सावधान, अगर आप भी डिब्बा बंद जूस पीते है तो फिर एक बार इसे ज़रूर पढ़े

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गर्मियों के आते ही लोगों का खान-पान एकदम बदल जाता है। वह ऐसी चीजों का सेवन अधिक करते है जो आपको गर्मी में ठंडक का अहसास कराती हैं। चाहे बच्चे हो या फिर बड़े स्मूदी, सॉफ्ट ड्रिंक्स आइसक्रीम, और जूस वगेरह सभी को यही चीज़े बहुत पसंद आती हैं।
और इन्ही में से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो डिब्बाबंद जूस का प्रयोग ज़्यादा करते हैं अगर आप डिब्बाबंद जूस के बजाए ताजे फलों का सेवन किया जाए तो ये उस जूस से ज़्यादा बेस्ट रहता हैं क्योंकि यह पैकेट वाले जूस आपकी सेहत को फायदे की बजाए नुकसान देते है।
असल में फलों में प्राकृतिक मिठास व रंग होता है इसीलिए इसमें अलग से और मिठास व रंग देने वाली कोई भी चीज को मिलाने की ज़रूरत नहीं होती है।
डिब्बाबंद जूस पीने के नुकसान
पोषक तत्वों की कमी
अगर आप लोग ये सोचते हो कि डिब्बाबंद जूस से आपको बहुत ज़्यादा पोषक तत्व मिलेंगे तो फिर आप एकदम गलत हैं। दरअसल पैकेट वाले जूस बनाने के लिए सबसे पहले फलों के रस को उबाला जाता है जिससे उसके सारे बैक्टीरिया खत्म जाए परन्तु गर्म करने से बैक्टीरिया के साथ साथ इसके सारे Vitamins व अन्य पोषक तत्व भी खत्म हो जाते हैं। इससे बॉडी को फाइबर नहीं मिलता है। अगर आप जूस पीने की बजाए, सीधे फलों का सेवन करेंगे तो फिर ऐसा करने से आपको पोषक तत्व भी मिलेंगे और साथ ही साथ फाइबर भी।
मोटापा
डिब्बे वाले पेक जूस आपके वजन को भी बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक फल व सब्जियों की तुलना में यह डिब्बाबंद जूस वजन को तेज़ी से बढ़ाते हैं।
डायबिटीज
अगर आप डायबिटीज के रोगी हैं तो फिर आपको इन डिब्बाबंद जूस का इस्तेमाल भूल से भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ये जूस रिफाइंड और शुगर से बने होते हैं जो कि डायबिटिक लोगों के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है। भले ही इसमें शुगर फ्री की प्रस्तुतीकरण किया जाता हो तब भी डायबिटीज के मरीजों को इनसे परहेज ही करना चाहिए।
कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल
इन्हें ज़्यादा लंबे टाइम तक सुरक्षित रखने व कलर देने के लिए कृत्रिम रंगों का प्रयोग किया जाता हैं। कई बार तो ये रंग स्वास्थ के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
पेट की गड़बड़ी
सेब, नाशपाती, चेरी जैसे कुछ फलों में सोर्बिटोल जैसी शुगर होती है जो कि आसानी से नहीं पचती जो बाद में पेट में गैस, दस्त और डायरिया जैसे परेशानी खड़ी कर सकती है।
सोर्बिटोल एक कार्बनिक अल्कोहल होती है जो कि चीनी या फिर मिठास के लिए खाने और टूथपेस्ट जैसी चीज़ों में प्रयोग की जाती है। और इस कृत्रिम मिठास का प्रयोग आजकल काफी चीजों में हो रहा है।
अगर विशेषज्ञों की मानें तो वह यही कहते है कि इन डिब्बे वाले जूस में बहुत ज़्यादा मिठास होती हैं जो कि सेहत को काफी नुकसान देती हैं और खास तोर पर बच्चों के लिए क्योंकि यह बॉडी में शक्कर की मात्रा को बढ़ाती है जो हमारे स्वास्थ के बिलकुल भी सही नहीं है।
इससे कम उम्र में भी मोटापे जैसी कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता हैं। इसकी जगह पर अगर आप गर्मियों में ज़्यादा से ज़्यादा ताज़े फल और उनका जूस, लस्सी (छाछ) का सेवन करे तो ज़्यादा अच्छा रहेगा है। कोलेस्ट्राल को नियंत्रित और acidity से राहत दिलाने में छाछ सबसे बेस्ट है।
दोस्तों इसीलिए आप सब से हाथ जोड़कर निवेदन है कि विज्ञापन के मायाजाल में फंसकर आप अपने स्वास्थ के साथ छेड़-छाड़ ना करे अपने और अपने परिवार वालो की सेहत को नज़र में रखते हुए बाज़ार से ताज़े फल लाकर घर में ही जूस बनाए।
अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो फिर आपके पास के बाज़ार में जूस वाले से ताज़ा-ताज़ा जूस निकलवाकर लाए ताकि आपका पैसा आपके ही शहर में रहे, विदेश ना जाए ऐसा करने से आपका अपना शहर ही तरक्की करेगा। कभी सोचा है आप ने कि अगर किसी ठेले वाले से जूस लेते है और आपके आसपास के लोग भी डिब्बापैक जूस को छोड़कर उसी ठेले वाले से ताजा जूस लेने लगे तो फिर कल वह खुद की दुकान ले लेगा।

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