Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, August 8
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»धर्म»Spirituality

    हरि अनंत हरि कथा अनंता।

    By July 6, 2018Updated:July 7, 2018 Spirituality No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 821
    वेद-पुराण गवाहि सब सन्ता।।
    जय सियाराम,सियाराम जय-जय राम।
    राम रामसिया राम सियाराम जय-जय राम।।
    राम की कथा की चर्चा करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने यह बात कही है। युगों-युगों से लोग राम कथा कहते और सुनते चले आ रहे हैं। हर कथा कहने वालों ने राम कथा को अपने से पहले किसी वक्ता से इस कथा को सुना है। हर श्रोता कथा सुनकर अपने विचारों और भावों के अनुसार भगवान राम के स्वरूप को अपने मन मे गढ़ता है भगवान भी कहते हैं कि मेरा भक्त जिस रूप में मुझको भजता है, मै उसी रूप में उसको दर्शन देता हूँ। भगवान शबरी, जटायु, अहिल्या और हनुमान जी के स्वामी हैं तो वानरराज सुग्रीव के सखा हैं और रावण आदि राक्षस गण उनको शत्रु रूप में स्मरण करते हैं तो भगवान राम उनको शत्रु के रूप में प्राप्त होते हैं। यही बात भगवान कृष्ण के बारे में भी सत्य हैं। यही कारण है कि ईश्वर तत्व मूल रूप से एक होने के बाद भी हम सब को अनंत रूप में भाषित होता है जैसे एक प्रकाश की किरण अलग-अलग तलों से परिवर्तित होने के बाद अलग-अलग रूप और रंग में झिलमिलाती नजर आती है।
    “जाकी रही भावना जैसी।
     प्रभु मूरत देखी, तिन तैसी।।
    इसी कारण हरि अनंत है। जैसी मेरी भावना वैसे मेरे राम।
    एक कथा और आती है कि राम का जब भूलोक से जाने का समय आया तो उन्होंने सोचा हनुमान हमें यहां से जाने नहीं देंगें। उन्होंने अपनी अंगूठी गिरा दी और हनुमान से अंगूठी खोज कर लाने को कहा अंगूठी खोजते हुए वे नागलोक पहुंच गये और नागों के राजा से अपनी बात कही। नागराज ने उनसे कहा कौन सी अंगूठी? हर कल्प में रावण पैदा होता है और फिर रामअवतार होता है और भक्त हनुमान अंगूठी ढूंढने यहां आते हैं। उधर अंगूठियों का ढेर लगा हुआ है। तुम जाओ और अपनी अंगूठी पहचान लो और ले जाओ। इससे भी काल की निरंतरता का पता चलता है। हर कल्प में चतुर्थयुग आते हैं और उनमें होने वाली घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहती है और आगे भी होती रहेगी।
    कहते हैं कि सबसे पहले राम कथा महर्षि बाल्मीकि के कहने पर लव और कुश ने स्वयं भगवान राम को अयोध्या जाकर सुनाई। इस पर रामजी ने पूछा यह कथा तुमको किसने बताई। तब लव-कुश ने उन्हें बताया। यह कथा रामायण के रूप में महर्षि बाल्मीकि ने लिखी है। इस पर भगवान राम ने कहा कि मेरे कहने से अधिक सुंदर ढंग से तुम लोगों ने मेरी यह कथा कही है।
    नैमिषरण्य अर्थात नीमसार सीतापुर में चौरासी हजार श्रीषियों ने तपस्या की है वहां वेदव्यास जी की गद्दी भी है। रोमहशरणजी उन लोगों को राम कथा सुनाया करते थे। वह प्रसिद्ध राम कथा वाचक थे। वे इतने अच्छे ढंग से राम कथा सुनाते थे कि सुनने वाले भाव विभोर हो जाते थे और लोगों के प्रेम भाव के कारण हर्ष से रोम खड़े हो जाते थे। इसलिए उनका नाम ऋषि रोमहर्षण पड़ गया था। उनके पुत्र भी श्रेष्ठ राम कथा वाचक हुए। उनका स्वर काफी ऊंचा था और वे उच्च स्वर में राम कथा का पाठ करते थे। अतः उनका नाम उग्रश्रवा पड़ गया था। महर्षि वेदव्यास के आश्रम में नीमसार के राम चर्चा यह लोग करते रहते थे। महर्षि वेदव्यास ने स्वयं युधिष्ठिर को राम कथा सुनाई। महाभारत के वर्ण पर्व में इसकी चर्चा है। महाराज युधिष्ठिरने 12 वर्ष का वनवास और अज्ञातवास भोगने की चर्चा वेदव्यास  से की तो उन्होंने कहा कि तुमने तो जुआ खेला और राजपाठ खुद हारे। किन्तु भगवान राम की कथा सुनाते हुए बोले कि रामजी ने तो कुछ भी नहीं किया फिर भी उनको तो चौदाह वर्षों का वनवास भोगना पड़ा। लंकापति रावण ने सीता माता का हरण कर लिया इस कारण वनवास के साथ साथ उनको पत्नी वियोग भी सहन करना पड़ा।
     भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ है इसे रामायण के बालकांड में अयोध्या का वर्णन है। बाद में महर्षि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को महाराज दशरथ से मांग कर अपने साथ ले जाते हैं। महर्षि के यज्ञ की रक्षा में ताड़का राक्षसी का वध राम ने किया। ताड़का वध का स्थान वर्तमान में बिहार के बक्सर जिले में है। मिथिला के राजा जनक ने सीता की विवाह विवाह के लिए स्वयंवर की रचना की। जिसमे भगवान की रचना की विवाह के लिए सुंदर की रचना की जिसमें भगवान शिव के ‘अजगव’ नामक धनुष को तोड़कर भगवान राम ने जनक का प्रण पूरा किया और फिर राम और सीता का विवाह हुआ इस प्रकार मिथिलाञ्जल राम कथा के साथ जुड़ा हुआ है।
     वनगमन के प्रसंग में इलाहाबाद, जिले का श्रंगबेर पूरा का नाम आता है। जहां पर निषाद राज गुह ने राम-लक्ष्मण और जानकी को गंगा पार कराई थी। रामजी के प्रसंग में अयोध्या के बाद सबसे प्रसिद्ध धाम चित्रकूट है। जहां पर भगवान राम और भरत का मिलाप हुआ था। महर्षि अत्रि और अनुसुइया के कहने पर कामदगिरि पर भगवान राम कुछ समय के लिए रहे थे। राम के संबंधित कई स्थान चित्रकूट में है। इसके बाद भगवान राम महाराष्ट्र के नासिक जिले के पंचवटी नाम स्थान में बहुत दिनों रहे थे। रामकुंड आदि कई स्थान भगवान राम के संबंधित माने जाते हैं।
     इसके बाद कि अपनी यात्रा में भगवान राम आंध्र प्रदेश में प्रवेश करते हैं। जटायु और रावण के बीच हुए युद्ध के स्थान का नाम भद्राचलम है। जहां भगवान राम का भव्य मंदिर है। यहीं ऋयमुक पर के पास हनुमान राम से मिले थे और सुग्रीव से भगवान राम की मित्रता कराई थी। इसके बाद भगवान राम अपनी वानर सेना के साथ आज के तमिलनाडु के रामेश्वरम नामक स्थान पर पहुंचे थे। भगवान राम के द्वारा स्थापित शिवलिंग पर भव्य रामेश्वरम मंदिर बना हुआ है। सेतुबंध के स्थान पर धनुषकोडि में भी भगवान राम और विभीषण का मंदिर बना हुआ है। धनुषकोडि भारत भूमि का अंतिम छोर है। जहां से समुद्र पर पुल बनाया गया था। यहां से दूरबीन से देखने पर लंका का तट दिखाई देता है। यह सब स्थान भगवान राम और राम कथा से जुड़े हुये हैं।
    कहते हैं कि सबसे पहली बार राम की कथा भगवान शंकर ने माता पार्वती को सुनाई थी इसीलिए उसको आदि रामायण कहते हैं। जिस समय शंकर जी राम कथा सुना रहे थे वहां पर तो कथा पूरी होने से पहले माता प्रविधि की नींद आ गई शंकर जी वहां पर यह कथा सुना रहे थे तो कथा पूरी होने से पहले माता पार्वती को नीद आगई। शंकर जी जहां पर कथा सुना रहे थे वहां पर एक कौवे का घोसला था। उसमे बैठे काग ने पूरी कथा सुन ली। उस पक्षी का पुनर्जन्म काकभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि ने यह कथा गरुड़ जी को सुनाई। शंकर जी के द्वारा कही गई यह रामकथा आध्यातम रामायण के नाम से भी जानी जाती है।
    इसको ही विश्व की पहली रामायण माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि ने राम कथा को पुनः श्लोक बद्ध किया जिसको उनके नाम पर बाल्मीकि रामायण कहा जाता है। गोस्वामी तुलसीदास ने अब्दुर्रहीम खानखाना के सुझाव पर अवधी भाषा में रामकथा लिखी और उसका नाम रामचरितमानस रखा। अलग-अलग प्रदेश व समय में बहुत सी राम कथा लिखी बहुत सी रामकथायें लिखी अतः बहुत सी रामायण की रचना हुई। उनमें से 327 रामायण का पता चला है। हिंदी में रामचरितमानस के प्रभावित हो कर मैथलीशरण गुप्त जी ने ‘संकेत’और ‘उर्मिला’नामक खंडकाव्य लिखे।
    – हेमंत कुमार/जी क़े चक्रवर्ती

