प्रासंगिक है, खासकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के माहौल में। जहां वादों की भरमार है और वोटरों को ‘झूठे’ उम्मीदवारों से सावधान रहने की जरूरत, वहां असरानी का यह डायलॉग और गाना बिलकुल फिट बैठता है – “वह झूठा है, मतलब झूठ ही तो बोलता है!”। सोशल मीडिया पर फैन्स पहले ही उनके इस क्लिप को शेयर कर रहे हैं, कहते हुए कि असरानी की हंसी अब भी सच्चाई का आईना दिखा रही है।
असरानी ने चुपके चुपके, छोटी सी बात, अभिमान, मिली और हाल ही में भूल भुलैया 3 जैसी फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी। वे कभी चश्मे के पीछे छिपी शरारतों से हंसाते, तो कभी भावुक सीन से रुला देते। उनकी पत्नी करुणा करजावाला भी अभिनेत्री हैं, और दंपति ने साथ मिलकर कई नाटकों में काम किया। निधन की खबर पर अमिताभ बच्चन ने ट्वीट किया, “असरानी जी की कमी कभी पूरी नहीं होगी। उनकी हंसी हमेशा गूंजती रहेगी।” वहीं, अनुपम खेर ने कहा, “हास्य का सूरज डूब गया, लेकिन उनकी रोशनी बाकी रहेगी।”
असरानी के निधन ने न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि पूरे देश को गमगीन कर दिया है। वे नेटवर्थ के लिहाज से भी सादगी के प्रतीक थे – अनुमानित 20-25 करोड़ की संपत्ति के बावजूद, वे हमेशा सादा जीवन जीते रहे। झारखंड के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी शोक व्यक्त किया, “उनकी हास्य प्रतिभा भारतीय सिनेमा का सुनहरा युग थी।” असरानी साहब, आपकी यादें हमारी दिवाली को हमेशा रोशन रखेंगी।







