- भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रभूषण पांडेय ने कहा, हर कीमत पर सत्ता में बने रहने की आदी हो गयी है कांग्रेस
- इसे राष्ट्र की एकता में कोई दिलचस्पी नहीं, राष्ट्र को आगे बढ़ता देख कांग्रेस नेता कर रहे आपस में लड़ाने का प्रयास
कांग्रेस सुधरने वाली नहीं है। सत्य है कि इस संस्था का डीएनए ही दूषित है। इसका कारण है कि इसका स्थापना ही एक अंग्रेज ने किया था। यह बात दिगर है कि बाद में इससे महात्मा गांधी जैसे राष्ट्र निर्माता जुड़कर इसे नई दिशा देने की कोशिश की लेकिन वे भी ठीक नहीं कर पाये और जवाहर लाल नेहरू ने इसे पुन: हमेशा के लिए घरेलु पार्टी बना दी। आज भी कांग्रेस राष्ट्रवाद की सोच न रखकर फूट डालो, राज करो की नीति पर चल रही है। चाहे वह पाकिस्तान की भाषा बोलने की बात हो या भारत के ही लोगों को आपस में लड़ाने की बात हर जगह कांग्रेस की तुच्छ मानसिकता झलक जाती है। ये बातें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता चंद्रभूषण पांडेय ने गुरुवार को कही।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थापना अंग्रेजों को सुरक्षा प्रदान करने की नीयत से एओ ह्यूम ने की। इसके बाद इसमें राष्ट्रवादी लोग जुड़ते गये और उनके खिलाफ ही एक आंदोलन खड़ा होता चला गया। बाद के दिनों में गांधी जन नेता बन चुके थे और उस दौरान दूसरे बड़े जन नेता सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल थे। नेहरू अपनी जोड़-तोड़ से गांधी के निकट बने हुए थे और गांधी की आभा के सहारे कांग्रेस को जेबी संगठन बनाए रखने का प्रयास कर रहे थे। नेहरू ने कुटिल चालों से देश का विभाजन करवाया जो अंग्रेजों की भी इच्छा थी और नेहरू के हाथ में सत्ता अंतरण के लिए भी जरूरी थी। नेहरू के सामने असली समस्या जन नेता थे उन्होंने गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल को एक-एक कर निपटा दिया। अब जो कांग्रेस आजादी के बाद नेहरू के हाथ में आई वह ए ओ ह्यूम से लेकर माउंटबेटन तक के सपनों के साथ नेहरू के सपने को आगे बढ़ाने के लिए चल पड़ी।
उन्होंने कहा कि आज चाहे भगवान राम के मंदिर की बात हो। चाहे धारा 370 समाप्त होकर अखंड भारत के निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम की बात हो। सीएए के माध्यम से हिंदू,सिख, जैन, बौद्ध व ईसाइयों के उत्पीड़न से द्रवित मोदी सरकार उनके आंसू पोछने की कोशिश हो, कांग्रेस को यह सब अच्छा नहीं लग रहा है।
चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि देश में जैसे-जैसे राष्ट्रवाद की भावना जागृत होगी, वैसे-वैसे कांग्रेस के पैरों तले जमीन खिसकती नजर आएगी। इस कारण उसे राष्ट्र की मजबूती अच्छी नहीं लग रही है। प्रदेश में भी कांग्रेस उपद्व कराने के फिराक में कोशिश कर रही है, जो निश्चय ही देश की राजनीति के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को समझना होगा कि जनता जाग रही है। वह भाजपा का विरोध करें, लेकिन राष्ट्र के विरोध पर तो उतारू न हो जायं। आखिर सत्तालोभ में इतनी तड़फड़ाहट नहीं होनी चाहिए कि देश की अखंडता से ही समझौता करने लगे।