    Keep Reading

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    Do you know why the Kanwar Yatra is undertaken and what its history is?

    क्या आप जानते हैं कांवड़ यात्रा क्यों की जाती है और क्या है इसका इतिहास

    हनुमान मंदिर से लौटते समय रास्ता क्यों बदलते हैं लोग?

    सावन की वापसी और धान के पौधे

    CM Yogi visited the shrines of Baba Vishwanath and Kaal Bhairav ​​on the first day of Shravan.

    श्रावण के पहले दिन बाबा विश्वनाथ और काल भैरव के दरबार में पहुंचे CM योगी

    Lucknow: 18th Sapadalaksh Rudrabhishek started with the chanting of Har Har Mahadev.

    लखनऊ: हर-हर महादेव के जयघोष के साथ शुरू हुआ 18वें सपादलक्ष रुद्राभिषेक

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Sunny Deol and Preity Zinta met CM Yogi.

    सनी देओल और प्रीति जिंटा ने सीएम योगी से की मुलाकात

    August 7, 2026
    Lisa Ray Breaks the Silence on Midlife Health

    लिसा रे का मिडलाइफ हेल्थ मिशन: नई विशेषज्ञ टीम के साथ महिलाओं को मिलेगी वैज्ञानिक और समग्र देखभाल

    August 7, 2026
    Godrej launches state-of-the-art material handling plant in Khalapur.

    गोदरेज ने खालापुर में लॉन्च किया अत्याधुनिक मटेरियल हैंडलिंग प्लांट

    August 7, 2026

    XElectron ने Amazon और Flipkart Freedom Sale में स्मार्ट प्रोजेक्टर्स व पोर्टेबल मॉनिटर्स पर धमाकेदार ऑफर लॉन्च किए

    August 7, 2026
    Handloom Craftsmanship Takes Centre Stage at NABARD Exhibition

    नाबार्ड की प्रदर्शनी में दिखा हथकरघा का हुनर

    August 7, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading