लखनऊ। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा पूरे देश में लागू किए गए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को जल्द ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के वाणिज्य और प्रबन्ध के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने गुरुवार को यहां बताया कि जीएसटी आर्थिक सुधार की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है और आम जनता को इसके फायदों के बारे में बताए जाने के साथ-साथ इसे पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जीएसटी का विषय वाणिज्य और प्रबन्ध के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। हमने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से आग्रह किया है कि वे वाणिज्यकर विभाग से तालमेल करके अपने-अपने विश्वविद्यालय में जीएसटी को लेकर एक संगोष्ठी आयोजित करें, जिसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट, प्रबुद्ध वर्ग के लोगों, अध्यापकों, व्यापारियों तथा छात्रों को आमंत्रित किया जाए। प्रदेश के माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा मंत्री ने स्कूल तथा कालेजों में अध्यापकों की समस्याओं के जल्द निवारण की दिशा में अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि अध्यापक दुखी मन से पढ़ा नहीं सकता। वह अपने तबादले, प्रोन्नति और पेंशन तथा अन्य चीजों के लिए दौड़ता है। निचली कक्षाओं के अध्यापकों को जनगणना तथा अन्य गतिविधियों में लगा दिया जाता है, जिससे वे शिक्षण कार्य पर ध्यान नहीं लगा पाते। उन्होंने कहा कि इन अध्यापकों को जनगणना तथा अन्य गतिविधियों से हटाया जाएगा, ताकि वे अपना मुख्य कार्य यानी शिक्षण का काम कर सके। उनकी पेंशन तथा अन्य संदर्भों को हल करने के लिए सरकार तत्पर है।







