सेवक से सवाल पूछना अपराध कैसे : नेहा सिंह राठौर
लखनऊ, 7 दिसंबर 2025 : भोजपुरी लोक गायिका और यूट्यूबर नेहा सिंह राठौर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। मामला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले पर उनके सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की थी। कोर्ट ने इसे ‘पीएम के नाम का अपमानजनक इस्तेमाल’ बताया और कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील समय पर किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
पहलगाम हमला: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी। हमले के ठीक अगले दिन (23 अप्रैल) नेहा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति-धर्म की राजनीति कर रही है और हमले को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकती है। एक पोस्ट में उन्होंने सत्ताधारी दल के एक कार्टून पर भी टिप्पणी की, जिसे उन्होंने असंवेदनशील बताया।
FIR और आरोप: लखनऊ के हजरतगंज थाने में कवि अभय प्रताप सिंह की शिकायत पर एफआईआर दर्ज हुई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 (देशद्रोह के समकक्ष), 159 (विद्रोह भड़काना) और अन्य धाराओं के तहत केस है। आरोप है कि नेहा के पोस्ट ने सामाजिक वैमनस्य फैलाया, राष्ट्रीय एकता को खतरा पहुंचाया और पाकिस्तानी मीडिया ने इन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। यूपी में कई जगह इसी तरह की शिकायतें हुईं।

कोर्ट का फैसला: जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने कहा, “भाषण की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) से मिलती है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता पर प्रतिबंधों के अधीन है।” कोर्ट ने नोट किया कि नेहा ने 7 महीने से जांच में सहयोग नहीं किया और पोस्ट ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिम वाले समय’ में किए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले FIR रद्द करने की याचिका खारिज कर चुका है।
नेहा का पक्ष: ‘सेवक से सवाल पूछना अपराध कैसे?’
बेल खारिज होने के बाद नेहा ने एएनआई को इंटरव्यू दिया। उन्होंने कहा:”प्रधानमंत्री की आलोचना करने की वजह से मेरे ऊपर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जा रहा है। क्या प्रधानमंत्री ही देश हैं? अगर वे सच में देश के सेवक हैं, तो सेवक की आलोचना क्यों नहीं की जा सकती? सेवक से सवाल क्यों नहीं पूछा जा सकता?”
“भागूंगी नहीं। गोली मारेंगे तो गोली खा लूंगी, सूली पर चढ़ाएंगे तो चढ़ जाऊंगी। सीना चीर कर तो दिखा नहीं सकती मैं।”
नेहा ने दावा किया कि उनका इरादा पर्यटकों की सुरक्षा पर सवाल उठाना था, न कि कोई गाना या उकसावा। उन्होंने कहा, “पुलिस ने कोई नोटिस नहीं दिया, फिर भी मैं सहयोग करने को तैयार हूं।” वे सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बता रही हैं। एक्स पर उनके एक वीडियो पोस्ट (ID: 1997525678028407065) को हजारों व्यूज मिले, जहां वे भागने से इनकार करती नजर आ रही हैं।
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : – https://x.com/i/status/1997525678028407065
सोशल मीडिया पर दो राय
यह मामला एक्स पर गरमाया हुआ है। एक तरफ नेहा को ‘आवाज दबाने’ का शिकार बताने वाले, दूसरी तरफ उन्हें ‘देशविरोधी’ ठहराने वाले। यहां कुछ प्रमुख रिएक्शन्स:
- यूजर निशांत @NishantUser : “नेहा जी, पीएम देश नहीं हैं, लेकिन देशवासियों ने उन्हें तीसरी बार चुना। आपने पहलगाम हमले का मजाक बनाया, घटिया टिप्पणी की। आपका बौखलाना चालाकी दिखाता है।”
- अजय प्रताप सिंह @AjayPratapS : “सवाल पूछना और अभद्रता में फर्क होता है।”
- @rose_ : “सवाल सरकार से था, देश से नहीं। सत्ता की आलोचना को राष्ट्र-विरोध कैसे मान लिया? नेहा अकेली नहीं, हर आवाज लोकतंत्र की ताकत है।”
- @Sanju_Verma_: “रैबिड रैबलराउजर ने पीएम का अपमान किया और पहलगाम हमले का मजाक उड़ाया। अब रो रही है।”
- Rosy (@rose_k01 : “कोर्ट ने साफ कहा: अपमानजनक पोस्ट। स्वतंत्रता बिना जिम्मेदारी के नहीं।”
- कई यूजर्स ने नेहा को ‘हिम्मत वाली आवाज’ बताया, तो कुछ ने ‘फरार’ करार दिया। एक पोस्ट में कहा गया, “नेहा जैसी आवाजें दबाने की कोशिश फासीवादी सत्ता करती है।”
आगे की क्या सम्भावना है ?
नेहा सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रही हैं। पुलिस ने पहले ही कई जगह छापेमारी की है, लेकिन वे फरार नहीं बताई जा रही। यह केस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता vs राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को हवा दे रहा है। क्या नेहा को न्याय मिलेगा या ‘सेवक’ से सवाल पूछना महंगा पड़ेगा? आने वाले दिन ही बताएंगे।






