हिमाचल में सामने आया तीन हजार करोड़ का घोटाला : आरोपी देश छोड़ कर हुआ फरार

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चंडीगढ़ 05 मार्च 2018। पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में तीन हजार करोड़ रुपए का कर घोटाला सामने आया है। हिमाचल के सिरमौर जिला के पावटा क्षेत्र में स्थापित एक औद्योगिक इकाई इंडियन टेक्नोमेक कंपनी लिमिटेड के मालिक डॉ. राकेश शर्मा ने विशेष औद्योगिक पैकेज की आड़ में इस घोटाले को अंजाम दिया है। वह पिछले चार सालों से फरार हैं।
इंडियन टेक्नोमेक कंपनी लिमिटेड ने सन 2009 से 2015 के बीच उत्पादन के जाली आंकड़ों के आधार पर करीब 2100 करोड़ रुपए का बिक्री कर और एक्साइज ड्यूटी का घोटाला किया, जो अब बढ़कर करीब 3000 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें बैंकों से लिया गया कर्ज, उसका ब्याज और आयकर भी शामिल है। सूत्रों की मानें, तो घोटाले की राशि और अधिक हो सकती है। दरअसल यह कर चोरी का मामला वर्ष 2014 में सामने आया था। जब हिमाचल प्रदेश कराधान एवं बिक्रीकर विभाग की आर्थिक जांच इकाई ने पाया कि कंपनी के वास्तविक उत्पादन और बिजली के बिलों में काफी फर्क है। उत्पादन की तुलना में कंपनी के बिजली के बिल काफी कम थे, जिससे साबित हुआ कि कंपनी अपने उत्पाद सिर्फ कागजों पर ही पैदा कर रही थी और वास्तव में इसकी पावटा स्थित इकाई में बहुत कम उत्पादन हुआ।

जांच में सामने आया है कि इंडियन टेक्नोमेक कंपनी लिमिटेड के मालिक डॉ. राकेश शर्मा मूलतः चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, जिन्होंने हिमाचल प्रदेश को मिले विशेष औद्योगिक पैकेज का फायदा उठाने के लिए कंपनी बनाई और जिसमें हिमाचल प्रदेश के एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के बेटे को भी निदेशक बनाया ताकि घोटाले को अंजाम दिया जा सके। डॉ. राकेश शर्मा पर धन शोधन का भी मामला दर्ज किया गया है। सूत्रों के मुताबिक राकेश शर्मा टैक्स चोरी करके बचाए गए पैसों का इस्तेमाल कई औद्योगिक इकाइयों के वित्तपोषण में करते थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक मामला धन शोधन और आयकर से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी जांच का जिम्मा प्रवर्तन निदेशालय को सौंपा गया है। यह फैसला बीते शुक्रवार को शिमला में हुई अधिकारियों की एक बैठक में लिया गया।

घोटाले में हिमाचल प्रदेश सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हिमाचल प्रदेश एक्साइज और सेल्स टैक्स विभाग के प्रधान सचिव जे.सी शर्मा ने मामले की पुष्टि की है। टैक्स घोटाले का आरोपी डॉ. राकेश शर्मा पिछले चार सालों से भूमिगत है। उस पर न केवल टैक्स घोटाले का आरोप है बल्कि बैंकों से लिए गए ऋण न चुकाने का भी आरोप है। इस घोटाले में हिमाचल सरकार के अधिकारियों की मिलीभगत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपी की फर्म ने बिजली के बिल और मजदूरों की दिहाड़ी भी अदा नहीं की। डॉ. राकेश शर्मा ने सन 2009 में पावटा के माजरा में एक रिफाइंड नोबेल अलॉयज निर्माण की इकाई स्थापित की थी जिसकी इकाइयां ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और मेघालय में भी हैं।

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