1 मार्च से दागी माननीयों की सुनवाई करेंगी 12 स्पेशल कोर्ट

0
335

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, सरकार शुरू करेगी प्रक्रिया

1 साल में होगी आरोपी विधायक-सांसदों की सुनवाई

1,581 सांसदों और विधायकों पर संगीन अपराध,13,500 मुकदमे दर्ज

नई दिल्ली, 14 दिसम्बर। यह खबर दागी सांसदों व विधायकों की बैचेनी बढ़ा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार की योजना को मंजरी दे दी, जिसमें कहा गया है कि दागी नेताओं पर लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई जायेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह स्पेशल कोर्ट 1 मार्च 2018 से सुनवाई शुरू करेंगी। गौरतलब है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि दागी सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे के लिए 12 विशेष अदालतों का गठन करेगी। वित्त मंत्रालय की ओर से इसके फंड को हरी झंडी दे दी गई है।

सरकार ने बताया कि गत आठ दिसंबर को वित्त मंत्रालय ने 7.80 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। संस्था एडीआर के मुताबिक, वर्ष 2014 के आम चुनाव के वक्त 1581 सांसद व विधायकों पर करीब 13500 आपराधिक मामले लंबित थे।

सुप्रीम कोर्ट का दबाव आया काम

1 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दागी सांसद और विधायकों के खिलाफ लंबित मुकदमों को एक वर्ष के भीतर निपटाने को देश हित में बताते हुए विशेष अदालतों का गठन करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में ही कहा था कि नेताओं पर दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए अदालतों के गठन की जरूरत है।

स्पेशल कोर्ट इसलिए जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के जज रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा ने कहा कि देश की 17,000 अदालतों में से हर एक के पास औसतन 4,200 केस हैं। ऐसे में नेताओं की सुनवाई मुश्किल काम है।

कानून की बात से इनकार

याचिकाकर्ताओं से कोर्ट ने यह भी कहा था कि आप सजा होने के बाद छह वर्ष तक चुनाव लडऩे पर रोक को लेकर बहस कर रहे हैं, लेकिन अदालतों में 20-20 वर्ष तक मामले लंबित रहते हैं। इस दौरान वे चार कार्यकाल पूरा कर लेते हैं। ऐसे में यदि उन्हें छह वर्ष या आजीवन चुनाव लडऩे से रोक भी दिया जाए तो इसका क्या मतलब है? याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 34 फीसदी सांसदों का आपराधिक रिकॉर्ड है।

इसलिए कोर्ट ने दिये निर्देश

न्याय की धीमी प्रक्रिया के चलते मामले के निपटारे तक दागी नेता लंबे समय तक अपने पदों पर बने रहते हैं।

आयोग भी सख्त: दोषी नेताओं के चुनाव पर लगे रोक, एक सीट से ही लडें: प्रत्याशी

बीते महीने ही चुनाव आयोग ने भी कहा था कि दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों पर हमेशा के लिए चुनाव लडऩे पर रोक लगनी चाहिए। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत से कहा कि राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाने के लिए एक कानून बनाए जाने की जरूरत है। एक अन्य मामले में भी सुप्रीम कोर्टमें सुनवाई हुई। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा एक उम्मीदवार को दो सीटों से चुनाव नहीं लडऩा चाहिए। आयोग ने कहा कि एक उम्मीदवार जब दो जगहों से जीतता है और बाद में एक सीट से इस्तीफा देता है, तो उस सीट पर दोबारा चुनाव कराना पड़ता और राज्य के खजाने पर अनावश्यक बोझ पड़ता है। सन 2004 और सन 2016 में इस बारे में प्रस्ताव दिया गया था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि वह इस मामले में अदालत का सहयोग करें। अदालत ने कहा कि वह तीन हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here