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    Home»इंडिया

    चुनावी रणभेरी की उलटी गिनती शुरू

    ShagunBy ShagunDecember 27, 2021 इंडिया No Comments4 Mins Read
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    जी के चक्रवर्ती

    उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित पांच राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के राजनैतिक समर का बिगुल फूंका जा चुका है। बस इन्तजार है तो चुनावी तारीखों का ! यह सर्वथा अलग बात है कि आज तक हम में से किसी ने भी अपने क्षेत्र के प्रत्याशी को बिगुल फूंकते हुए नहीं देखा होगा लेकिन चूनावीं समर मे जो व्यक्ति हारता है, उसको कम-से-कम पांच वर्षो तक का सत्ता से दूर रह कर अज्ञातवास भोगना पड़ता है।

    आज विभिन्न पार्टियों के लोग चूनवीं मुद्दे के अन्वेषण में जोर-शोर से जुटे हुये हैं और हों भी क्यों नही अब राममंदिर जैसा कुछ धधकता हुआ मुद्दा जो उन्हें ढूंढे नही मिल रहा है लेकिन फिर भी कुछ दलों के लोग मुद्दे उछालने के करतब दिखाने में लगे हुये हैं, तो कोई निरन्तर बाहुबलीयों से संपर्क बनाये हुए हैं कि किस भी तरह से इस चूनवीं समर की हवाओं का रुख अपनी ओर किया जा सके।

    आज कहा जाय तो इस समय प्रत्येक प्रत्याशी की आकंठ इच्छा यही है कि एक बार पुनः सत्यवादी बनने के स्थान पर सत्तावादी बन कर सत्ता का मार्ग प्रसस्त कर सत्तासुख भोगा जाये। एक लम्बे समय से राजनीति दलों द्वारा सत्ता को हासिल करने के लिए छल-कपट, लोकलुभावन वादों के सहारे ही राजनीतिक लोग सत्ता हासिल करते चले आ रहें हैं।

    वैसे सही अर्थों में कहा जाये तो इस समय भाजपा की रीति-नीति से विपक्षीयों के खेमे में बहुत बेचैनी पैदा कर चुकी है और यह छटपटाहट उस समय और भी अधिक तीब्र हो जाती है जब भाजपा को कोई करारा जवाब देने का रास्ता किसी को सुझाई नहीं दे रहा है। यही भारतीय लोकतंत्र की खूबी है कि चुनावी समर में उतरने वाले दलों का विशेषकर दो प्रमुख पार्टिया एक ही नाव पर सवार उस सवारी की भांति है जो न तो नाव से कूद कर किनारे खड़ी हो सकती है और नही नाव की पतवार संभाल कर नाव को सही दिशा दे पा रही है सही कहा जाये तो एसी स्थिति के लिए वे स्वयं ही जिम्मेदार हैं।

    जहां तक मुस्लिम वोटरों की बात की जाये तो कांग्रेस और सपा ने मुस्लिमों वोटरों को खूब ठगा, हमेशा चुनावो के समय देश की जनता से किये जाने वाले वायदे आज तक कभी भी किसी पार्टी द्वारा पूरे नही किये गये लेकिन आज समय उस दौर से गुजर रहा है, जब देश की जनता पूर्व की अपेक्षा अधिक सतर्क और समझदार हो चुकी है और इस बात को जनता वाखूबी समझते हुये अभी बिल्कुल चुप है कि आगे आनेवाले समय मे हम इसका उत्तर देंगे और जब भविष्य में फिर से वही एक रट “शेर आया शेर आया” जैसी कथनी करनी को दोहराया जाने लगेगा लेकिन अब वह समय गुजर गया है अब ऐसा नही चलेगा।

    आज के समय मे होने वाले चुनाव को एक तरह से यदि हम धर्मयुद्ध की संज्ञा दें तो कोई अतिशेयोक्ति नही होगी क्योंकि इसके लिए भी एक आचार संहिता लागू होने के बावजूद इस समर में कई योद्धा अधर्म युद्ध पर भी उतारू हैं।

    इस परिदृश्य में आज चुनाव आयोग से चुनाव के पहले ही मीटिंग का आयोजन कर उनको पहले ही सब कुछ समझा दिये जाने वाली बातें सरासर गैर संविधानिक होने के कारण समझ से परे हैं। देश मे होने वाले चुनावों से पहले ही चुनाव आयोग को इस तरह से बुलावा कर पहले से ही सबकुछ तय करना यह तो उसी कहावत को चरिर्थात करने सदृश है कि “जिसकी लाठी उसी की भैंस” इस सम्पूर्ण चुनावीं समर क्षेत्र में धर्म और जातियों के ध्रुवीकरण एक संक्रामक के रूप में फैल चुका है।

    इस रोग का निराकरण भारतीय रसजनीति में एक यक्षप्रश्न जैसा अनुत्तरित है। इस चूनवीं महाभारत मे बहुतेरे भीष्म पितामह भी अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिये प्रयत्नशील हैं, किंतु दलगत हितों के कारण उन्होंने अपने मुंह पर टेप चिपका लिया हैं।

    Shagun

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