नई दिल्ली, 10 अप्रैल। हरियाणा की एक विधवा की बीस वर्षीय बेटी का राजस्थान के कोटा स्थित कोचिंग सेंटर से 16 जुलाई,2016 में अपहरण हो चुका है। उनकी बेटी मेडिकल में दाखिले की तैयारी कर रही थी,जिसे ढूंढ़ने के लिए उसकी मां ने पिछले दो सालों में हर मुमकिन कोशिश की है। अब उस महिला की मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने केंद्रीय गृह मंत्रालय,हरियाणा और राजस्थान की पुलिस से इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट और जवाब मांगा है।
हरियाणा की रहने वाली पीड़ित महिला ओमी हुड्डा ने राजस्थान ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और दोनों राज्यों की पुलिस के दरवाजे पर लगातार विफलता मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। ओमी हुड्डा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (व्यक्ति को पेश करना) के तहत अपने वकील प्रदीप गुप्ता के जरिए दायर याचिका में केंद्रीय गृह मंत्रालय, सीबीआई, हरियाणा और राजस्थान पुलिस को उनकी 16 जुलाई, 2016 से लापता बेटी को ढूंढ़कर लाने के निर्देश देने को कहा है।किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए हुए महिला ने विकल्प के तौर पर अपनी बेटी के पार्थिव शरीर की तलाश कर उसके अंतिम संस्कार के लिए सौंपने की अपील की है।
पीड़िता ने अपनी याचिका में हरियाणा के रोहतक के रहने वाले हिमांशू और उसके माता-पिता बाला और रितेश बिड़ला को आरोपित करते हुए कहा है कि इन्हीं लोगों ने उनकी बेटी का अपहरण किया था। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में दो एफआईआर कोटा और रोहतक में भी दर्ज कराई हैं लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस जांच नहीं हुई है। इसके बाद उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका राजस्थान हाई कोर्ट में भी दायर की लेकिन वहां उन्हें निचली अदालत में जाने को कहा गया। पर अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकला है।







