निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान केस्को कानपुर का जब टैरिफ होगी अलग अलग तो केस्को की बिजली दर होगी सबसे ज्यादा: उपभोक्ता परिषद
लखनऊ, 9 जुलाई : कानपुर में केस्को (कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी लिमिटेड) की बिजली दर बढ़ोतरी की पहली सुनवाई में उपभोक्ताओं ने तीखा विरोध जताया। विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की मौजूदगी में हुई सुनवाई में केस्को के एमडी सैमुअल एन पाल ने प्रस्तुतीकरण दिया, लेकिन उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों में 45% प्रस्तावित बढ़ोतरी को असंवैधानिक करार देते हुए कमी की मांग की। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपये सरप्लस है, फिर भी दरें बढ़ाने का प्रस्ताव निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए है।
उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण पर भी करारा हमला बोला, खासकर दक्षिणांचल और पूर्वांचल के निजीकरण के प्रस्ताव को अवैध बताया। वर्मा ने आंकड़ों के साथ सिद्ध किया कि निजीकरण से केस्को के उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि बल्क सप्लाई टैरिफ (BST) में केस्को को सबसे महंगी बिजली (7.18 रुपये/यूनिट) मिलती है। निजीकरण के बाद अलग-अलग दरों से केस्को की बिजली सबसे महंगी होगी। परिषद ने निजीकरण प्रस्ताव खारिज करने की मांग की और कहा कि कोई ताकत इसे लागू नहीं कर सकती।
सुनवाई में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की खामियों, चीनी कंपोनेंट्स से रीडिंग में गड़बड़ी, और 1912 हेल्पलाइन की नाकामी पर भी सवाल उठे। वर्मा ने केस्को की नई वर्टिकल व्यवस्था को उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का सबब बताया और इसकी जांच की मांग की। साथ ही, बिजली चोरी से होने वाले 87 करोड़ रुपये सालाना नुकसान पर रोक लगाने की बात कही, जिससे दरों में कमी संभव हो। उपभोक्ताओं ने मल्टी-स्टोरी परिसरों में बिल डिटेल की कमी और छोटे दुकानदारों के लिए घरेलू टैरिफ की मांग भी उठाई।







