आदित्यनाथ द्वारा गठित एसआईटी की जांच पर किसी को भरोसा नहीं है और सीबीआई की जांच सिर्फ देश और प्रदेश की जनता को गुमराह करने का साधन मात्र है। ये बातें हाथरस की घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने रविवार को कही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के कल हाथरस के पीड़ित परिजनों से मुलाकात के दौरान उनकी जो मुख्य मांग है कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाए, ऐसे में कांग्रेस पार्टी उनके द्वारा उठाये गये पांचों सवालों पर पूरी मजबूती के साथ खड़ी है और सम्पूर्ण घटना की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच कराये जाने की मांग करती है।
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा‘मोना’ ने कहा कि हाथरस की दलित बेटी के साथ हुई दुःखद घटना और बेटी को न्याय दिलाने के लिए मीडिया की जो सकारात्मक भूमिका रही है। वह प्रशंसनीय है।
उन्होंने हाथरस की दलित बेटी के साथ हुए अत्याचार का पूरा विवरण देते हुए स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाये। जब उस बेटी के परिजन शव मांगने के लिए दिल्ली में सर गंगाराम अस्पताल में प्रशासन से गुहार लगा रहे थे और पुलिस ने शव को गायब करके रात्रि में 2.30 बजे जला दिया तथा पीड़िता के गांव में अघोषित कर्फ्यू लगा दिया।
उन्होंने कहा कि कल जब राहुल जी और प्रियंका जी पीड़ित परिजनों से मुलाकात करने गये तो उन्होंने पांच मांगें रखीं- जिसमें पहली मांग इस घटना की न्यायिक जांच कराई जाए। दूसरी मांग हाथरस के डीएम को बर्खास्त किया जाय, तीसरी मांग पीड़ित परिवार यह जानना चाहता है कि बिना परिवार की अनुमति के उनकी बेटी का शव रात्रि में क्यों जलाया गया?
चौथा सवाल बार-बार पीड़ित परिवार को क्यों डराया धमकाया जा रहा है। पांचवां और अंतिम सवाल कि मृतका के पिता ने कहा है कि उन्होने जो चिता जली है उससे वह फूल चुनकर लाये हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि यह फूल उनकी ही बेटी के हैं या किसी और की। इन पांचों सवालों का जवाब प्रदेश के मुख्यमंत्री को देना ही होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि उप्र में महिलाएं सुरक्षित नहीं है, जिस तरह यूपी महिला अपराधों में नम्बर एक है उससे स्पष्ट है कि उप्र जंगलराज में तब्दील हो गया है। उन्होने कहा कि हाथरस की बेटी न्याय के लिए गुहार लगा रही थी, इलाज के लिए विलख रही थी उसका परिवार न्याय के लिए सरकार से गुहार लगा रहा था पर निष्ठुर योगी सरकार उस बेटी को न्याय और चिकित्सा दे नहीं पायी उल्टे उस बेटी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले लेागों का दमन करना शुरू कर दिया।
योगी सरकार के अकर्मण्य प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी 20 दिनों बाद यह जान पाये कि देश का एक-एक नागरिक, महिलाएं हाथरस की बेटी के न्याय के लिए सड़क पर संघर्षरत हैं। प्रदेश सरकार जांच पर जांच और छोटी मोटी कार्रवाई करके जनता को गुमराह नहीं कर सकती।







