Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, June 27
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»खबर कोर्ट से

    समलैंगिकता अपराध है या नहीं, धारा 377 पर फैसला सुरक्षित

    ShagunBy ShagunJuly 17, 2018 खबर कोर्ट से No Comments3 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 550

    नई दिल्ली, 17 जुलाई 2018: देश की सर्वोच्च अदालत ने समलैंगिक संबंधों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान साफ किया कि अगर कोई कानून मौलिक अधिकारों का हनन करता है, तो अदालतें कानून बनाने, संशोधन करने या उसे रद्द करने के लिए बहुमत की सरकार का इंतजार नहीं कर सकतीं। सुप्रीम कोर्ट में इस कानून को लेकर बहस आज पूरी हो गई। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, हालांकि उसकी इस टिप्पणी से ऐसे संकेत मिलते हैं कि कोर्ट जल्द ही धारा 377 को रद्द कर सकता है।

    दरअसल सुप्रीम कोर्ट में ईसाई समुदाय की तरफ से पेश वकील वरिष्ठ वकील मनोज जॉर्ज ने समलैंगिक संबंधों का विरोध किया। जॉर्ज ने कहा कि सेक्स का मकसद सिर्फ बच्चा पैदा करने के लिए होता है और किसी तरह के समलैंगिक संबंध पूरी तरह अप्राकृतिक हैं। इसके साथ उन्होंने तर्क दिया कि धारा 377 में संशोधन करने या इसे बरकरार रखने के बारे में फैसला करना विधायिका का काम है।

    जॉर्ज की इस दलील पर कोर्ट ने कई सवाल उठाते हुए कहा कि समलैंगिक समुदाय के अधिकारों का भी सम्मान होना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ में शामिल जस्टिस आरएफ नरीमन ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर कोई कानून मूल अधिकारों के खिलाफ है, तो हम इसका इंतजार नहीं करेंगे कि बहुमत की सरकार इसे रद्द करे। हम जैसे ही आश्वस्त हो जाएंगे कि यह मूल अधिकारों के खिलाफ है तो हम ख़ुद फैसला लेंगे, सरकार पर नहीं छोड़ेंगे।

    नरीमन ने कहा कि अगर वेश्यावृति को कानूनन अनुमति दे दी जाती है तो उस काम में शामिल लोगों को स्वास्थ्य सेवा दी जा सकती हैं, लेकिन अगर चोरी-छिपे वेश्यावृति चलती रहे तो कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। वहीं इस दौरान मनोज जॉर्ज ने ‘लैंगिक रुझान’ शब्द का भी हवाला दिया और कहा कि नागरिकों के समता के अधिकार से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में प्रयुक्त ‘सेक्स’ शब्द को इंटरचेंजेबल के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।

    उन्होंने दलील दी कि लैंगिक रुझान सेक्स शब्द से अलग है, क्योंकि एलजीबीटीक्यू से इतर भी अनेक तरह के लैंगिक रुझान हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बने यौन संबंधों को भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत अपराध के दायरे से बाहर रखने के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इस पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं।

    आईपीसी की धारा 377 में ‘अप्राकृतिक यौन अपराध’ का जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि जो भी प्रकृति की व्यवस्था के उलट जाकर किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ सेक्स करता है तो उसे उम्र कैद या दस साल तक की कैद और जुर्माने की सजा हो सकती है। इससे पहले, समलैंगिकता से जुड़ी धारा 377 की संवैधानिक वैधता पर पिछली सुनवाई के दौरान सरकार ने यह मामला शीर्ष अदालत के विवेक पर छोड़ दिया था। सरकार ने कहा था कि अदालत को समलैंगिक विवाह, गोद लेना और दूसरे नागरिक अधिकारों पर विचार नहीं करना चाहिए। केंद्र के इस रुख का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा था कि वह इन मुद्दों पर विचार नहीं कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ परस्पर सहमति से दो वयस्कों के यौन रिश्तों के संबंध में कानून की वैधता परखेगा।

    Shagun

    Keep Reading

    सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की क्लास 8 की किताब पर लगाया पूर्ण प्रतिबंध!

    युवाओं के लिए सावधानी का सबक है ‘विश्वास से पहले सतर्कता’

    The judge's scathing rebuke to the bank manager's arbitrariness: "Under which law was the account frozen?"

    बैंक मैनेजर की मनमानी पर जज की धुआंधार फटकार: किस कानून से फ्रीज किया अकाउंट?

    Sana Raees Khan’s Decisive Victory in Protecting Vivek Oberoi’s Personality Rights

    डिजिटल दुनिया में पहचान की जीत! विवेक ओबेरॉय को दिल्ली हाईकोर्ट से मिली पर्सनैलिटी राइट्स की मजबूत सुरक्षा

    Justice after 23 years in Azamgarh: Retired inspector sentenced to life imprisonment and fined Rs 1.05 lakh in custodial death case!

    आजमगढ़ में युवक को 23 साल बाद मिला इंसाफ: कस्टोडियल डेथ केस में रिटायर्ड इंस्पेक्टर को उम्रकैद, जुर्माना 1.05 लाख!

    Unnao rape case: Kuldeep Singh Sengar suffers a major setback from the Supreme Court!

    उन्नाव रेप केस: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    The end of a golden chapter of simplicity, impartiality, and socialism

    सादगी, निष्पक्षता और समाजवाद के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत

    June 26, 2026
    Korean companies eye YEIDA: Plans underway to develop a "Korean City"

    कोरियन कंपनियों की नजर YEIDA पर: “कोरियन सिटी” बनने की तैयारी

    June 26, 2026
    Young Man Survives Despite a Ruptured Aorta and Multiple Fractures; Doctors Perform a Medical Miracle

    मौत को मात दी: फटी एओर्टा और दर्जनों फ्रैक्चर के बावजूद जिंदा बचा मर्चेंट नेवी अधिकारी

    June 26, 2026
    Pledge to protect the Constitution: CM Yogi recalls the fight for democracy on 'Constitution Murder Day'

    संविधान की रक्षा का संकल्प: सीएम योगी ने ‘संविधान हत्या दिवस’ पर याद की लोकतंत्र की लड़ाई

    June 26, 2026
    Kejriwal’s scathing attack upon reaching Ayodhya: What secret does Champat Rai know that even the PM is helpless?

    अयोध्या पहुंचे केजरीवाल का तीखा हमला: चंपत राय को क्या राज पता कि पीएम भी मजबूर?

    June 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading