लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली निजीकरण की प्रक्रिया और पावर कॉरपोरेशन द्वारा नियुक्त ट्रांजैक्शन एडवाइजर ग्रांट थॉर्नटन की भूमिका पर कड़ा हमला बोला है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि ग्रांट थॉर्नटन, जिसे 25 मार्च 2025 को ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया था, 145 दिनों की निर्धारित टाइमलाइन में निजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहा। यह अवधि अब समाप्त हो चुकी है, और कंसल्टेंट न तो अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्त हो पाया और न ही निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सका।
श्री वर्मा ने आरोप लगाया कि ग्रांट थॉर्नटन की नियुक्ति असंवैधानिक थी और इसे अमेरिकी रेगुलेटर द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि पावर कॉरपोरेशन तत्काल ग्रांट थॉर्नटन को ब्लैक लिस्ट करे और निजीकरण का मसौदा रद्द करके सभी बिजली कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में संचालित करने की नई कार्ययोजना बनाए।
उपभोक्ता परिषद ने निजीकरण को उपभोक्ता और जनविरोधी करार देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार से भरी हुई है। श्री वर्मा ने चेतावनी दी कि अगर इस प्रक्रिया की जांच हुई तो कई बड़े अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले 9 महीनों से ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण के खिलाफ व्यापक आक्रोश और विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जो यह दर्शाता है कि सरकार का यह निर्णय पूरी तरह गलत साबित हुआ है।
उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि वह निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रद्द करे और बिजली कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में सुधार के साथ संचालित करने का संकल्प ले।







